सोमवार, 1 अप्रैल 2013

मार्च का महीना और वैशाख नंदन

कभी किसी ने कहीं लिखा था कि मार्च महीने में दफ्तरों और सरकारी कर्मियों के आवास के लगे गमलों में फूलों के रंग ज्यादा चटख हो जाते हैं -इशारा साफ़ था कि इन दिनों सरकारी खजाने का मुंह जो वैसे तो   साल भर तक  बंद सा रहता है मगर मार्च महीने के आते ही चौड़ा खुलने लगता है और आख़िरी दिनों में तो अपनी फुल सीमा पर खुल उठता है और करोड़ों अरबों का निस्तारण एक दो दिनों में ही हो जाता है , मगर मुझ जैसे रहीम शहीम और मोहकमाये मछलियान के आफीसर के लिए यह महीना जी का जंजाल बनकर आता है -खासकर महीने की अंतिम तारीख तक वित्तीय स्वीकृतियां मिलती रहती हैं जिनका आहरण 31 मार्च तक कराया जाना अनिवार्य होता है . अन्यथा अधिकारी का गला फंस जाने का  भयपूर्ण माहौल बनने लगता है। हम एक ऐसी ही जहालत में हलकान थे तभी मोबाईल पर फेसबुक में अनूप शुक्ल महराज का अपडेट देखा था तो वे ठीक 31 तारीख का और उस दिन पड़ने वाले इतवार का गुणगान पूरी फुरसत में किये जा रहे थे -अब यह पढ़कर कहीं कुछ जल- भुन (सुलग का प्रीतिकर शब्द ) ही तो गया -मैंने टिपियाया, महराज डी डी ओ होते तो जानते -अब मेरी जो आशंका  थी वह सच निकली कि वे कहीं यह न पूछ लें कि ये डी डी ओ क्या होता है -और लीजिये उन्होंने पूछ ही लिया -मैं जी. के.  की ऐसी अज्ञानता से बहुत चिढ़ता हूँ -तो उन्हें टका   सा जवाब दे टरका दिया कि इसके बारे में सिद्धार्थ शंकर  त्रिपाठी जी से पूछ लीजिये -अब यह उनके लिए हिंट साबित  हो गया -अब इतने समझदार तो हैं ही अपने फुरसतिया शुकुल -तुरंत कहे कि हम प्रोडक्शन वाले आफीसर हैं आहरण वितरण अधिकारी (डी डी ओ ) नहीं -काश यह आपको पता होता अनूप जी तो उस दिन हम जलने भुनने से बच गए होते ....

खैर मुझे पता नहीं कि सिद्धार्थ जी से अनूप जी ने इस बारे कुछ तहकीकात की या नहीं ,नहीं तो सिद्धार्थ जी उन्हें मेरे उस घबराए फोन का जिक्र भी जरुर किये होते जो  एक ट्रेजरी आहरण की समस्या में मैं उनसे मदद मांगी थी -मगर एक ब्लॉगर और एक बड़े खजाने के अधिकारी सिद्धार्थ जी में अंतर तो है ही  - ब्लॉगर धर्म का निर्वाह कर अत्यधिक व्यस्तता के बावजूद भी वे बोले बतियाये मगर अंत में टका सा जवाब मिल गया कि मेरी समस्या मेरे ही खजाने का अधिकारी दूर करेगा और मैं उन्ही की शरण में जाऊँ -खैर कल रात 10 बजे मामले का निपटारा निरापद तरीके से हो गया .मैंने यहाँ के सिद्धार्थ जी के समकक्षीय सीनियर ट्रेजरी आफिसर श्री राकेश सिंह जो ब्लागरों के दुर्भाग्य से अभी तक ब्लॉगर नहीं हैं का  बहुत आभार व्यक्त किया -काश अधिक से अधिक ट्रेजरी के पदाधिकारी ब्लॉगर हो जाते -इस दिशा में सिद्धार्थ जी के सहयोग की अपेक्षा रहेगी .

ले देकर किसी तरह मार्च बीता तो आज मूर्ख दिवस आ धमका . मैंने उत्साह से फेसबुक खोला कि इस पुनीत अवसर पर अनूप जी कुछ आयोजन किये होंगें मगर वहां तो कुछ दिखा ही नहीं -मैंने तुरत यह अपडेट सटाया- इतना सन्नाटा है क्यों है भाई यहाँ ? तो लोग जैसे सोते  से जागे और सन्नाटे को तोड़ दिया और अभी भी तोड़ते ही जा रहे हैं . मगर आश्चर्य है व्यंगकार भाई आज रहस्यात्मक चुप्पी साधे हुए हैं या फिर आत्मावलोकन में लगे हैं -आपने भी नोटिस किया होगा कि आपके करीब कल तक मुखर रहने वाले कुछ लोग आज सहसा चुप हो गए हैं और कल तक चुप रहने वाले अकस्मात मुखर हो गए हैं -यह आज के पुनीत दिवस का महात्म्य है। वैसे अप्रैल फूल फिरंगियों की देन हैं मगर यह अपनी विरासत छोड़ गया है अन्यथा हमारे यहाँ का ऐसा ही पावन दिवस वैशाख नंदन जी को समर्पित है ,आप इस शख्सियत तो परिचित होंगें ही-न हों तो संतोष त्रिवेदी जी तफसील से बता देगें -हाँ वैशाख नंदन जी का जब समय आएगा तो अपने आप आपको पता चल जाएगा और उनके दिव्य दर्शन भी  हो जायेगें।   वैसे ब्लॉग जगत में एक और सन्नाम शख्स है अपने ताऊ जिनके पास वैशाख नंदनों की अच्छी जमात है। उनसे भी आज ही पूछ लीजिये -क्या आप पूछने जा रहे हैं?? 

19 टिप्‍पणियां:

  1. अब आपने जिसे वैशाख नंदन कहा है देखें वे क्या कहते हैं! वैसे भी दो बड़ों के बीच नहीं बोलना चाहिए। :)

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  2. मार्च की व्यथा और इस महामूर्ख दिवस के अवसर पर हमारा विश्राम.. ऐसे में आपकी यह पोस्ट... समझने की चेष्टा कर रहा हूँ!! बकौल देवेन्द्र पाण्डेय - वैसे भी दो बड़ों के बीच नहीं बोलना चाहिए!! :)

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  3. आज के शुभ दिवस पर कई मुख्य ब्लौगरों का पावन स्मरण तो आपने करवा ही दिया है...

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  4. दिन तो सभी अच्छे होते जिस दिन इंसान मूर्ख बन जाता है वही उसके लिए मूर्ख दिवस होता है,
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  5. अच्छा है कि महामूर्ख दिन ३१ मार्च के बाद ही आता है।
    सरकारी अधिकारीयों को अपनी समझ बूझ दिखाने का पूरा अवसर मिल जाता है।

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  6. ....हम वैशाख नन्दन के साक्षात् प्रमाण हैं,बाकी हम चुप रहेंगे।

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  7. ओहो, तो बात यहाँ तक पहुँच गयी थी। चलिए डीडीओ की पीड़ा से परिचय कराकर आपने ठीक ही किया। मैं तो कोषागार में ही रात साढ़े बारह बजे तक डँटा रहा, सुबह सोकर उठने के बाद तैयार होकर दुबारा पहुँच गया ताकि किसी भूले भटके डीडीओ की कोई समस्या बची रह गयी हो तो उसे दूर कर सकूँ। दिनभर इन्तजार करता रहा लेकिन कोई खास समस्या हाजिर नहीं हुई। सबकुछ सकुशल निपट गया। अप्रैल फूल का ध्यान ही नहीं रहा।

    अभी लौटकर आया तो फेसबुक ने याद दिलाया कि आज मूर्खता को सेलीब्रेट करने का दिन है।

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  8. बकौल राग दरबारी के ड्राइवर साहब -"ऊंची बात कह दी शिरिमानजी ने।"

    सूचनार्थ बता दें कि दो दिन पहले ही अपन ने पच्चीस साल पूरे किये जबसे अपन को व्यक्तिगत DDO के अधिकार मिले हैं।



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  9. चुप तो कल मैं भी था। 1 अप्रेल मेरे पिताजी की पुण्यतिथि होती है।

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  10. लक्ष्य पूरा करने के बाद ही मूर्ख बनाने का कार्यक्रम।

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  11. मार्च महीने का महात्म्य कुछ इस तरह...बढ़िया है

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  12. बढ़िया... वैशाख नंदन जी का भी अभिनन्दन बनता है..

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  13. jindagi to roj moorkh bana rahi hai ab kya fools day manaaya jaay vaise baisaakh nandan ki vivechana aur honi chaahiye thi kaha se biasaakh me baisaakh ko hara hara dikhaaii deta hai
    anoop shukla ji ko isi bahane 1st april ko yaad kiya inhone isi mauke par apane D D O hone ki baat bhi kah kar aapke lekh ko ek garima pradan kii D D O yani DEN DAR OFFICER , fokat me khali pili karane vaala maya moh ke chakkar me pada tuchh adhikari ham to is maya moh se pare ho chuke hai atah mohe n vyape jagat gati .... so bhakto DDO ko lekar itraana kuch kuch biasakh nandan ki param gati ko hi prapt karana sariikha hai
    aabhaar kuch logo ke punah isi bahane smaran dilaane ka

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  14. ....
    ....
    कहीं किसी को मिल जाएं तो हमें भी मिलवा दीजियेगा ...

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  15. सचमुच दबाव पाने और दबाने का बैशाख के महीने में बना रहता है ...

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