शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

बनारस की एक सुबह बेहया यादों के नाम

कुछ यादें सचमुच कितनी बेहया होती हैं कि जितनी बार भी उनसे पीछा छुडाओ वे बार बार गले आ  पड़ती हैं.अब भला ये कोई बात हुयी बनारस की अल्लसुबह रामनाम जपने के बजाय बेहूदी बेशर्म यादें सर चढ़ के बोलने लगीं ...अभी अभी फेसबुक पर अपनी यह व्यथा दर्ज कर उनसे पीछा छुड़ाना चाहा मगर वे हैं कि जाने का नाम नहीं ले रहीं तो सोचा उन्हें ब्लॉग कर दूं तो शायद ब्लाक हो जाएँ ....फेसबुक पर लिखा -

बहुत दिनों से नहीं आयी है तुम्हारी याद 
हम तुम्हे भूल गएँ हो ऐसा भी नहीं .....
मगर कोई भुलाए न भूले,बुलाये न बने तब? 
तब तो ...
याद में तेरी जहां को भूलता जाता हूँ मैं 
भूलने वाले कभी तुझको भी याद आता हूँ मैं ? 
या फिर बकौल बशीर बद्र ...
अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा 
जिसने तुझे भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो ...
उफ़ ये सुबह रामनाम के बजाय किस बेवफा की याद हो आयी :( 
 मगर ये वाली याद सचमुच बड़ी बेशर्म टाईप वाली है ....मुझे चिढ इस बात की है कि ये सुबह सुबह ही क्यों कोबरा के फन  की तरह उठ आती  है? ..और वह भी सुबहे बनारस में ...तोबा.. तोबा...सुना है ऐसी यादें अक्सर शाम को आती हैं और जिन्दगी  तक के खात्में का अंदेशा दे जाती है ...अजब मरहलों से गुज़र रहे हैं दीदाओ दिल ...सहर की आस तो है ज़िंदगी की आस नहीं ...

दिलासा देने वाली बात बस इतनी है कि कोई एक अकेला मैं ही नहीं कितने ही बेहतरीन शख्सियतें ,शायर या सहरियार इन यादों में मुब्तिला होते रहे हैं और उनसे पीछा छुड़ाने के जुगाड़ में ताज़िंदगी लगे रहे हैं  ..और कुछ बेमिसाल कह गए, लिख गए....मगर अपनी तो इतनी कूवत भी नहीं ...कि उन यादों का कुछ ऐसा इस्तेमाल कर पाऊँ...उनसे तो बस पीछा छूट जाए अब ....किसी के पास कोई मेमरी इरेज़र जैसी कोई जुगत है भाई तो बताओ न ....अब मुश्किलें हद के पार हो रही हैं .....यह तो कुछ ऐसा लफडा हो गया लगता है कि रहा न दिल में वो बेदर्द और दर्द रहा.......और ये भी ......गुज़र गया वो ज़माना कहें तो किस से कहें,ख़याल मेरे दिल को सुबह-ओ-शाम किस का था......

 कुछ दोस्त मेरी इस हालत से इत्तेफाक करेगें और कोई रास्ता बतायेगें जिससे मेरी और बनारसी सुबहें बर्बाद न होने पायें....

बुधवार, 25 जनवरी 2012

राष्ट्रीय मतदाता दिवस की बधाई!


यह शुरुआत पिछले वर्ष से हुई. २५ जनवरी ,२०११  को पहला राष्ट्रीय  मतदाता दिवस मनाया गया था .दरअसल २५ जनवरी १९५० को भारत निर्वाचन आयोग का गठन हुआ था और इस लिहाज से यह  शुभ दिन लोकतंत्र के इस  अधिष्ठान का स्थापना दिवस भी है . और विगत वर्ष को यही तिथि मतदाताओं के नाम कर दी गयी ...उन्हें लोकतंत्र के प्रति उनके दायित्वों को याद दिलाने और खुद उनके महत्त्व और गौरव गान के लिए ...लोकतंत्र की सारी कवायद धरी की धरी रह जाए अगर इसके मतदाता अपने कर्तव्य का निर्वाह भलीभांति न कर पायें .यह दिवस उन्हें जगाने और चेताने के लिए है कि लोकतंत्र के वे ही कर्णधार हैं ...उनका निर्णय ही एक मजबूत या फिर कमज़ोर लोकतंत्र की आधारशिला रखता है ....विगत दशकों में जिस तरह लोकतंत्र के पहरुओं में माफियाओं और धन पशुओं का दमखम बढ़ा उसके लिए मतदाता के बजाय और कौन जिम्मेदार है ...किसी ने चुटकी लेते हुए कहा था कि शायद हम खुद ऐसे ही लोकतंत्र को 'डिजर्व' करने वाले  मतदाता है...हमें मतदाता की अपनी यह तस्वीर  बदलनी होगी....
....

आनलाईन क्विज़ विजेता राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर हुए पुरस्कृत 
भारत निर्वाचन आयोग उन तमाम कोशिशों को अंजाम दे रहा है जिससे इस देश का मतदाता विज्ञ बने और समझदारी के साथ अपने निर्णय ले ...इसी लिए विगत वर्ष से देश में मतदाता जागरूकता का अभियान चलाया जा रहा है ...जिसे सुनियोजित मतदाता जागरूकता और निर्वाचक सहभागिता -सिस्टेमेटिक वोटर एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन प्रोग्राम यानि 'स्वीप'  के नाम से जाना जा रहा है ....राष्ट्रीय मतदाता दिवस एक तरह से स्वीप कार्यक्रमों का ही समुच्चय है. स्वीप का अर्थबोध कई तरीके से  हो सकता है ...एक तो यही कि हमारे सही निर्णय ही मतदान परिणामों में स्वीप करें ...



आज बनारस में स्वीप के विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं ....मतदाताओं को आकर्षित करने और उन्हें उनके सही कर्तव्य का बोध दिलाने के लिए तरह तरह के उत्साहवर्धक और रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किये गए हैं ..कहीं मतदाता जागरूकता मानव श्रृंखला है ,तो कहीं जागरूकता मैराथन है तो कहीं जागरूकता नौकायन रैली है कहीं स्लोगन लिखे  गुब्बारों का आकाशगमन तो कहीं स्लोगन लिखी गर्वीली पतंगों की उड़ान ...एफ एम चैनेल मतदाताओं को उनके कर्तव्य की याद दिला रहे हैं तो अनेक जगह युवा मतदाताओं को मतदान की शपथ दिलाई जा रही है ....युवाओं के झुण्ड जागरूक मतदाता टोपियाँ पहने मतदान की अनिवार्यता की अलख जगाने को तत्पर हैं .....उनका नारा है जागरूक मतदाता गर्वित मतदाता .....हमें गर्व है कि हम मतदाता है ....इस अवसर के अनेक नारे खुद युवाओं ने तैयार किये हैं ....एक बानगी लीजिये ....
निर्भय हो मतदान करेगें राष्ट्र का सम्मान करेगें ,लोकतंत्र की यही पुकार मत खोना  अपना अधिकार ,बनो राष्ट्र के भाग्य विधाता ,अब जागो प्यारे मतदाता ,हम सबका मत है अनमोल ,मत जाना प्यारे तुम भूल ,मतदान का चले अभियान ,मतदाता है देश की शान ,लोकतंत्र की असली  पहचान ,शत प्रतिशत जब हो मतदान ..अदि आदि ...
आई टी  आई चौकाघाट से निकली विशाल युवा मतदाता रैली 
मतलब इस बार जोश और दमखम ज्यादा दीख रहा है और पूरी आशा है मतदान का प्रतिशत इस बार बढेगा और सही जन प्रतिनिधि के चुनाव में मददगार होगा ....आप भी मतदाता हैं तो अपने राज्य के लोकतंत्र के इस महायज्ञ  में मत रूपी हविदान करना न भूलियेगा .....
उड़ी उड़ी रे मतदाता जागरूकता पतंग: उप जिला निर्वाचन अधिकारी वाराणसी श्री रामयज्ञ मिश्र ने पतंग प्रतियोगिता की डोर ढीली की 

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

पर्चा दाखिल कर ना सके ब्लागर अफलातून


दैनिक  जागरण वाराणसी की यह रिपोर्ट पढ़िए 


पर्चा दाखिल न कर सके अफलातून

वाराणसी : घर-परिवार, पड़ोसी और रिश्तेदारों से आशीर्वाद व मंदिर में भगवान को नमन कर कैंट विस क्षेत्र से पर्चा दाखिल करने कलेक्ट्रेट पहुंचे अफलातून के सारे ख्वाब धरे रह गए। उनके साथ आए प्रस्तावकों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिले, इसके चलते आरओ ने उन्हें लौटा दिया।
सामाजिक संगठन साझा संस्कृति मंच व समाजवादी जन परिषद से जुड़े अफलातून 12 प्रस्तावकों के साथ कैंट विस सीट से नामांकन दाखिल करने एडीएम आपूर्ति के कोर्ट स्थित नामांकन कक्ष पहुंचे। चार प्रस्तावकों द्वारा बताए गए भाग संख्या व क्रम संख्या का मौजूद वोटर लिस्ट से मिलान किया गया तो नाम नहीं मिला। वोटर लिस्ट से नाम गायब होने को लेकर नामांकन कक्ष में मौजूद अधिकारियों व अफलातून के बीच काफी देर तक बहस हुई। अफलातून का कहना था कि वोटर लिस्ट आरओ कक्ष में छिपाकर रखी गई है। प्रस्तावकों के पास आयोग द्वारा जारी परिचय पत्र मौजूद है। नए परिसीमन के चलते कई क्षेत्र के वोटरों का भाग व क्रम संख्या बदल गया है। प्रस्तावक के पास यदि वोटर कार्ड मौजूद है तो यह नामांकन से जुड़े अधिकारी व कर्मचारियों का दायित्व है कि वे वोटर लिस्ट से नाम खोजकर निकालें या तो प्रस्तावकों को फर्जी कार्ड रखने के आरोप में जेल भिजवाएं।
कमेंट्री: अफलातून  भाई दस प्रस्तावकों का पहले से पूछ पछोर तो कर लिया होता ..जान पहचान तो कर ली होती ....फिर आर ओ कक्ष में पहुंचते....अपने इस ब्लॉगर भाई से भी सलाह मशवरा कर लिया होता ....अब आप  निर्वाचन आयोग की गलतियाँ गिना रहे हैं ....पहचान पत्र होना इस बात का शर्तिया सबूत नहीं हो सकता कि मतदाता का नाम निर्वाचक नामावली में हो ही ,हो सकता है वह मतदाता परिसीमन के बाद दूसरी विधान सभा में हो गए हों... इस हंगामें की खबर मुझ तक पहुँची तो देर हो चुकी थी-एक हंसोड़ इस वाकये को  बढ़ा चढ़ा कर प्रस्तुत कर रहा था ..जब मैंने पूछा क्या हो गया तो अपनी ख़ास स्टाईल में बोल पड़ा -पर्चा दाखिल कर ना सके ब्लागर अफलातून,पहुंचे न थे पहनकर टाई औ पतलून .......लोग बाग़ हंस पड़े ..मगर मेरा अनुरोध है अफलातून भाई अभी भी परचा दाखिले का वक्त है ..पूरे तैयारी  से फिर आयें ....और मतदाता सूची में प्रस्तावकों के नाम से पहले संतुष्ट हो लें .....

शनिवार, 21 जनवरी 2012

ब्लॉग जगत में एक अदद उद्धव की तलाश!

अब आप तो यह बात जानते ही हैं कि प्रेम का इज़हार कर पाने में कुछ लोग पैदाईशी कमज़ोर किस्म के होते हैं ...मतलब मिलो न मुझसे दिल घबराए मिलो तो आंख चुराए वाला मंज़र ..काजल कुमार और अभिषेक ओझा या देवांशु निगम सरीखे दीगर नौजवान लोग मेरी इस बात से इत्तिफाक नहीं करेगें मगर हम उस पीढी के हैं जब इजहारे इश्क को लेकर बड़ी जहमत होती थी ....लोग कह नहीं पाते थे मगर लम्बी लम्बी चिट्ठियाँ आहें भर भर कर जरुर लिख डालते थे और अक्सर यह भी हो जाता था वे गंतव्य तक न पहुच कर किसी रकीब या माशूका के पहलवान भाई आदि को मिल जाती थीं और बड़ा गुल गपाड़ा होता था ....अब आज शार्ट मेसेज सर्विस वाली पीढी शायद इजहारे इश्क को उतना तवज्जो नहीं देती या फिर बाकी का काम पहले ही निपटा कर बाद में जरूरत के मुताबिक़ इज़हार वैगेरह किया तो किया और न किया तो न किया, जैसा फार्मूला जो  अपने अनूप शुकुल जी टिप्पणी देने के मामले में करते हैं ....को अंजाम देती है .... 

काफी नामी गिरामी शायर या ग़ज़ल गायक भी इजहारे इश्क को लेकर काफी संजीदा रहे हैं ...जेहन में मेहदी हसन की वह ग़ज़ल अभी गूँज रही है ..बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी .....आखिर यह मुश्किल क्यों आन पड़ती है? मैंने खुद भी ऐसा शिद्दत के साथ महसूस किया है और दूसरों के मामले में भी देखा है कि कितनी ही साफगोई बरतने वाले ,खरी खरी मुंह पर सुना देने वाले मुहब्बत का इज़हार करने में टोटली फेल हो रहते हैं ....फिल्मों ,उपन्यासों में कई ऐसे बिचारे चरित्र नायकों के आख्यान भरे पड़े हैं.. और ऐसे मौकों पर भरोसेमंद दोस्त काम आते हैं और कभी तो वे भी ऐसा वाकया कर गुजरते हैं कि दुश्मन भी उनसे बेहतर लगते हैं ..लगता है भूमिका लम्बी खिंच रही है ....यह भी एक दिक्कत ही है इज़हार करने की ....बहरहाल ....

कभी कभी मुझे लगता है कि किशन कन्हाई के साथ भी कुछ ऐसा ही लफड़ा रहा होगा ..इजहारे इश्क में पूरी तरह फेल वे अपनी बासुरी का सहारा लेने पर बिचारे मजबूर होते थे.....लेकिन इससे मुश्किलें ही बढती गयीं ...कईयों को यह इल्म हो गया कि किशन कन्हाई तो असली वाला इश्क केवल उन्ही से करते हैं ....किस्सा कोताह यह कि उनकी अभिव्यक्ति की इस दिक्कत के चलते उनके इर्द गिर्द तमाम ऐसी भीड़ जुड़ने लगी जिसे वे बिलकुल भी नहीं चाहते थे मगर यहाँ भी कह नहीं पाते थे...अपने हाव भाव से यह जरुर दिखाते थे कि कोई एक ही उनकी चाहत है मगर यह भी उनका दिखावा मान लिया जाता था ...छलिया किशन ....और सब जन यही सोचती रहती थीं कि असली वाली मुहब्बत तो कान्हा  उन्ही से करते हैं ...मामला जब काफी संगीन हो गया तो किशन कन्हाई रोज रोज की चख चख से घबरा कर द्वारिका की ओर  रुख कर गए ...मगर मुसीबत ने यहाँ भी उनका दामन नहीं छोड़ा ...बिचारे  अपने एक विश्वसनीय मित्र उद्धव को अपनी असली वाली को प्रेम सन्देश के लिए नियुक्त किये ..गोकुल भेजे भी मगर यहाँ फिर वही मुसीबत ...हर गोपी यही समझे कि गोपेश्वर ने बस उन्ही के लिए सन्देश भेजा है .....उद्धव बिचारे की पूरी फजीहत हो गयी ..वो किस्सा तो आप सब जानते ही हैं ....यहाँ भी यही लगता है कि उद्धव बिचारे खुद भी अभिव्यक्ति -पटु नहीं रहे होंगे शायद और इसलिए मिशन में पूरी तरह असफल रहे ...सन्देश की डिलेवरी सही सही और सही गोपी तक नहीं पहुंचा पाए ....

मेरे जैसे अभिव्यक्ति -पंगु के लिए आज भी एक वाक्पटु उद्धव की तलाश जारी है और शायद यह एक शाश्वत खोज है .....

शनिवार, 14 जनवरी 2012

मेहदी हसन साहब ..उनसा कोई नहीं है!

मेहदी हसन साहब आई सी यू में भर्ती किये गए हैं ,उनके दुश्मनों की तबीयत नासाज है ..हम उनके भारतीय प्रशंसक ,दीवाने ये दुआ करते हैं कि वे जल्दी ठीक हों और फिर अपनी आवाज का जादू बिखरने के लिए हमारी नज़रों के सामने हों ....यह खुशी की बात है कि भारत सरकार ने उनके यहाँ इलाज के लिए वीजा की पहल शुरू कर दी है .... समकालीन ग़ज़ल गायकी के सिरमौर हैं मेहदी हसन साहब ..उनसा कोई नहीं है सारी दुनिया में और अगरचे इस सारे ब्रह्माण्ड में भी कहीं दीगर भी ग़ज़ल गायकी और ग़ज़ल गायक हों तो भी मेहंदी हसन साहब की बराबरी नहीं ..अभी तो आप भी उनकी यह ग़ज़ल सुनिए ....और उनके शीघ्र स्वास्थ्य की कामना  कीजिये ...


रविवार, 8 जनवरी 2012

लोकतंत्र के महायज्ञ में धनबल और बाहुबल की आहुति

पांच राज्यों में चुनावी रणभेरी बज चुकी है ...उत्तरप्रदेश, पंजाब,गोआ,मणिपुर और उत्तराखंड ऐसे राज्य हैं जहां विधानसभा के चुनावों  की घोषणा होने के बाद चुनावी प्रक्रिया अपने विभिन्न चरणों में है ..इस बार भारत निर्वाचन आयोग ने धनबल और बहुबल के जरिये चुनाव  जीतने वालों की  अच्छी खबर ली है ....ऐसी व्यापक और कारगर रणनीति बनी है कि कालेधन की आवाजाही और बाहुबल के प्रदर्शन से मत हासिल करना अब टेढ़ी खीर है  ...इस बारे में भारत निर्वाचन की तैयारियों का एक जायजा आप भी लीजिये ...

इस बार एक सुगठित निर्वाचन व्यय अनुवीक्षण का कार्यक्रम बनाया गया है जिसमें कालेधन,अवैध शराब  की आवाजाही पर पाबंदी लगाने और आदर्श आचार संहिता के अनुपलान के लिए कई टीमें गठित हुयी हैं ...

फ्लाईंग स्क्वायड मतलब उड़न दस्ते जिनमें प्रत्येक  विधानसभाओं में एक मजिस्ट्रेट ,एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और कई पुलिस कर्मी शामिल हैं और एक वीडियो ग्राफर भी है ...यह दिन रात अपने क्षेत्रों में चक्रमण पर हैं और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों जैसे दीवारों पर पोस्टर बैनर, वाल रायटिंग,बिना अनुमति के सभा जुलूस ,वाहनों के अनुचित काफिलों आदि पर नज़र रखे हुए हैं वहीं बिना स्रोत की नगदी ,शराब, साड़ी या मतदाताओं को रिझाने के दूसरे साजोसामान पर भी उनकी कड़ी निगाह हैं ...

वीडियो  टीमें निगरानी टीमें सभी विधानसभाओं में इनकी भी कवायद जारी है जहाँ भी आचार संहिता के उल्लंघन के मामले हैं या फिर प्रत्याशियों ने अनुचित तरीके से या बिना अनुमति के पोस्टर बैनर आदि लगायें हैं तो उनकी वीडियों क्लिपिंग बनाने , कार्यकर्ताओं/ मतदाताओं के आमोद प्रमोद पर हो रहे अनुचित व्ययों को कैमरे में कैद करने के काम में ये भी जुटी हुयी हैं ...

वीडियो अवलोकन टीमें विधानसभावार गठित इन टीमों को वीडियो क्लिपिंग, सीडी का सजगता से अवलोकन कर प्रत्याशीवार अनुचित व्ययों का विवरण तैयार करना है जिसे विधानसभावार ही गठित लेखा टीमों को प्रत्याशीचार खर्च का आकलन कर उसके खाते में डाल  देने का काम सौंपा गया है  ...

विधानसभावार लेखा टीमें ...इन्हें सभी स्रोतों से मिल रही जानकारियों की पुष्टि के बाद किस प्रत्याशी का कितना खर्चा हो रहा है उसे उसके निमित्त खाते में डालने का जिम्मा सौंपा गया है जिससे यदि वे अपनी निर्धारित चुनावी व्यय सीमा जो राज्यों में अलग अलग है को लांघें तो उनपर कार्यवाही की जा सके ....यह व्यय सीमा उत्तर प्रदेश में १६ लाख है .

स्टैटिक निगरानी टीमें   सभी थानों में कम से कम प्रत्येक चेकपोस्ट पर मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस कर्मी के नेतृत्व में यह टीम अवैध/ बिना स्रोत के धन की आवाजाही और शराब आदि की बड़ी छोटी खेपों पर कहर बनकर टूटी है ..उत्तर प्रदेश में पाऊच व्यवस्था तो पहले ही ख़त्म हो चुकी है ....

आशय साफ़ है अपनी सकारात्मक छवि और जनसेवा के जरिये अगर  चुन कर आना है तो ठीक नहीं तो आपका पत्ता साफ़ ....धन बल और बाहुबल की बातें बीते दिनों की बात हो चली है ..अपराधी ,कालेधन के कारोबारी अब विधानसभाओं और लोकसभाओं के मुंह न देख पायें ऐसी मुकम्मल व्यवस्था की आस जग चुकी है -अंततः हर बूथ पर केन्द्रीय बल की तैनाती अनुचित तरीके से मतदान करने वालों हौसलाबुलन्दो के अरमानों पर अंतिम कील है ...अगर आपकी नीयत में खोट है तो दूर रहिये मतदान स्थल के आस पास भी मत फटकिये नहीं तो जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है ..क्योकि वे किसी की नहीं सुनते ....


यह तो एक विहगावलोकन भर  है इस बार के चुनावी इंतजामिया का .....अब बारी है मतदाता की अगुवाई की और उसके बेख़ौफ़ मतदान करने की ..सारी काली संपत्ति अब लोकतंत्र के इस महायज्ञ में स्वाहा हो रही है ...उत्तर प्रदेश में ही अभी तक ६ करोड़ रूपये और कई किलो सोना चांदी चंद  दिनों  में ही जब्त की जा चुकी  हैं आयकर टीम भी मुस्तैदी से काम कर रही है ....यातायात अधिकारी वेहकिल एक्ट का सख्ती से पालन करने में जुट गए हैं ..आप अगर सही काम और इरादों के भी  दो ढायी लाख से ऊपर की नगदी लेकर इन प्रदेशों में आ जा रहे हों उनका स्रोत और वाजिब अभिलेख साथ में जरुर रखें ....

आगे भी कोशिश रहेगी की फुर्सत मिलते ही हम  इस बार के  भारत निर्वाचन के नए अभियानों की जानकारी देते रहें ....

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