रविवार, 2 फ़रवरी 2014

अथातो गुरुघंटाल जिज्ञासा......

एक दिन फेसबुक पर मैंने यह जुमला  क्या छेड़ा  कि गुरु तो गुरु ही होता है(आदि आदि ) तो इस पर काफी चर्चा हो गयी. संतोष  त्रिवेदी ने पलट वार किया की मगर चेला चेला ही नहीं रह सकता वह गुरु भी हो सकता है - अली सईद साहब इसी उत्तर की ही बाट जोह रहे थे -इस अपडेट पर लपक ही तो पड़े।  कहा, देखा न चेला पलटी  मार गया।  काफी चर्चा हुयी, गुजिश्ता टाईम के ब्लॉगर मित्र जिन्होंने अपने ब्लॉग की सुध बिसरा दी है  वहाँ आ जुटे और अपना अपना दर्शन झाड़ा और हमारा ज्ञान वर्धन किया। हमने भी ब्लॉगर तो ब्लॉगर ही होता है कि तर्ज पर सबकी फेसबुकीय टिप्पणियां झेलीं। 

मजे की बात यह हुयी कि इसी मुद्दे पर उस रात मैंने एक सपना देखा।  देखा कि उसमें अपने जमाने के कई धुरंधर ब्लॉगर्स एक ब्लॉगर मीट कर रहे हैं।  विषय था गुरुओं में गुरु और उनमें भी गुरु घंटाल की पहचान । विषय प्रवर्तन मैंने किया था।  मैंने कहा कि भारत के गुरुओं की महान परम्परा में ही आधुनिक गुरुओं की एक श्रेणी गुरु घटालों की होती है। और सम्भवतः बिगड़े शिष्य ही आगे चलकर गुरु घंटाल बन जाते हैं।  यहाँ भी अली भाई ने तुरंत  प्रतिक्रिया व्यक्त की -प्रत्यक्षं किम प्रमाणं।  मैंने उन्हें इशारे से आगे कुछ भी कहने से रोका।  संतोष त्रिवेदी भला कहाँ अपने को रोक पाने वाले थे -उन्होंने कहा कि मेरे निगाह में तो बस एक ही गुरु घंटाल है जो इन दिनों पहले की तुलना में कुछ कम सक्रिय है मगर अभी भी गुरु घंटाल नंबर वन है, अब ब्लॉगर लोगों की जिज्ञासा यह थी कि आखिर यह गुरु घंटाल होता क्या है  और यह किस तरह अन्य गुरुओं से अलग होता है।  सतीश सक्सेना जी ने कहा कि मुद्दा अहम है और इस पर वे जल्दी ही वे कुछ अपने गीत के माध्यम से लिखेगें। 

अपने समुदाय की अकेली नुमायन्दगी कर रही वाणी गीत शर्मा जी ने एक मासूमियत भरा सवाल पूछा कि क्या महिलाओं में भी गुरु घंटाल होती हैं? तभी किसी ओर  से आवाज आयी कि उन्हें तो गुरु घंटालिने कहना चाहिए। मगर आदरणीय दिनेश द्विवेदी जी ने कहा कि ये शब्द लिंग निरपेक्ष होते हैं अतः महिला वकील को वकीलाइन कहना जैसे गलत है वैसे घंटाल को घण्टालिन कहना गलत है।  इस पर कुछ आपत्तियां और आयीं और यह पक्ष प्रस्तुत किया गया कि वकील की पत्नी को वकीलाइन कहने का चलन समाज में तो है।  बहरहाल फिर से बात गुरु घंटाल पर आकर रुक गयी। किसी ने सहजता से पूछा गुरु घंटाल के लक्षण क्या क्या हैं।  अभी तक अनूप शुक्ल जी काफी चुप से बैठे थे।  उन्होंने कहा कि परसाई जी ने इस पर काफी लिखा है मगर अभी तो उन्हें याद नहीं, हाँ देखकर ही वे बता पायेगें।  तब तक एक कोने से गिरिजेश राव जी और बेचैन आत्मा गलबहियां डाले दिखे।  गिरिजेश राव ने कहा कि व्युत्पत्ति शास्त्र के मुताबिक़ गुरु घंटाल का कोई न कोई संबंध घंटे से होना चाहिए।  उनका आशय मंदिर में बजने वाले घंटे से था।  अब तक शिल्पा मेहता जी भी दिखाई दे गयीं थी, इससे वाणी गीत जी के चेहरे पर एक तसल्ली का भाव उभरा।  शिल्पा मेहता जी ने गिरिजेश जी की बात का अनुमोदन करते हुए कहा हाँ गुरु घंटाल शब्द में कुछ पण्डे और घंटे का भाव समाहित लगता है।  

तभी डॉ तारीफ़ दराल साहब और जनाब  महफूज अली भी मुझे साथ साथ बैठे दिखाई दे गए  . उन्होंने कहा कि जो भी महफूज जी का विचार होगा वही उनका भी मंतव्य समझा जाय। महफूज ने कहा कि दोनों लिंगों के गुरु घंटालों से उनका पाला तो कई बार पड़ा है मगर वे जो कुछ भी इस मुद्दे पर कहना चाहते हैं अंगरेजी में ही कहेगें। इस पर विवाद हो गया कि हिंदी ब्लागरों के बीच आंग्ल भाषा का क्या काम? महफूज जी ने चुप्पी साधना ही उचित समझा।  मुझे और कई ब्लागरों के चेहरे दिखाई पड़  रहे थे मगर वे सभी चुप चाप  इस बहस का बस श्रवण  लाभ कर रहे थे।  प्रवीण त्रयी को भी मैंने देखा और समीरलाल जी को भी मगर उनकी चुप्पी माहौल को असहज बनाये हुयी थी।  आचानक एक बड़ा शोर  सा होता लगा और मैंने देखा कि श्रीमती जी साक्षात सामने आग्नेय नेत्रों से मुझे घूर रही हैं -कब तक सोते रहेगें आज ,आफिस नहीं जाना क्या ? स्वप्न टूट गया था मगर मेरे जेहन में यही सवाल बार बार उमड़ घुमड़ रहा था कि गुरु घंटाल आखिर किसे कहते हैं और उसके लक्षण क्या क्या हैं और वह कैसे अन्य गुरुओं से अलग है? अब आप लोग ही मेरी यह जिज्ञासा दूर करिये न।  

द्वावा  त्याग : कृपया नए पुराने, भूतपूर्व और अभूतपूर्व ब्लॉगर इस स्वप्न चर्चा को अन्यथा न लें।  यह बस एक निर्मल हास्य है जिसका अभाव इन दिनों ब्लागिंग और जीवन में भी बहुत कम हो गया है। तथापि अगर कोई बंधु बांधवी अपना नाम यहाँ से हटाने को कहेगें तो ऐसा सहर्ष कर दिया जायेग!

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