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शुक्रवार, 2 मार्च 2012

४९ ओ का अन्ना फैक्टर और केजरीवाल की किरकिरी

उत्तर प्रदेश में मतदान का एक दृश्य! मतदान केंद्र पर वोट देने के लिए अपनी बारी का बेसब्री से इंतज़ार करते दो छात्र -नवयुवक जिनका मतदान करने का यह पहला अवसर है.आखिर उनका नंबर आ ही गया और वे मतदान अधिकारी प्रथम के पास पहुँचते हैं .. .....
"मुझे फ़ार्म ४९ ओ दीजिये....मुझे किसी भी प्रत्याशी को वोट नहीं देना है ..सबके सब  नालायक हैं, किसी काम के नहीं हैं ...." पीछे का लड़का भी यही मांग करता है .
"ऐसा कोई फ़ार्म नहीं है ..मतलब मुझे नहीं पता है, जाईये पीठासीन अधिकारी से मिलिए ...." उसने उन दोनों को एक ओर इशारा किया जहां पीठासीन अधिकारी बैठे थे ....
"अजीब मामला है इन लोगों को कुछ पता ही नहीं है ..." छात्र बुदबुदाए...पीठासीन अधिकारी के पास पहुंचकर  उनका स्वर खीझभरा हो गया ...उनमें से जो एक ज्यादा तेज था बोला ...
"आपके मतदान  अधिकारी को तो कुछ पता ही नहीं है ....हमें किसी को वोट नहीं देना है इसलिए हमें लाईये दीजिये फ़ार्म नंबर ४९ ओ ताकि किसी को भी वोट न देने के अपने अधिकार का हम प्रयोग कर सकें ...."
"फ़ार्म नंबर ४९ ओ? " पीठासीन अधिकारी के माथे पर बल पड़ते हैं ..फिर वह अपने सामने के कागजों को उलटता पलटता है ...परेशान सा बोल पड़ता है ..नहीं है ..ऐसा तो कोई फ़ार्म नहीं मिला है और न ही हमें ट्रेनिंग में बताया गया है ..."
"मगर केजरीवाल साहब का तो यही कहना है कि अगर कोई काबिल प्रत्याशी  न हो तो फ़ार्म  ४९ ओ लेकर आप अपना मत डाल सकते हैं .." दोनों लडके एक साथ लगभग चीखते हुए बोले ....
" आप एक काम कीजिये ... मतदाता रजिस्टर जो हमारे मतदान अधिकारी दो के पास है उस पर अपना मतदाता संख्या और साईन करके कह दीजिये कि हम मतदान नहीं करना चाहते ..हम फिर आपकी साईन कराके और अपनी भी साईन करके आपको यह करने की अनुमति दे देगें  ... मगर आप  ई वी एम मशीन में वोट नहीं डाल सकते और नहीं ऐसा कोई फ़ार्म मुझे मिला है ....जिसकी बात आप कर रहे हैं ..." पीठासीन अधिकारी ने लगभग उठते हुए कहा ....

अब तक उन छात्रों का टेम्पर लूज हो गया था ..मुंह से निकल रहे सुभाषितम में निर्वाचन आयोग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ दो शब्द  साफ़ सुनायी दे रहे थे ...अब तक शांत केन्द्रीय सुरक्षा बल का जवान सहसा हरकत में आया और अगले पल ही दोनो  छात्र खुद लम्बी लाईन के आखिरी छोर पर जा  पहुँच गए थे ...मगर वे अब  वहीं धरने पर बैठ गए ... और निर्वाचन आयोग मुर्दाबाद ,अन्ना जिंदाबाद शुरू हो गया .....निर्वाचन कंट्रोल रूम तक अनुगूंज सुनायी पडी और इक्का दुक्का ऐसी ही खबरे और भी मतदान स्थलों से आने लगीं.. 

दरअसल यह मामला किसी फ़ार्म /प्रपत्र का नहीं बल्कि एक नियम से है -निर्वाचन संचालन नियम १९६१ के नियम ४९ ओ के अनुसार कोई भी मतदाता मतदान स्थल में प्रवेश और  मतदाता पंजिका में हस्ताक्षर और अमिट स्याही या यहाँ तक कि ई वी एम मशीन में कमांड दिए जाने के बाद भी  मतदान करने से मना  कर सकता है ..इसके लिए उसके इस निर्णय के एवज में पीठासीन अधिकारी उसका हस्ताक्षर मतदाता  पंजिका (१७ अ ) में कराकर उसे इसकी अनुमति दे सकता है . यही ४९ ओ है . यह नियम है कोई फार्म वार्म नहीं! मगर अब अन्ना साहब की टीम का क्या किया जाय जो अपने प्रशंसकों को अच्छा होमवर्क नहीं दे रही है ....यह उन्हें ठीक से बताना चाहिए था कि ४९ ओ की व्यवस्था क्या है? 

मगर लगता है अन्ना साहब के टीम मेंबर भी अब पर उपदेश कुशल बहुतेरे की प्रचलित भारतीय आदत के शिकार हो चुके हैं ..खुद अरविन्द केजरीवाल जो इतना जोशीला भाषण देते हैं ,मतदाताओं को लम्बे अरसे से जागरूक करने का अभियान चलाये हुए हैं यह जानने की जहमत नहीं उठाये कि उनका ही नाम मतदाता सूची में नहीं है ....और इस खातिर अभी उनकी जोरदार किरकिरी हुयी है ....कल गोआ और उत्तर प्रदेश में मतदान है .उत्तर प्रदेश में तो आख़िरी सातवाँ  चरण ..अगर आप या परिजन मतदान करने जा रहे हैं तो यह पोस्ट पढ़कर आप अपना मत किसी भी के पक्ष में न डालने के निर्णय पर ४९ ओ की उपर्युक्त प्रक्रिया अपना सकते हैं   ..हो सकता आगे यह सुविधा ई वी ऍम में एक अलग बटन देकर कर दी जाय -राईट टू रिजेक्ट की बटन! मगर अभी तो ४९ओ से ही  संतोष  करना होगा ....भले ही इसकी बड़ी विडंबना यह है कि इसमें मतदान की गोपनीयता भंग हो जाती है ..आप ने किसी को वोट नहीं डाला यह बात उजागर हो रहती है ..जबकि निर्वाचन की व्यवस्था कानूनन गोपनीय है! इसलिए मेरी तो सलाह है कि किसी अपेक्षाकृत बेहतर पार्टी /प्रत्याशी के पक्ष में अपना गोपनीय मत ही डालें! अपने वोट को बर्बाद न करें! 

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