Friday, 12 March 2010

वापस कीजिये प्लीज मेरी टिप्पणियाँ !

अब वे टिप्पणियाँ कैसे लौटेंगी जो उन डीलीटेड पोस्ट्स के साथ दफ़न हो गईं ? मैंने और आप सब ने भी  अगर ये दुनिया है तो कैसी दुनिया है-काव्य मंजूषा और स्प्लिट सेक्स चिकेन -स्वप्न दर्शी पर कल   टिप्पणियाँ की थीं मगर आज ये दोनों पोस्ट ब्लॉग मालिकों /मालिकाओं  द्वारा हटा  दी गयी हैं -मुझे उन पर की गयीं अपनी टिप्पणियों के दफ़न हो जाने का बहुत दुःख है -कृपया इसे कोई व्यक्तिगत मुद्दा न मानकर इन बिन्दुओं पर विचार करना चाहें-

हो सकता है कि किसी ब्लॉग ओनर ने अन्यान्य कारणों से अपनी पोस्ट डिलीट कर दी हो -यद्यपि यह गतिविधि  कई प्रश्न उठाती है -हो सकता है प्रश्नगत पोस्ट बहुत सुविचारित न रही हो ,आई हुई टिप्पणियों से उसकी कमियाँ उजागर हो गयी हो ,कोई तथ्यात्मक भूल हो गयी हो ,जवाबदेही की स्थिति बन गयी हो और फिर अगर पोस्ट हटानी ही है तो फिर लिखी ही क्यूं जाय ? मगर यह जवाब देही और शिष्टाचार का तकाजा तो बनता ही है ब्लाग ओनर का कि वह टिप्पणीकारों को सूचित करे कि  कतिपय अपरिहार्य कारणों (हम यह यह पूंछ पछोर नहीं करेगें भाई -आखिर शिष्टाचार भी कोई चीज है ) से मेरी अमुक पोस्ट हटाई जा रही है और आप चाहें तो हम आपकी टिप्पणियाँ वापस कर दें!ऐसा तो हुआ नहीं बस पोस्टें डिलीट कर दी गयीं और उन्ही के साथ टिप्पणियाँ भी दफ़न हो गयीं! शिष्ट दुनिया में हम रहते हैं तो इतनी जिम्मेदारी हमारी बनती है कि पोस्ट डिलीट करने जैसे  अतिवादी कदम उठाने पर भी हम  टिप्पणियों को बिना टिप्पणीकारों से पूंछे दफ़न न करें!अपनी पोस्ट को चूल्हे भाड़ में डालें या  डिलीटेड पोस्ट पर मर्सिया करें मगर टिप्पणियाँ किसी और की अमानत  हैं और अमानत में खयानत यहाँ ब्लॉगजगत में अभी तक कोई कानूनी  अपराध(साईबर क्राईम ) भले न हो नैतिक अपराध तो है ही !

टिप्पणियाँ भी एक सृजनकर्म  है -अगर मुख्य सृजन नहीं तो कोई गौंड भी नहीं -ब्लॉगजगत में चर्चा,प्रतिचर्चा और परिचर्चा की बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ियाँ हैं टिप्पणियाँ -उनकी उपेक्षा कतई उचित नहीं हैं और नहीं उन्हें घूर घाट के किनारे लगाने की प्रवृत्ति होनी चाहिए .वे किसी भी तरह इतनी उपेक्षनीय नहीं हैं -टिप्पणीकार की  मानस पुत्र और पुत्रियाँ है टिप्पणियाँ! उनकी इतनी बेकद्री मुझे तो कतई रास नहीं आई!स्वप्नदर्शी ने नर नारी में लैंगिक  समानता दर्शाने की सक्रियता और उत्साह  में पक्षियों -मुर्गों में लैंगिक निर्ध्रारण के एक उपर्युक्त वैज्ञानिक शोध को संदर्भित किया और जब मैंने टिप्पणी में यह बताया कि स्तन पोषी प्राणियों में जिसमें मनुष्य भी है ,लैंगिक निर्ध्रारण चिड़ियों से भिन्न है तो वह टिप्पणी तो छोडिये पूरी पोस्ट ही डिलीट कर दी गयी! क्या एक वैज्ञानिक से यही अपेक्षा है कि वह सार्थक चर्चा करने के बजाय इस तरह के थर्ड ग्रेड पर उतर आये?पूरी पोस्ट ही डिलीट कर देना अपनी इमेज बचाए रखने का  'क्राईसिस कंट्रोल'  तो नहीं है ? हम विदेशों से अप संस्कृति तो सीख रहे हैं मगर वहां के कुछ सार्थक बातें क्यूं नहीं सीखते ? या हम अपने हिन्दी जगत  और गोबर पट्टी को हमेशा ऐसे ही डील करने के आदी हो गए हैं? वहां कोई भी वैज्ञानिक ब्लॉगर अपनी गलती मानने में ज़रा भी नहीं हिचकता ओर पूरी सहिष्णुता से टिप्पणी पर चर्चा करता .आभारी भी होता .मगर यहाँ तो हमें हमारी टिप्पणियाँ बिना हमारी अनुमति के डिलीट कर हमें अपने  गोबर पट्टी के होने की औकात बता दी गयी है!

इस पोस्ट के माध्यम से जहाँ मैं गला घोट कर अकाल ही दफ़न की गयी अपने टिप्पणियाँ सम्बन्धित ब्लॉग मालिकों से वापस मांगने -उन्हें पुनर्जीवित करने की मांग करता हूँ वहीं यह मुद्दा भी आप सुधी  जनों के पास विचार विमर्श के लिए छोड़ता हूँ -आगे से मैं महत्वपूर्ण -नाईस टाईप को छोड़कर, टिप्पणियों की  एक प्रति सुरक्षित रखने का भी ख़याल रखूंगा !

क्या मुझे मेरी टिप्पणियाँ वापस मिलेगीं? वापस कीजिये प्लीज मेरी टिप्पणियाँ !



63 comments:

राकेश कौशिक said...

निश्चित रूप से विचारणीय मुद्दा - पोस्ट डिलीट नहीं की जाने चाहिए. यदि टिप्पणीकर्ता का कोई प्रश्न है तो उसका जबाब भी दिया जाना चाहिए.

Amitraghat said...

निश्च्य ही टिप्पणियाँ हटाना खेदजनक है...बिना कोई कारण बताए..
amitraghat.blogspot.com

Mithilesh dubey said...

बिल्कुल सही कहा है मिश्रा जी आपने , आखिर टिप्पणी भी करने में समय लगता है साथ ही सोच भी खपती है , जवाब देही तो बनती है ।

लवली कुमारी said...

आपकी आपति सही है या तो पब्लिश ही नही की जानी चाहिए या मिटाना नही चहिये (अगर टिप्पणी में कोई आपति जनक वाक्य/शब्द न हो). मोडरेशन की दशा में आप ब्लॉग पोस्ट के कंटेंट पर अपने विचार रखते हुए उसे लिंक कर अपने ब्लॉग पर अपनी आपतियां रखें वह अधिक उचित होगा.

Arvind Mishra said...

शुक्रिया लवली जी ,आपका सुझाव उचित है ध्यान दूंगा -अभी तो फिक्र है कि इंगित पोस्ट गायब है और मैं उनके कंटेंट और मैं अपने टिप्पणी के कंटेंट और भाषा को ठीक एहीक याद नहीं कर पा रहा हूँ !
आपको जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं!

लवली कुमारी said...

एक बात और कहूँगी इतने प्रतिक्रियात्म ढंग से बात रखनी जरुरी थी? इसे आराम से भी कहा जा सकता था ..कभी - कभी यह भी देखती हूँ आप चर्चाओं में सीधे अपशब्दों पर उतर आते हैं(मैं हर बार की बात नही कर रही पर कई बार ऐसा देखा है ) ..इस पर भी आपति दर्ज की जाए.ऐसे में कम से कम कोई सहिष्णु मनुष्य आपसे चर्चा करने से पहले सौ बार सोंचेगा. और चर्चा न करने का एक कारण यह भी हो सकता है (इसे सिर्फ कयास समझें ).

लवली कुमारी said...

जन्म दिन की शुभकामनाओं के लिए बहुत धन्यवाद.

Arvind Mishra said...

@@चलिए बीती बातों को जाने दीजिये या क्षमा कर दीजिये मगर इस पोस्ट में कौन कौन शब्द आपको अपशब्द लग रहे हैं बता दें तो मैं उन्हें संपादित कर दूं -आखिर ब्लागिंग की भी कोई शैली होनी चाहिए या नहीं ? (बस एक विनम्र विचार )

Mired Mirage said...

आप एक काम कर सकते हैं। एक नया ब्लॉग मेरी टिप्पणियाँ या ऐसे ही नाम का बना लीजिए। इसमें अपनी सभी टिप्पणियाँ दैनिक पोस्ट के रूप में हर दिन डाल सकते हैं। वैसे यह काम समीरलाल जी के लिए सबसे उचित रहेगा। शायद मैं भी कर ही लूँ। इनमें नाइस के अलावा अन्य टिप्पणियाँ तो अवश्य सहेजी जा सकती हैं।
घुघूती बासूती

लवली कुमारी said...

@इस पोस्ट के बारे में मैंने कुछ नही लिखा है ..सिर्फ एक शब्द "प्रतिक्रियात्मकता" ..आप स्त्री पुरुष के बीच विभेद करते हैं ..आपसे अपेक्षा है की स्त्रिओं के प्रति प्रतिक्रियात्मकता को सम्हाले रखे :-)

Arvind Mishra said...

@जी ,कोशिश करता हूँ जो मैं मूलतः हूँ वही लगूं !

Dr. Smt. ajit gupta said...

कई ब्‍लाग पर यह लिखा होता है कि आफ्‍टर अप्रूवल आपकी टिप्‍पणी पोस्‍ट की जाएगी। तब मुझे लगता है कि ऐसी स्थिति में वो टिप्‍पणी उस टिप्‍पणीकार के पास वापस भेज देनी चाहिए ना कि उसे डिलिट कर देना चाहिए।

Shiv Kumar Mishra said...

"मगर यह जवाब देही और शिष्टाचार का तकाजा तो बनता ही है ब्लाग ओनर का कि वह टिप्पणीकारों को सूचित करे कि कतिपय अपरिहार्य कारणों (हम यह यह पूंछ पछोर नहीं करेगें भाई -आखिर शिष्टाचार भी कोई चीज है )..."

बहुत मजेदार! एक गाना याद आ गया.तौबा तेरा जलवा तौबा तेरा प्यार...तेरा इमोशनल शिष्टाचार..:-)

Arvind Mishra said...

शुक्रिया शिव जी ,अब हम कसम खाएं हैं किसी को कुछ न कहेगें एक को छोड़कर और हाँ आपके पोस्ट भी पढूंगा -कसम खाता हूँ उकरू मूकरू बैठ कान पकड़ कर ..मगर हाँ लम्बा मत लिखा करिए न प्लीज !

बी एस पाबला said...

मुद्दा तो सही उठाया है आपने

मैं भी कई दिनों से एक असमंजस में हूँ
कई टिप्पणीकार आपत्तिजनक/ भड़काऊ/ बेमकसद की गई टिप्पणियाँ से पोस्ट या विषय का रूख मोड़ कर चुपके से कुछ समय बाद टिप्पणियाँ हटा लेते हैं।

फिर किसी अंतराल बाद आने वाला पाठक समझ ही नहीं पाता कि आखिर इन (बाद वाले) टिप्पणीकारों को हो क्या गया है, इतना हंगामा क्यों बरपा है?

हालांकि हटाई गई टिप्पणी को उसी समयकाल में पुन: रोपे जाने का तकनीकी इलाज़ है, किन्तु सोचता हूँ कहीं यह गलत तो नहीं!

आपके द्वारा उठाए गए विषय से मिलती जुलती बात थी, इसलिए यहाँ रख दी।

Arvind Mishra said...

@सभी की जानकारी के लिए -
एक सज्जन हैं जो मेरी और कुछ लोगों की पोस्ट पर सहमत और असहमत की टिप्पणी तो दूर बस नापसंद का आप्शन प्रिफर करते हैं -इस पोस्ट पर भी नापसंद का आप्शन लगा चुके हैं -अब मैं नहीं समझ पा रहा हूँ की इस पोस्ट में ऐसा क्या लिख दिया मैंने ? मगर अब मैं ऐसे प्रोवोकेशन पर भी चुप ही रहूँगा -होठ सिल लिएहैं मैंने !

बी एस पाबला said...

हा हा हा

अरविन्द जी, मेरे प्रिंट मीडिया वाले ब्लॉग पर किसी एक भलेमानस ने हर पोस्ट पर नापसंदगी दर्ज़ कराने की ठान रखी थी। सैकड़ा भर से अधिक नापंसंद लगाने के बाद अब बेचारे थक से गए हैं!

हमने तो उन्हें कुछ कहा भी नहीं था फिर भी पता नहीं क्यों नाराज़ हो कर दूर जा बैठे हैं :-)

शायद उन्हे किसी प्रोवोकेशन का इंतज़ार हो :-D

Arvind Mishra said...

@शशश ! पाबला जी मैं कुछ नहीं बोलूँगा ! मैं जो बोलूँगा तो बोलेगें की बोलता है !
मुझे भी कोई वाच कर रहा है! नाट अ बिग ब्रदर बट अ बिग मदर ! (ट्रस्ट ये कोई अपशब्द नहीं है बस मातृ शक्ति को एक सलाम ! )

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

Very Nice! It is always good to be Very Nice!

राज भाटिय़ा said...

चक्कर खा गये, हम तो रे भईया देख ब्लांगरो की गुस्ताखियां,मेरे हिसाब से तो टिपण्णियां नही हटानी चाहिये, लेकिन अब क्या करे जी

अल्पना वर्मा said...

'पूरी पोस्ट ही डिलीट कर देना अपनी इमेज बचाए रखने का 'क्राईसिस कंट्रोल' तो नहीं है ?'
आप के इस सवाल में ही जवाब है.
----------------------------
आप की 'उस टिप्पणी 'की तारीफें सुनी तो उस को पढने के लिए मैंने भी वहाँ क्लिक किया था.
अब टिप्पणी रूपी आप की उस मानस संतान के ऐसे हश्र की ख़बर से दुःख हुआ.

ab inconvenienti said...

यही कारण है की अब हम अपनी टिप्पणियां गूगल डोक्स में भी जमा करा देते हैं.

Springmelodies said...

This is called 'Emotional Atyachaar...'
tch!tch!tch!....Feel very sorry for you and others.
:)
Moral of the day-:'Be careful before falling for someone!'

Arvind Mishra said...

Lovely Pick and comment Kritika but please change your name bcoz it reminds me of a she -demon who was defeated by Sage Durvasa after a great fight !

स्वप्नदर्शी said...

First of all I did not receive your comment.

Secondly, I consider all my post as a work in progress.

Third I did not delete my post. I was elaborating it and do not have time to finish it due to lack of time.

And above all its my blog, I am responsible for keeping or removing any post, including comments.
This discovery is very important and as a scientist you can write about it,
from your point of view.

Arvind Mishra said...

Its okay ,Thanks a lot! Eagerly awaiting your post in question to put my same views agaian in order to initiate a healthy discussion !

Springmelodies said...

Thanks for your advice.
But how can I change my name.
It is my name!Can you change your name?
No idea about which 'she-demon' you are talking about?
Do not know all thoses stories.
By the way ,I know Kritika is a nakshtr, thats it.
and I love my name,will not change.

Tell you what,We show it or not,we know it or not;
We all have 'Personal demon ' in us. Every child of God has a personal demon assigned to him and this demon tracks him/her constantly.
So do not get 'scared' by me or by my name.

Mithilesh dubey said...

अरे अरविंद भईया नापसंद का तो पुछिए ही मत , मेरे कल वाले पोस्ट पर भी नापसंद का चटका लग चुका है , आलम यह है कि मेरे कविता वाले पोस्ट पर नापसंद के चटके लगा दिए जाते हैं ।

Arvind Mishra said...

Really Sorry Kritika ,inadvertently I made a mistake the she- demon is kritya and not the not the Kritika which is a nakshatra as you have rightly mentioned -the oversight is regretted.And I apologize too.
About Kritya-
http://hi.brajdiscovery.org/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%B7

Springmelodies said...

Never Mind,it happens.
I understand,You are tensed these days.

Take a break!

TC

ताऊ रामपुरिया said...

हमको कुच्छौ समझ नाही आरहा है कि वो पोस्ट कहां हैं और टिप्पणि कहां हैं? रामदुहाई हम तो उन सब का दर्शन भी नाही किया. कहीं आप सोच तहे हों कि ताऊ डकैती डाल गया.

हां हम तो चिंतित हूं गोबर पट्टी समझ कर कि अब हमरी चंपाकली का गोबर भी कहीं डकैत ना ले उडॆं? काहे से कि गोबर खाद काफ़ी महंगा है. हे भगवान बचाना इन चोर लोगन से.

रामराम.

ताऊ रामपुरिया said...

हमको कुच्छौ समझ नाही आरहा है कि वो पोस्ट कहां हैं और टिप्पणि कहां हैं? रामदुहाई हम तो उन सब का दर्शन भी नाही किया. कहीं आप सोच तहे हों कि ताऊ डकैती डाल गया.

हां हम तो चिंतित हूं गोबर पट्टी समझ कर कि अब हमरी चंपाकली का गोबर भी कहीं डकैत ना ले उडॆं? काहे से कि गोबर खाद काफ़ी महंगा है. हे भगवान बचाना इन चोर लोगन से.

रामराम.

Arvind Mishra said...

@Amazing Kritika how do you know that I am tensed these days? Seems you possess some ESP (Extra sensory perception )or some sort of telepathic sensors!Or is it just a gut feeling ? Or some intuition? Or simply a platitude!

PD said...

मेरा मत इस मामले में पोस्ट लिखने वाले लेखक के साथ है.. अगर टिप्पणीकार को लगता है कि उसका लिखा इतना ही महत्वपूर्ण है तो वह भी इसे सेव करके रख सकता है.. अगर टिपण्णी लिखने वाले ही उसे लेकर इतना परवाह नहीं कर रहे हैं तो पोस्ट लेखक भला क्यों करे?

शहरोज़ said...

आप ने अलग ढंग का भले लगता हो लेकिन अच्छा मुद्दा उठाया है.मिथिलेश का कहना सही है कि लिखने मेंसमय तो लगता ही है.और उनकी इस बात से भी सहमत कि कई लोग नापसंद का भी चटका खूब लगा रहे हैं इन दिनों.मैं भी इसका अक्सर शिकार हो रहा हूँ.

shikha varshney said...

विचारणीय मुद्दा

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

टिप्पणियों की प्रति रखने का आइडिया जोरदार है। इसपर विचार किया जा सकता है।

mukti said...

सोचने लायक मुद्दा है. वैसे तो ब्लॉग लेखक अपनी पोस्ट को मिटाने के लिये स्वतन्त्र है, पर टिप्पणियाँ भी महत्त्वपूर्ण होती हैं. अब पूरा मामला तो मेरी समझ में भी नहीं आ रहा है क्योंकि न ही अब पोस्ट जीवित है और न टिप्पणियाँ.

गिरिजेश राव said...

परीक्षण टिप्पणी।
ट्रेन में मोबाइल-लैपी संयुत से।
कृत्या, कृतिका और दुर्वासा - आप का ब्लॉग रत्नाकर है। कैसे कैसे रत्न उपरा जाते हैं ! धन्य प्रभु, खोदते ..उइ.. खोजते रहिए।

प्रवीण पाण्डेय said...

टिप्पणियाँ साहित्यिक सृजन है । उन्हें सहेज कर रखना चाहिये । कोई विधि हो जिससे आपके द्वारा की गयी टिप्पणियाँ एक जगह एकत्रित रह सकें ।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

चलो जी जो गया सो गया..राख डालो.

अजय कुमार झा said...

मुझे अपने द्वारा दी गई टिप्पणियां अपनी पोस्ट जितनी ही प्रिय हैं ...और उनके मिटने का दुख भी जायज है ...मगर यहां मैं इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखता कि टिप्पणियां सिर्फ़ हमारी होती हैं ....मेरे ख्याल से तो यदि एक बार हमने उसे प्रकाशित कर दिया तो फ़िर गया वो मालिकाना हक ....मगर ताज्जुब है कि ये हक दोनों ही तरफ़ से ये हक सिर्फ़ और सिर्फ़ मिटाने के लिए उपयोग किया जा सकता है .....कमाल है ...न
अजय कुमार झा

PD said...

मुझे लग रहा है कि लोग यहाँ कमेन्ट कैसे बचा कर रखा जाये इस पर बातें कर रहे हैं.. जबकि मेरे ख्याल से बात इस पर होना चाहिए कि किसी पोस्ट पर कमेन्ट है तो उस पोस्ट को डिलीट करने का अधिकार किसके पास है?

अगर मैं गलत हूँ तो मुझे सही करें..

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

जब टिप्पणियाँ मानस पुत्र या मानस पुत्री सामान हों तो उनके ना रहने पर आपका कष्ट वाजिब ही है |


अपने दुःख में हमें भी शरीक समझें !

RaniVishal said...

हमको कुच्छौ समझ नाही आरहा है कि वो पोस्ट कहां हैं और टिप्पणि कहां हैं? रामदुहाई हम तो उन सब का दर्शन भी नाही किया.
Taauji Jaisa haaal apana bhi hai :(

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

देर से टीप रहा हूँ , पर टीप ही तो रहा हूँ !
अरे भाई इसपर क्या कहें , ये तो ब्लॉग स्वामी की मर्जी !
पर अगर कोई इसकदर दिल से लिखा हो , तो दुःख होगा ही !
मैं तो इस दुःख से अब उबर चुका हूँ , यही मान लें कि आपकी
बात कम से कम उस ब्लॉग लेखक तक तो चली ही गयी , आगे चाहे ब्लॉग स्वामी
मिटाए , चाहे उखरि परे !
.........................................................................................................................
@ आपकी पिछली पोस्ट और वहां की टीपों पर ,,,
कविता की गजब कटपीस गिरी ! लोग परोपकारातुर दिखे !
'' उतरी हुई नदी का कोई करे निरादर सम्मान करने वाले सम्मान कर रहे हैं '' !
@ आचारज जी लोग दिख नहीं रहे :)
भो गिरि-वर-गहन !
आपकी छिन्नतार वीणा की छेडन अदा बड़ी मासूम-मरहूम-कातिलाना है ! :)
@ ,,,,,,,,, @गिरिजेश जी ,आचारज जी ने बैठकी बदल दी है इन दिनों और प्रगतिशील खेमें में चले गए हैं
मगर आयेगें यही जानता हूँ ! जैसे पुनि जहाज को पंछी उडि जहाज पर आवे !
,,,,,,,,,सर !
जहाँ जो पसंद आता है वहां चार मोटी चुनने जरूर चला जाता हूँ ,
अपुन का न किसी से स्थायी बैर है न प्रीत !
प्रगतिशील खेमें में भी कम बाह्याचार नहीं हैं , जे,एन.यू. में इस खेमे
की भी हकीकत देख चुका हूँ , इसलिए खेमों से अलग - थलग रहने को ज्यादा अहम मानता हूँ !
.
ज्ञान - जहाज पर यह पंछी उड़कर बार बार आएगा !
लेकिन क्या करूँ ?
ज्ञानेतर स्थिति आहत भी करती है न !
और अपने कबीर दास जी ने तो यहाँ तक चेताया है ;
'' भेड़ा देखा जर्जरा , उतरि परे फरंकि '' !
क्या करूँ जहां ज्ञान-जर्जरा दिखती है वहां से मन झिझकने लगता है !
.
कही आपका दिल दुखा हो तो क्षमा चाहूँगा , क्या पता आगे फिर दुखाना पड़े आपको !
भगवान न करे ऐसा हो मगर फिर भी !

मनोज कुमार said...

विचारोत्तेजक!

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 13.03.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

Anil Pusadkar said...

पोस्ट डिलीट करना तो कमेण्ट के साथ गायब होना है और इसे विचारों के भ्रूण ह्त्या

Udan Tashtari said...

शिष्ट दुनिया में हम रहते हैं - आप कहाँ रहते हैं, मेरा भी दिल है ऐसी दुनिया में रहने का.


अपनी की हुई टिप्पणियाँ सहेजूँ तो बस वही करता रह जाऊँ ( हाय!! ये जीवन इतना छोटा क्यूँ है / एक दिन में मात्र २४ घंटे क्यूँ होते हैं?)


एक बार मई या जून की बात रही होगी, इलाहाबाद में गंगा जी को देखकर मैं सोचने लगा कि जितना बचा है इससे ज्यादा लोटा पानी तो मैं चढ़ा चुका हूँगा-मगर किससे मांगता वापस? :) -बस, टिप्पणी कर, गंगा में डाल- और भूल जाओ.

ब्लॉगमालिक के अधिकार एवं कर्तव्य- ये वाली पुस्तक पढ़ियेगा...लेखक का नाम याद नहीं आ रहा..हा हा!!

गनीमत है सिर्फ पोस्ट डिलीट हुई है तो लिंक दे पा रहे हैं वरना तो पूरे ब्लॉग डिलीट हो जाते हैं, लिंक देने को भी तरस जाते. :)

Arvind Mishra said...

@पी डी
आपने महत्वपूर्ण बिंदु पर बल दिया है ,क्या ब्लॉग ओनर को अधिकार है की वह अपने पोस्ट के साथ ही टिप्पणियाँ भी डिलीट कर दे ?
मैं अब भी यही कहूंगा की नैतिकता का तकाजा यह नहीं है !

manu said...

श्री अरविन्द जी..

यदि टिपण्णी हटाने कि बात कि जाए तो आज तक सबसे ज्यादा टिपण्णी हमारी हटाई गयी हैं...
एक तरह का रिकार्ड होगा ये भी...
वो भी छोटे मोटे पर्सनल ब्लोग्स से नहीं..बड़ी बड़ी ई .मैगजींस से...

वो भी बाकायदा कोर्ट केस..
और देख लेने कि धमकियों के साथ....

सोच रहे हैं..
हमने आज तक ऐसी महान पोस्ट क्या सोच कर नहीं छापी.....!!!

बेचैन आत्मा said...

टिप्पणियाँ अमूल्य होती हैं. किसी कहानी, कविता, लेख या दर्शन को पढ़कर तत्क्षण उठाने वाले विचार हैं जिसे पढ़ने वाले ने उसी वक्त अभिव्यक्ति दी है..वह दूसरे दिन, दूसरे मूड में पढ़े, तो जरूरी नहीं कि वही लिख पायेगा जो उसने पहले लिखा था. इसलिए इसे मिटाना नहीं चाहिए . हाँ, लेखक को लगे कि उसने गलत लिखा है तो वह स्वयं मिटा सकता है.

प्रवीण शाह said...

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.
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Arvind Mishra said...
@पी डी
आपने महत्वपूर्ण बिंदु पर बल दिया है ,क्या ब्लॉग ओनर को अधिकार है की वह अपने पोस्ट के साथ ही टिप्पणियाँ भी डिलीट कर दे ?
मैं अब भी यही कहूंगा की नैतिकता का तकाजा यह नहीं है !
13 March 2010 06:36


आदरणीय अरविन्द जी,

बहुत ही सही बात कही है आपने, हो यह रहा है कि लोगबाग छोटी-छोटी बातों में तात्कालिक आवेश में प्रतिक्रिया करते हुऐ पोस्ट लिख रहे हैं, फिर शुरू हो रहा है मान-मनुहार व बीच-बचाव का दौर, और फिर "आल इज वैल", लो हटा दी गई पोस्ट!
अरे भाई, अगर आप चाहते हो कि ब्लॉगरों को भी गंभीरता से लिया जाये, तो अपने लिखे पर टिकना सीखो, अगर आपको लगता है कि आप तात्कालिक आवेश में गलत-सलत लिख जाते हो तो अपने इस Verbal diarrhea का ईलाज करो, थोड़ी देर सोचो, सब पक्षों की सुनो और फिर पोस्ट डालो... मगर क्या कहा जाये, कई नामचीन ब्लॉगर तो कई कई पोस्ट जिनमें ३० से भी ज्यादा कमेंट थे, डिलीट कर चुके हैं... देर सबेर इस बात को उठना ही था...मैं आपके इस साहस की दाद देता हूँ कि व्यक्तिगत संबंधों या लोकप्रियता की परवाह किये बगैर आप इस मुद्दे को उठा रहे हैं।

इस संबंध में मेरा प्रस्ताव है कि...

१- जिस भी ब्लॉग में टिप्पणी का विकल्प है, ब्लॉग मालिक उसमें पोस्ट लगाने व टिप्पणी पाने के बाद उसे न हटाये, यदि ऐसा करता है तो अगली पोस्ट में कारण जानने का हक तो हो ही पाठकों को।
२- दूसरा अहम मुद्दा है पोस्ट को एडिट करने का, अगर आप बारीकी से देखें तो कुछ लोग क्या कर रहे हैं कि पोस्ट लिखी एक मुद्दे पर...स्टैंड लिया...और फिर कुछ समय बाद उसे इतना एडिट कर दिया कि नया मतलब पहले का बिल्कुल उलटा हो गया...फंस गया न बेचारा पाठक टिप्पणीकार!...ऐसा नहीं होना चाहिये!
३- और उन लोगों का क्या किया जाये जो दूसरों की पोस्टों पर पहले तो टिप्पणी देते हैं...फिर कुछ समय बाद उसे वहाँ से हटा देते हैं... क्योंकि या तो मामला सुलझा लिया बात करके या उन्हें लगता है कि दी गई टिप्पणी से उनकी इमेज को नुकसान पहुंच सकता है।... ऐसा भी कतई न हो!


अरे भाई, यदि कभी आपको लगता है कि आपने गलत पोस्ट डाली या गलत टिप्पणी की तो इतना साहस दिखाओ कि उन्हें बिना हटाये अगली पोस्ट या टिप्पणी में स्वयं की भूल स्वीकार करो...इससे आपका मान ही बढ़ेगा ।

अच्छा लगेगा यदि उपरोक्त मुद्दों पर आप यहीं या किसी और मंच पर कुछ कहेंगे।

आभार!

शरद कोकास said...

इतनी सारी टिप्पणियाँ और वृहद चर्चा ..? इसका कोई हल निकले तो कृपया अवश्य बताइयेगा ।

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

मुद्दे या विषय पर की गया टिप्पणी रहनी चाहिए....हाँ..अगर टिप्पणी व्यक्तिगत आक्षेप के रूप ने हो तो हटाना ठीक है.
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से.
http://laddoospeaks.blogspot.com

उन्मुक्त said...

अरविन्द जी, इस बारे में कुछ मेरे विचार।
१ - टिप्पणी का स्वामी, टिप्पणी करने वाल होता है। यह उसी का कॉपीराइट है।

२ - किसी चिट्ठी में कौन सी टिप्पणी प्रकाशित हो यह वह चिट्ठी रहे या मिटा दी जाय यह अधिकार चिट्टा स्वामी का ही है। इस पर कोई अन्य आपत्ति नहीं कर सकता है। हां यह जरूर है कि वह उस विषय पर अपने चिट्टे पर लिख दे।

३ - अपनी सारी टिप्पणियों और उन्हें सहेज कर रखने के लिऐ कोई अन्य चिट्ठा बनाने की जरूरत नहीं है। को कमेंट एक बेहतरीन वेब साइट है। इस पर रजिस्टर कर लें। इसके बाद आप जो भी टिप्पणी करते हैं न केवल वह इस पर अपने आप रजिस्टर हो जाती है पर उस चिट्ठी पर आयी सारी टिप्णियां भी। यदि वह चिट्ठी डिलीट हो जाये, तो भी रहती है। इससे आपकी सारी टिप्पणियां बची रहेंगी और आपको अपनी टिप्पणी का जवाब पढ़ने उस चिट्ठी पर नहीं जाना पड़ेगा।

नोट - प्रथम बिन्दु के संदर्भ में मैं एक अन्य बात भी कहना चाहूंगा। जहां तक मैं समझता हूं। टिप्पणी का स्वामी तो टिप्पणीकर्ता है पर यदि किसी चिट्ठी पर कोई टिप्पणी प्रकाशित हो जाती है तो उस टिप्पणी का दायित्व चिट्ठा मालिक का भी है। यानि कि, यदि कोई किसी चिट्ठी पर टिप्पणी द्वारा किसी की निन्दा करता है और वह टिप्पणी किसी के चिट्ठे पर प्रकाशित हो जाती है। तो निन्दा का दायित्व न केवल उस टिप्पणी कर्ता का है पर उस चिट्टा स्वामी का भी है।

डा० अमर कुमार said...


मैं इस गहन स्थित पर अपनी निट्ठल्ली नज़र रखे हूँ, जैसे कुछ निकल सामने आयेगा, हाज़िर करूँगा । इस बीच अन्य विज्ञजन नमक मिर्च लेकर तैयार रहें ।


बॉई दॅ वे, मुझको इसे पोस्ट-लेखक का भूल सुधार मान लेने में कोई बुराई नहीं दिखती । वैसे जनता का आदेश होगा तो इस थुक्का-फ़ज़ीहत में मैं भी शामिल हो लूँगा ।

पर.. उन पोस्ट और ब्लॉगमालिकों का क्या, जो कईयों की टिप्पणी गड़प कर जाते हैं, डकार भी नहीं लेते । मेरा तो कई कई बार मौका देख कर कईयों ने टिप्पणीहरण किया है । रपट कहाँ करते.. एक पेटीकोट-पोषी नारीवादी की गुहार कौन सुनता ? सो, उफ़ न किया, चुप ही रहा, आँसू पीकर के..

जाते जाते गौर किया कि.. अर्ज़ी लगी है..
" बहुमूल्य विचारों से अवश्य अवगत कराएं-आपकी प्रतिक्रिया का सदैव स्वागत है ! "
ज़ाहिर है यदि हमारे विचार बहुमूल्य होंगे तो उनके लिये यहाँ मॉडरेशन का गलीचा तो बिछाना ही पड़ेगा । यूँ भी विचारों को मुक्त छोड़ा नहीं जा सकता, यह क्राँति तक ला सकती हैं.. इससे पहले कि बिज़ली गुल हो जाये, मैं अपनी टिप्पणी समेट रहा हूँ । सादर धन्यवाद । आपका ही दागदार अमर कुमार

डा० अमर कुमार said...


अब लेयो.. ऍप्रूवल होई तबहिन ईहाँ टिप्पणी जी प्रकट होइहैं । हम सेंते-मेंत में प्रेस सेंसरशिप पर किताब लिखि रहें हैं ।

PD said...

अरविन्द सर, कहने को तो कह सकता हूँ कि आज के जमाने में नैतिकता कि अपेक्षा ना करें मगर वह सही नहीं होगा..

मेरा मानना है कि अगर कोई कमेन्ट किसी पोस्ट पर लिखता है और किसी कारण से वह पोस्ट उस महाशय को हटाना पर जाये, तो यह उसकी जिम्मदारी नहीं है कि वह हर किसी को उसकी टिप्पणी वापस करता फिरे कि लो भाई अपनी टिप्पणी.. अगर वह नैतिकता कि खातिर करना भी चाहे तो भी उसके लिए यह लगभग असंभव सा कार्य है.. क्योंकि अधिकांश प्रोफाइल अपना ई-पता छुपा कर रखते हैं.. यहाँ आप ये भी कह सकते हैं कि जिनका ई पता खुला हुआ है उसे तो उसकी टिप्पणी वापस की जा सकती है? तो बात फिर उसी नैतिकता कि होती है, ना कि नियम कि..

मेरे ब्लॉग "मेरी छोटी सी दुनिया" पर ही लगभग पांच हजार कमेन्टस हैं.. मेरे सारे ब्लॉग को मिला कर अगर जोड़ा जाये तो गिनती दस हजार के लगभग पहुंचेगी.. अब ऐसे में कभी किसी निजी या व्यावसायिक कारणों से मुझे अपना प्रोफाइल डिलीट करना पड़े तो कौन कहाँ तक जिम्मेदारी निभाए? अगर मैं नैतिक रूप से चाहूँ तो भी सबकी टिप्पणी वापस नहीं कर सकता हूँ..

समीर जी कि बात को भी कोट किया जाए..

manu said...

यूं भी..

जब पोस्ट ही नहीं रही..तो कमेन्ट कि क्या बिसात....

हाँ,
बिसात हो भी सकती है....

क्या उन कमेंट्स में कोई शे'र भी था...???


हम तो अशआर तक कि फ़िक्र नहीं करते...
उड़ जाए तो उड़ जाए...

manu said...

एक पुराना शे'र याद हो आया....

न जाने क्या निकला उसने मेरी बात का मतलब..?
रहा खाली निगाहों से खला में ताकता कोई...

गौतम राजरिशी said...

लीजिये हम कुछ दिन अनियमित क्या हुए ब्लौग-जगत में एक और हलचल।

मुद्दा बड़ा दिलचस्प है। सचमुच टिप्पणियों पर किसका हक हो। ऐसे में उन्मुक्त जी की टिप्पणी सबसे सटीक लगी और आपका ये कहना कि "टिप्पणीकार की मानस पुत्र और पुत्रियाँ है टिप्पणियाँ"...

मुझे अपने इस दुलारे हिंदी ब्लौग-जगत की यही सब अदा सबसे ज्यादा भाती है।

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