शनिवार, 1 दिसंबर 2012

महफ़िल में इस ख़याल से फिर आ गया हूँ मैं :-)


मुझे  निकाल के कहीं पछता  रहे हों  न  आप 
महफ़िल में  इस ख़याल से फिर आ गया हूँ मैं :-)
यह शेर आज तब याद आया जब इस नए स्थान - राबर्ट्सगंज में नेट से कनेक्ट होने पर मुझे सहसा ब्लागिंग की सुधि आयी . इतना लम्बा अंतराल पिछले पांच वर्षों में किन्ही दो  पोस्ट के बीच नहीं हुआ था . जब गत 21 नवम्बर को सारे तामझाम, सर सामान और एक अदद धर्मपत्नी तथा  एक विदेशी नस्ल की कुतिया -पाम-स्पिट्ज(डेजी के साथ यहाँ बनारस से सरे शाम पहुंचा तो अंतर्जाल से लगभग  कट चुका था ..हाँ मोबाईल से/ का एक गर्भनाल सम्बन्ध अवश्य बना था मगर वह नाकाफी था .....लगा किसी सूनसान जनहीन द्वीप पर आ पहुंचा हूँ . कटे होने और गैर जुड़ाव की यह अनुभूति नयी किस्म की थी ....और यह सिलसिला लम्बा चला .नए स्थान पर अनुकूलन और व्यवस्थित होने की प्राथमिकतायें कुछ ऐसी रहीं कि विलासितापूर्ण ब्लागिंग के लिए कई मौका नहीं मिला . आते ही तेल नून लकड़ी के नवीन संस्करणों -गैस कनेक्शन ,आर ओ ,इनवर्टर ,दूधवाले ,अखबारवाले ,महरी की जुगाड़/व्यवस्था फिर डिश  टीवी कनेक्शन , बैंक खाता आदि  में ऐसा जी हलकान रहा कि हम अपना ही नहीं कई अन्य  पसंदीदा ब्लॉग फिलहाल भूल गए और साथ ही कई ब्लागरों को भी  ....मजे की बात वे ब्लॉगर भी मुझे भूल गए -हाँ कुछ फेसबुकिये  मित्र जरुर सम्बन्धों के आशा दीप टिमटिमाये रहे ......और मुझे नेट कनेक्ट करने के  तरीके बताते रहे .....फिलहाल  रिलायंस नेट कनेक्ट डाटाकार्ड एक जगहं से उधारी पर ले यह पोस्ट लिख रहा हूँ . हाँ खुद का अप्लाई कर दिया है ,एक हप्ते का वक्त लगना बताया गया है . 
नए स्थान पर जमने में अभी समय लगेगा ,नए लोग नए मिजाज। मगर लग अच्छा रहा है -पिछड़ा इलाका है तो लोगों की सरलता सहजता संदूषित नहीं हुयी है और खाने पीने के सामान भी अपेक्षया बहुत कम संदूषित  है ....पत्नी यहाँ के दूध और सब्जियों की मुग्ध भाव से प्रशंसा कर रही हैं .उनके विशेषाग्रह पर बचपन से ही दूध से नाक भौ सिकोड़ने वाला मैं भी यहाँ थोडा दूध पीने लगा हूँ -पियो  ग्लास भर दूध की तर्ज पर ......सब्जियों में निश्चय ही ताजगी भरा अलग सा स्वाद है . अब इतना सब इंतजाम होने के बाद बस ब्लागिंग की कमी रह गयी  थी सो वह भी आज से राह पर आ गयी -जिन्दगी की गाडी तेजी से पटरी पर लौटने लगी है . 
इस बीच केवल संतोष त्रिवेदी जी ने फोनियाया और हाल चाल पूछा .....कमाल के ब्लॉगर हैं वर्ना आज की इस भागमभाग की दुनिया में किसे किसकी फ़िक्र रहती है . गहन रिश्तों के वायदे करने वाले भी न जाने कहाँ मुकर  गए ....आप यहाँ तभी तक हैं जब तक हैं और दिख रहे हैं -अन्यथा कोई आपकी सुधि लेने वाला नहीं है .....नए ब्लागरों को यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए ....और अपेक्षाएं नहीं पालनी चाहिए ...अंतर्जाल आंनद के लिए कोई बैकुंठ नहीं है,असली दुनिया से भी इस मामले में गया गुजरा है . कितने मित्रों से इसलिए पहले से भी दुआ सलाम बंद है -और इन पांच साला ब्लागिरी में दुआ सलाम बंद वाली लिस्ट भी बढ़ती गयी है -कभी किसी ने कहा था क़ि आपकी आँखें बहुत गहराई  वाली सुन्दरता लिए हैं,किसी ने मेरी एक प्रोफाईल फोटो जो अब लगभग दस वर्ष पुरानी है मगर कहीं कहीं अब भी दिख जाती है -अरे वही सूट टाई वाली को देखकर मर मिटने का अभिनय किया था  :-) ....तब से सूट पहनना बंद ही कर दिया :-( ....किसी किसी ने  इमरजेंसी का तकाजा देकर कुछ इमदाद भी झटक लिया था ...वे सभी अब तटस्थ हो लिए हैं .....मगर यह सब मैं बनारस की गंगा मैया को समर्पित कर आया हूँ .....
सोनांचल में एक नयी ताजगी के साथ एक नयी ब्लागिंग पारी शुरू करते हुए मुझे एक नौसिखियापन सा लग रहा है :-) मैं वापस लौट आया हूँ ......हो सकता है मेरा यहाँ अनुपस्थित रहना किसी को सचमुच खला ही हो ... :-) यह बात अब तक मुंह से निकल पायी हो तो अब भी कोई देर नहीं हुयी है ...मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा ...सुस्वागतम! 

53 टिप्‍पणियां:

  1. भेजी बेनामी गईं, गुरुवर चिट्ठी ढेर ।

    पता नया नहिं था पता, होती गई कुबेर ।

    होती गई कुबेर, किन्तु हर समय प्रतीक्षा ।

    नहीं देर अंधेर, दीजिये पावन दीक्षा ।

    गुरुवाइन का साथ, विदेशी लवली डेजी ।

    मिलते ही सन्देश, नमस्ते रविकर भेजी ।।

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    1. आप बेजोड़ है कविवर रविकर!

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    2. गुरू! वाइन का साथ? विदेशी लवली..!!
      ..वाकई बेजोड़ हैं, कविवर रविकर।

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  2. ब्लॉगिंग की दुनिया असल दुनिया से भिन्न तो है ही। एक मिथ्या संसार है। यहाँ बिछड़े सभी बारी बारी वाला हाल है।
    बहरहाल अभी आप नई जगह पर जम जाइये। शुभकामनायें आपको।

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    1. बिछड़े सब बारी बारी से -बिल्कुल ! आभार!

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  3. आपका आना मुबारक हो !
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    .आप ब्लॉगिंग-जगत के इकलौते रसिया हैं, जिसके बिना यहाँ सुखाड़-सा लगता है.आप वरिष्ठ होकर भी अपनी अलख लगातार जगाए हुए हैं जबकि हम जैसे कई नायके धूमकेतु की तरह विलीन हो गए या होने के कगार पर खड़े हैं.इस आवाजाही में कई स्वनामधन्य मठाधीश अपने मठ सहित जमींदोज हो गए.आप बनारस से भले ही उजड़ गए हों पर आपका मठ अभी-भी अपनी जगह पर है.
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    .
    यहाँ आपके चाहनेवालों से ज़्यादा संख्या आपसे चिढने वालों की है पर इस ब्लॉगिंग को यही सब राग-द्वेष और अपनापा चाहिए.कम-से-कम किसी न किसी बहाने कोई याद तो रहता है.
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    .ब्लॉगिंग निरा पढ़ने वाला साहित्य-क्षेत्र नहीं है.यहाँ आपसी वाद-विवाद,विमर्श,हर्ष,शोक सबकी डायरी रहती है और यही हम सबको एक-दूसरे से इस कदर जोड़ता है कि आपसे नाराज़ होकर भी हम आपको चाहने लगते हैं.
    .
    .आपकी लंबी-लिस्ट में हमारा भी कहीं नाम लिखा होगा,कभी उसको काटिए और कभी बांचिये....दोनों चलेगा !

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    1. मठ तो बनारस में छूट गया ..अब मैं एकदम टटका सा मासूम ब्लॉगर हूँ ...... :-)
      जो बीत गयी सो बात गयी !

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    2. अंतर्जाल देश की सीमा को नहीं मानता तो दो शहरों की सीमाएँ मठाधीशी के लिए क्या बाधक हैं? हाँ, बनारस छूटने का दर्द बनारसी ही समझ सकता है।

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  4. .फिलहाल रिलायंस नेट कनेक्ट डाटाकार्ड एक जगहं से उधारी पर ले यह पोस्ट लिख रहा हूँ . हाँ खुद का अप्लाई कर दिया है ,एक हप्ते का वक्त लगना बताया गया है .

    जिसने भी आपको बताया है, या तो अज्ञानी है या आपको बेवकूफ बना रहा है. ये डाटा कार्ड ओवर द काउंटर उपलब्ध हैं - मोबाइल की दुकानों में उपलब्ध सिमकार्ड की तरह, और आधे घंटे में एक्टिवेट हो जाते हैं और कार्य के लिए तत्पर हो जाते हैं.

    और, आपके मोबाइल का जीपीआरएस या 2जी/3जी भी पूरी तरह सक्षम है ब्लॉगिंग सुविधा प्रदान करने को!

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    1. आपने सही सुझाया। सोनभद्र में इतना पिछड़ापन तो नहीं होना चाहिए।

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    2. रतलामी जी अब आवेदक फ़ार्म भरता है,पहचान आदि का प्रमाण पत्र देता है,और लखनऊ दाता अपडेट करने और एक्टिवेशन के लिए जाता है ! ऐसा मैंने किया है !

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  5. अंतरजाल के संबंध भौगोलिक स्थानान्तरण से बहुत प्रभावित नहीं होने वाले।

    केवल कुछ दिनों में जब कनेक्शन की उपलब्धता बहाल हो जाएगी आप फिर एकबार वही गति पकड़ लेंगे। बल्कि मुझे लगता है कि बनारस की अन्य व्यस्तताओं से निजात मिलने के बाद आप सोनभद्र में कुछ अधिक ही समय नेट पर गुजार सकेंगे।

    हम नेटीजेन्स के लिए तो यह लाभकारी परिवर्तन हुआ है।

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  6. स्वागत करना तो औपचारिकता ही होगी, हम तो जानते थे कि ब्रेक है और ब्रेक के बाद मिलना ही है।
    रवि जी का कहना काफ़ी हद तक सही है। दिल्ली आने के बाद मैंने रिलायंस डाटाकार्ड लिया(3G वाला) और उसे डीलर ने बात करते करते ही एक्टिवेट कर दिया था। हड़काईये जरा अपने वाले रिलायंसिये को:)
    सिद्धार्थ जी की बल्कि वाली आशावादी संभावना को हमारा भी समर्थन है, अपना अनुभव भी यही है।

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  7. इस अंजुमन में आपको आना है बार - बार...

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  8. .
    .
    .
    कभी किसी ने कहा था क़ि आपकी आँखें बहुत गहराई वाली सुन्दरता लिए हैं,किसी ने मेरी एक प्रोफाईल फोटो जो अब लगभग दस वर्ष पुरानी है मगर कहीं कहीं अब भी दिख जाती है -अरे वही सूट टाई वाली को देखकर मर मिटने का अभिनय किया था :-) ....तब से सूट पहनना बंद ही कर दिया :-(

    ... :) x 1008


    ...


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    1. ... :) x 1008
      ई कोई टोटका है क्या प्रवीण जी! ?

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  9. तबादला वाक़ई बहुत कष्‍टदायक प्रक्रि‍या है पर कुछ कि‍या नहीं जा सकता. सरकारों को लगता है कि‍ लोगों को ईमानदार बनाए रखने के लि‍ए उन्‍हें हलकान कि‍ए रखना ही बस एक तरीक़ा है

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    1. स्थानान्तरण शासकीय सेवा का नियतिवाद है ! नई जगह जम जाइये बस...इंटरनेट अपने आप रफ़्तार पकड़ लेगा !

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  10. Bahut dinon baad aapke blogpe aayee hun...bada achha laga.

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    1. आप आयीं मुझे भी बहुत अच्छा लगा

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  11. बहुत दिनो से.. इतना सन्नाटा क्यों है यहाँ...! वाली बात हो रही है। अब आपसे उम्मीद जगी है।

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  12. आप अनुपस्थित कहाँ थे ...फेसबुक पर अपडेट नियमित थी ही।.
    पहले ही कहा है ब्लोगिंग आपसे नहीं छूटेगी :)

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  13. फ़िर से ब्लॉगिंग शुरु करने की बधाई! नौसिखियापन बना रहे।

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  14. भैया जी आप उलाहना मत दीजिये आप वहां बैठे मज़ा कर रहे हैं और दुनियादारी में फंसे लोग भुगत रहे है और आपको मजाक सूझ रहा है ये तो चोरो और सीनाजोरी हो गई

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  15. जब प्यार तृप्त होता है तो बीच का समय पता ही नहीं चलता है, यदि प्यार अतृप्त होता है बीच का समय बहुत अधिक लगता है। हमें तो समय पता ही नहीं चला।

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  16. कल 03/12/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  17. मजेदार, जानदार, शानदार वापसी.. कल ही लगभग इसी विषय पर ब्लॉग-बुल्तीं लिखा था और आपकी यह पोस्ट भी शामिल की थी!! अब जब रम गए हैं 'रापटगंज' में, तो पाँच सालों की अवधि के इस महत्तम अंतराल की कमी पूरी कर ही देंगे!!
    शुभकामनाएँ! खुश आमदीद! सुस्वागतम!!

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    1. जी रापटगंज ही जन उच्चरण है :-)

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  18. सबसे बढ़िया बात है कि फल , सब्जी और दूध संक्रमित नहीं हैं ..... कम से कम खाने का स्वाद तो आएगा .... और ब्लोगिंग भी भला छूटती है ..... सारी व्यवस्था करके यहीं तो आना था :):) । रोचक पोस्ट

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  19. दुनिया कोई भी हो समाज की ,परिवार की अथवा ब्लागिंग की ,ये कटु सत्य है कि दिखना जरूरी है याद रखने के लिए ... परन्तु ये भी सत्य है ब्लागिंग की दुनिया के इस थोड़े से ही समय ने कुछ ऐसे मित्र भी दे दिए हैं जो न दिखने पर जाल डाल कर खोज भी निकालते हैं ....:)

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  20. आप ने अपनी पिछली पोस्टों में ही ज़िक्र कर दिया था कि आप के पास नेट नहीं है..लेखन की नियमितता में व्यवधान होगा आदि -आदि!इसलिए बहुत से ब्लॉगर साथियों ने आप को डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा होगा.
    वैसे भी यह तो मिथ्या संसार है उसपर ब्लॉगजगत तो डबल मिथ्या संसार !
    यहाँ फिल्मजगत वाला हिसाब है जब तक 'लाईम लाईट' में दिखते रहते हैं तब तक ही आप हैं !
    नयी जगह इतनी अच्छी मिली है कि आप प्रकृति और जन-मानस के स्वाभाविक भोलेपन को करीब से महसूस कर सकेंगे ,आप को उसके लिए बधाई.आप के पास अब तक ब्लॉग लेखन के लिए ढेरों नयी सामग्री भी एकत्र हो गई होगी.नयी शुरुआत हेतु शुभकामनाएँ.[अपेक्षाओं पर पर बहुत पहले एक ब्लॉग-लेख लिखा था मैंने-'होती ही क्यूँ हैं अपेक्षाएं ' ]

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    1. लिंक दीजिये -न पढ़ा हो या पढ़ा भी हो तो एक बार और पढ़ते हैं !

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    2. http://alpana-verma.blogspot.com/2010/02/blog-post.html

      पोस्ट पर आई कुछ प्रतिक्रियाएँ मुझे इस विषय पर अधिक महत्वपूर्ण लगीं.

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    3. लिंक दिया तो है लेकिन डर है कि लिंकयुक्त कमेन्ट स्पैम में न चला जाए.

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    4. एक सिंहावलोकन हो गया ,समग्र परिप्रेक्ष्य -व्यक्ति(यों) ,देश काल और परिस्थिति के समग्र संदर्भ में भी!

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  21. out of sight,out of mind..ये फोर्मुला ही चलता है शायद यहाँ.
    यूँ ये ब्लॉग्गिंग आसानी से छूटने वाली चीज़ भी नहीं.

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  22. पलके तो कई बिछी रहती है , देखने वाला नयन चाहिए .

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  23. आप न्यूट्रल में गाड़ी को साइड में पार्क करके खड़े हो जाएंगे । फिर यह चाहेंगे कि कोई आपको ढूँढ़ निकाले, पाॅसीबल नहीं है । लुका छिपी खेलने से कुछ नहीं होने वाला , यहाँ तो जब तक सक्रिय हैं, विशिष्ट हैं, यह क्या कम है । गि़र बदलिए, हिंदी ब्लाॅगिंग पर निकलिए । सच्चाई को स्वीकारिए, कोई मुगालता मत पालिए ।

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  24. मै तो स्वयं ही फिलहाल काफी अनियमित हूँ । ट्रांझिशन जो चल रहा है और अब अपने से काम भी जल्दी जल्दी नही होता तो जब लौटेंगे तब लौटेंगे अभी तो बस कभी कहीं पढ लिया और कमेंट दे दिया बस । पर आप ने अच्छे फल सब्जी का स्वाद ले लिया हम भी खुश हुए । और ब्लॉगिंग छूटती नही ये कमबख्त मुंह की लगी हुई ।

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  25. अरूणाचल में मेरी भी यही स्थिती थी और अब कश्मीर में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। इंटरनेट को मौलिक अधिकार बनाए जाने की बात उठी थी, काश ये सुनिश्चित हो सके...

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  26. अरूणाचल में मेरी भी यही स्थिती थी और अब कश्मीर में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। इंटरनेट को मौलिक अधिकार बनाए जाने की बात उठी थी, काश ये सुनिश्चित हो सके...
    अभिषेक मिश्र

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