शनिवार, 3 अक्तूबर 2009

वे मुझसे मिलने आयीं भरत मिलाप देखने के बहाने !

अभी उसी दिन उनका फोन आया था -"अरविन्द जी ,आप लोग भोपाल आईये न काफी दिनों से आप लोगों से भेट नहीं हुई है "और मेरा औपचारिक प्रत्युत्तर भी मानो प्रस्तुत होने को तत्पर था ! "आप आईये न बनारस ,आपको नाटी इमली का भरत मिलाप और रामनगर की रामलीला दिखाते हैं " और लीजिये वे बाल गोपाल संग आ भी गयीं ! मैं बात अपनी एम् एस सी की 'सहपाठिनी ' सुश्री कंचन जैन की कर रहा हूँ जो १९८४ बैच की मध्यप्रदेश में कार्यरत  आई ये एस अधिकारी हैं और ऊंचे ओहदे पर हैं ! उनके बेटे कार्तिकेय  और बेटी कल्याणी भी साथ थी .बेटे ने घर का केवल लैटीच्यूड ,लांगीच्यूड पूंछा था और उनकी कार सीधे घर के सामने आकर रुकी -यह कारनामा था कार्तिकेय के मोबाईल में जी  पी एस प्रणाली का जो उन्हें ३ मीटर की डिटेल्स के साथ रास्ता बताता  जा रहा था !


                                                             भरत मिलाप :चारो भाई
मैंने अपने परिजनों के मुंह से अमेरिका में अब आम हो चुकी इस सेवा के बारे में सुना था मगर भारत में इस तकनीक का यह  विस्मित करने वाला उपयोग मैंने पहली बार देखा ! पुराने दोस्तों की यादे ब्लागजगत में ताजा हो रही हैं -उन्हें सार्वजनिक स्थलों पर ढूँढा जा रहा है ! ईश्वर करें सभी के कुछ मित्र कंचन जी जैसे भी हों जिम्हे ढूँढने की जरूरत ही न पड़े ! वे खुद आपको ढूंढ ले -दोस्ती में ओहदे बाधा न बनें !

बहरहाल हमने साथ में सपरिवार भरत मिलाप देखा -चार भाईयों का वह अभूतपूर्व मिलन का साक्षात किया जो लोकस्मृति  में स्थाई बन चुका है -हम सब की आँखें नम हो आयीं !यह  नाटी इमली के भरत मिलाप का महात्म्य है ! यह ऐसे ही एक विश्व प्रसिद्ध आयोजन नहीं बन गया है -अवश्य देखिय देखन जोगू  !चिर विछोह के बाद जिस भावावेग से यह भ्राता  मिलन यहाँ दृश्यमान होता है कि बस मत पूछिए ! यह आम आदमी की भावनाओं को झंकृत करता है -वे खुद को मंच पर पाते हैं ! और यही इस लोक आयोजन की बड़ी उपलब्धि है -लख्खी  मेला कहते हैं इसे ! अपार जन सैलाब इस दृश्य को आँखों मे कैद कर लेने को उमड़ पड़ता है ! इस मेल मिलाप का एक और महात्म्य -बिछडे  भी यहाँ मिल जाते हैं ! वी वी आई पी पंडाल में जैसे कंचन जी से यहाँ बनारस के मंडलायुक्त की  अकस्मात मुलाक़ात हो गयी -दोनों एक ही बैच के आई  ये एस निकले !

वर्तमान  काशी नरेश भी आये भरत मिलाप देखने 



बहरहाल ! कंचन जी को मैंने रामनगर की रामलीला भी दिखाई जो इस मामले में जग प्रसिद्ध है कि यहाँ कोई भी आधुनिक ताम झाम नहीं है -कोई भी नहीं का मतलब कोई भी ! ५-६ किलोमीटर में फैला पूरा भू भाग ही रामलीला का मंच है विश्व का सबसे बड़ा नाट्य मंच ! और लीला के मुख्य स्थल विधिवत बने हुए -पूरे स्थायी तौर पर ! यहाँ जनकपुरी है तो अयोध्या भी है लंका  भी है तो चित्रकूट भी ! लीला प्रेमी दृश्यों के साथ चक्करघिन्नी बने चलते रहते हैं ! न कोई बिजली .न कोई फोटोग्राफी ! न लाउडस्पीकर ! मतलब आधुनिक जीवन की कोई साज सज्जा नहीं -काशी नरेश की आज्ञां से ! यहाँ रामलीला अपने नैसर्गिक रूप और परिवेश में पिछले तीन सौ सालों से अविराम होती आई है -यह एक अविस्मर्णीय अनुभव है ! इतिहासविदों और सामाजिक बदलावों के अध्येताओं  के लिए भी एक पुन्य स्थल ! हमने युद्धोपरांत  सीता की अग्निपरीक्षा देखी और पुष्पक विमान से रामदल की वापसी -पुष्पक विमान को हाथ लगा के भी देखा ! काफी दूर उसे निहारते पैदल चले !


एक फोटो सेशन, बाएँ बैठे ,कंचन ,मैं और गोद में डेजी   ,संध्या :खडे हुए कार्तिकेय ,कल्याणी ,प्रियेषा  और कौस्तुभ

जाहिर है कंचन जी की यह यात्रा बहुत वह रही जिसे हेक्टिक कहा जाता है -वे सरकारी आतिथ्य को ठुकरा मेरे घर ही रुकीं ! इतनी सरलता ,सहजता ,विनम्रता ही मनुष्य के कद को ऊँचा रखती है ,ओहदे नहीं ! कंचन जी के आगमन ने मुझे अकस्मात विस्मृत से हो रहे तैत्तिरीयोपनिषद के दशम अनुवाक (मैंने फिर से पन्ने पलट लिए इसी बहाने ) की यह सूक्ति याद दिला दी -
न कंचन वसतौ प्रत्याचक्षीत तद व्रतं.... अर्थात अपने घर पर ठहरने के लिए आये हुए कंचन{= किसी (भी अतिथि ) को }प्रतिकूल उत्तर न दें ! यह एक व्रत है ! मैं इस व्रत के सकुशल पूरा होने का आभास कर धन्य हो रहा हूँ !

16 टिप्‍पणियां:

  1. पुराने मित्रो से मिलना बहुत सुखद होता है और फ़िर कंचन जी जैसे बहुत कम ही होते है जो इस ओहदे पर पहुंच कर भी प्रोफ़ेशनल बैचमेट या सरकारी आतिथ्य को छोड अपने स्कूल/कालेज के मित्रो के घर रुके।

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  2. बहुत खुशी हुई आपके प्रस्तुति का तरीका लाजवाब है

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  3. बहुत बहुत बधाई जी पुराने दोस्तों से मिलने की

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  4. पुराने दोस्तों से मिलना वाकई सुखद होता है..

    सरलता ,सहजता ,विनम्रता ही मनुष्य के कद को ऊँचा रखती है बिल्कुल सही कहा आपने..


    जी पी एस टेक्नॉलॉजी बहुत कमाल है.. जयपुर की रेडियो टैक्सी में देखी जा सकती है..

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  5. कमाल की चीज है जीपीएस। कितने में ली जा सकती है?
    और जितना बड़ा व्यक्ति हो - उसकी पहचान उसकी विनम्रता से ही होती है।

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  6. सुन्दर प्रस्तुति।
    सुखद मिलन बढ़िया रहा।

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  7. सरलता,सहजता, विनम्रता ही मनुष्य के कद को ऊंचा रखती है -ये तो सुन्दर बात कह दी आपने।

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  8. "यह कारनामा था कार्तिकेय के मोबाईल में जी पी एस प्रणाली का जो उन्हें ३ मीटर की डिटेल्स के साथ रास्ता बताता जा रहा था !"
    अब तो शरद पावर जी भी इसका प्रयोग करेंगे....राजशेखर रेड्डी के गुज़र जाने के बाद का पाठ!!!

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  9. बहुत सुंदर् विवरण, पुराने दोसतो से मिलना बहुत अच्छा लगता है, बाकी इस नेवीगेशन के बिना, हम तो यहां निकम्मे ही हओ जाये, पहले नकशे ओर कागज पेंसिल मै अधध्यन करना करना पडता था, अब इस नेवी के सहारे चलते है.
    धन्यवाद

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  10. आपके आनंद से हम भी आनंदित हुए....

    वैसे बहुत कुछ नया जाने का भी अवसर मिला आपके इस संस्मरणात्मक आलेख से...

    यदि हो सके तो मुझे अपना ई मेल आई डी दीजिये...

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  11. ग्रुप फोटो बड़ा कर के देखा। आप तो एकदम भीमकाय नज़र आ रहे हैं। खलनायक के लिए उपयुक्त मटेरियल !

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  12. आनंद आ गया. रामनगर की रामलीला के बारे में जानकार बहुत आश्चर्य हुआ. आभार.

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  13. कभी हम भी आते हैं आपसे मिलने. पुराने तो नहीं नए दोस्त ही सही :)

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  14. @अभिषेक ,कितनी बार तो कहा है ,लीजिये अब यह लिखित अनुरोध भी हो गया !

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  15. अभिषेक जी, बनारस से वरुणा एक्सप्रेस लखनऊ आती है। वैसे बहुत सी ट्रेने हैं। ए.सी बस सुविधा भी उपलब्ध है। आगे आप खुद समझदार हैं।

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