गुरुवार, 10 नवंबर 2011

एक उदास शाम,देव दीपावली और पुण्य श्लोक राजमाता देवी अहिल्याबाई होलकर

आज बनारस का एक लख्खी मेला देव दीपावली है ..लख्खी का मतलब जहाँ कम से कम एक लाख की भीड़ होती हो ....यहाँ पहले से कई लख्खी मेले विख्यात हैं -जैसे नाटी इमली का भरत मिलाप ,चेतगंज की नक्कटैया ,तुलसीघाट की नाग नथैया तथा सिगरा के पास की रथयात्रा जिसके नाम पर एक चौराहे का ही नामकरण हो गया है ....इन सभी अपार जनसमूह वाले मेलों में लगभग एक दशक से देव दीपावली का भी नाम आ जुड़ा है और इसे वैश्विक पर्यटन का आकर्षण दे दिया गया है -देश विदेश से पर्यटकों का एक बड़ा हुजूम आज यहाँ आ पहुँचता है ...और बनारस के गंगा घाटों पर असंख्य दीप जगमगा उठते हैं ....आतिशबाजी भी होती रहती है और अस्ताचल को बढ़ते चंद्रमा की रश्मियाँ गंगा जी में एक स्वर्ण पट्टी बिखेरती चलती हैं ....

देव दीपावली पर बनारस के बस एक घाट का नज़ारा (सौजन्य गूगल ) 

डॉ.राजेन्द्र प्रसाद घाट (पारम्परिक दशाश्वमेध घाट)  पर गंगा आरती का दृश्य और पार्श्व में शिव तांडव स्त्रोत का पाठ - अद्भुत  दृश्य और अध्यात्मिक अनुभव -जीवन का एकबारगी का समग्र अनुभव देता है ....मैं स्वजनों के साथ, परिवार के साथ ,राज्य अतिथियों के साथ पिछले लगभग हर वर्ष इस मेले का आनन्द उठाता आया हूँ -इस बार न बच्चे हैं ,न घर (तेलितारा ,जौनपुर)  से कोई आया और न ही कोई मेहमान ही सो मेले में नहीं गया हूँ और बैठे ठाले विगत जीवन के कुछ सिंहावलोकन की ओर अनायास उन्मुख हो इस शाम को ही उदास कर बैठा हूँ -लोगों के बनावटी पन,चालाकी ,मित्रों के विश्वासघात,ब्रीच आफ ट्रस्ट आदि के मंजर अचानक ही याद हो आये हैं -कोई बच्चा मेला जाने से बिछुड़ गया हो तो वह ऐसी ही कई विचारों,अकेलेपन और असहायता  से गुजरता है ..बस समझ लीजिये ऐसा ही कुछ बेहद खराब सा अनुभव हो रहा है ...
देवेन्द्र  पांडे जी ने मेले से लौट कर  देर रात भेजा यह  चित्र -देखिये स्वर्ण पट्टी  


कहते हैं देव दीपावली के कई मिथकीय कारणों के साथ ही इस समारोह को महारानी अहिल्याबाई होलकर से भी जोड़कर देखा जाता है ...मैं आज से अच्छा और उचित अवसर कोई और नहीं समझता जब इस अवसर पर मैं इस महान भारतीय नारी के बारे में आपसे कुछ साझा न  करूं..महारानी लक्ष्मीबाई से यहाँ का बच्चा बच्चा परिचित है -उन पर कवियों की खूब लेखनी चली है ....फ़िल्में और सीरियल भी आयें हैं मगर आश्चर्य है कि अहिल्याबाई होलकर के बारे में ज्यादातर लोग बहुत कम जानते हैं ...विकीपीडिया के अंगरेजी और हिन्दी संस्करणों ने इस महान महिला के बारे में यहाँ और यहाँ जानकारी दी है -अंगरेजी की जानकारी प्रभूत और पर्याप्त है ..अगर आपके समय हो तो अवश्य चंद मिनट वहां दें ..कई प्रान्तों में हिन्दू मंदिरों का पुनरोद्धार इन्हीने कराया ..काशी के प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर का एक तरह से जीर्णोद्धार ही इनके द्वारा हुआ ..गया के विष्णुपाद मंदिर को भी इनकी ही कृपा से नया रूप रंग मिला ....
पुण्य श्लोक राजमाता अहिल्याबाई होलकर 

इसके बावजूद एक प्रचलित लोक कथा के अनुसार काशी के लालची पंडों  ने इनके विश्वनाथ मंदिर में घुसने के समय इनके मार्ग पर हीरे जवाहरात बिछाए ताकि शूद्र के चरण से स्पर्शित हो पवित्र स्थल अपवित्र न हो जाय और बाद में मंदिर के गर्भगृह और आस पास के  प्रांगण  को  गंगा जल से धुलवाया ....तत्पश्चात महारानी ने यहाँ के पोंगा पंडितों को तब सीख दी जब वे गंगा स्नान के बाद जल धारा  से बाहर नहीं निकल रही थीं -अपनी सेना भेजकर उन्होंने उन्ही लालची पंडों को बुलाया और कहा अब तो मेरे स्नान के बाद  पूरी गंगा ही अपवित्र हो गयीं है इसे पवित्र करो तभी मैं बाहर आऊँगी ....लज्जित पंडों ने उनसे माफी मांगी ....ऐसी ही पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर ने हजारा दीपस्तम्भ से यहाँ के एक गंगा घाट -पञ्चगंगा घाट पर देव दीपावली की शुरुआत की जो आज एक वैश्विक मेला बन चुका है .
लख्खी मेले पर उमड़ा जन सैलाब (यह चित्र भी देवेन्द्र पांडे जी के सौजन्य से ) 

केवल इस मेले को ही देखकर आप बनारस आने का औचित्य साध सकते हैं और जीवन को धन्य कर सकते हैं ...मेरी बात का भरोसा कीजिये एक अनिर्वचनीय अनुभव के साथ आप वापस जायेगें ...और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अपने संस्मरण छोड़ जायेगें ..इस पोस्ट को पूरी करते करते मैं अपने अवसाद से मुक्त हो रहा हूँ .....बाकी तो बेचैन आत्मा एलियास देवेन्द्र पाण्डेय जी ने आश्वस्त किया है कि इस बार  मेरे संती (हिस्से का ) भी मेला वे देखेगें और उसकी चौचक रिपोर्ट आपको  तक पहुचायेगें  ......मुझे उन्होंने फोटो उपलब्ध करने का भी वादा किया है मगर मुझे सब्र कहाँ और इस उदास शाम के गम को गलत करने का कोई और सहारा भी तो नहीं था -सो थोड़ी सृजनात्मकता का सहारा ले लिया और यह पोस्ट लिख दी है ......
शुक्रिया देवेन्द्र पाण्डेय जी आपके फोटो अवदान के लिए 
और देर रात आयी देवेन्द्र जी की यह आँखों देखी टटकी रिपोर्ट 

37 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने। उस रोचक तथ्य को जान कर काफ़ी अच्छा लगा जब उन्होंने पंडों को सीख दी। देखें इन सब को देखने का सौभाग्य मिलता है कि नहीं।

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  2. बनारस के इस सुन्दर दृष्य का वर्णन बिटिया से सुना है। आशा है कभी देखने को भी मिलेगा। तब तक फोटो देखकर खुश हो लेंगे।
    घुघूती बासूती

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  3. अहिल्याबाई होलकर के साथ पंडों द्वारा किए व्यवहार का पता नहीं था। वे न होतीं तो कितने ही मंदिर खंडहर होते।
    घुघूती बासूती

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  4. wow the that small pic gave enough glimpse of the awesomeness Banaras has :D

    Very informative !!

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  5. आपकी पिछले वर्ष वाली पोस्ट अब भी स्पष्ट याद है, विहंगम दृश्य है यह

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  6. अब तो बनारस के घाट देखने की इच्छा प्रबल हो उठी है ।

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  7. बहुत सुंदर दृश्य ईश्वर से प्रार्थना है कभी स्वयं वहां जाकर देख सकूँ ..... बहुत अच्छी जानकारी देती पोस्ट के लिए आभार

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  8. उदास शामों के लिए सृजनात्मकता से बेहतर कोई अन्य विकल्प नहीं. बनारस की देव दीपावली तो मैं भी मिस कर रहा हूँ. राजमाता देवी अहिल्याबाई होलकर जी पर महत्वपूर्ण जानकारी दी आपने.

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  9. हम तो यही समझते रहे हैं कि परब और मेलों की धारणा हमारे पुरखों ने इसलिए की होगी क्योंकि हम अपनी दिनचर्या से उपजी थकान और किसी भी तरह के अवसाद को दूर या हल्का कर सकें !अफ़सोस तो यही है कि अब ऐसे आयोजन भी नाकाफी हो रहे हैं.

    देव-दीपावली पर बनारस के अपने ठाठ हैं !!

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  10. मुझ जैसे लोगों के लिए सुंदर जानकारी. बनारस जाने का एक बार मौक़ा मिला था. बनारस में कुछ तो बात है.

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  11. @मित्रों,
    अब इस वर्ष का अवसर तो निकल गया मगर अगले वर्ष जो मित्र आना चाहें मुझे पहले से ही बता कर रखें ..आपके बहाने मेरी कम से कम एक शाम तो उदास होने से बच जायेगी !

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  12. आपकी उदासी बहुत ही कामयाब रही |इतनी सम्वेदना और जानकारी से भरी पोस्ट पढ़ने को कहाँ मिलती सर |संती जैसे लोकभाषा का प्रयोग बहुत दिन बाद कानों को सुनने को मिला |कशी की महिमा ही निराली है |अहिल्याबाई होल्कर के साहस बुद्धिमत्ता और मंदिरों के जीर्णोद्धार के बारे में जानना बेहद अच्छा लगा |

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  13. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  14. बनारस के तो मन में ही उत्‍सव रचा-बसा है.

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  15. चित्र देखकर ही मजा आ गया और वहाँ इस मेले में शामिल होना तो सौभाग्य की बात है।

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  16. अहिल्याबाई होलकर और देव-दीपावली के बारे में अच्छी जानकारी .आभार.

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  17. आयं....ई का हुआ ...हम तो माने बैठे थे कि आप हमरे संती मेला देख आयें होंगे ....फिर भी बहुत कुछ दिखला/बतला ही दिया आपने !

    जय जय !

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  18. अहिल्याबाई होलकर और देव-दीपावली के बारे में अच्छी जानकारी .आभार.

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  19. महेश्वर के पास स्थित मंदिरों में से एक में अहिल्याबाई का जिक्र है , किसी मंदिर में उनके समय से अखंड ज्योत जल रही है , और अधिक विवरण इस समय समय याद नहीं आ रहा ...
    चित्र बेहद खूबसूरत हैं !

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  20. शिव तांडव का आडियो भी लगा दें तो मजा आ जाए

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  21. @प्रवीण त्रिवेदी
    बहुत दिन बाद "संती " का उपयोग पढ़ने को मिला , मजा आई गवा ..........सहिये में

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  22. @गंगेश
    भैये पोस्ट ठीक से पढ़ा करो ....ई हमने प्रयोग नहीं किया था ......अरविन्द जी की पोस्ट में पढ़ हमने केवल उसे हाईलाईट कर दिया था ......क्रेडिट गोज टू महामहिम !!

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  23. बनारस, गंगा, देव दीपावली के बारे में पढकर अच्छा लगा, मनोरम चित्र। धन्य हैं वे सब जो गंगा माँ के दर्शन जब चाहे कर सकते हैं।

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  24. .
    .
    .
    इस पोस्ट को पूरी करते करते मैं अपने अवसाद से मुक्त हो रहा हूँ ....

    अपने लिये तो यही सबसे अहम व आश्वस्तिपूर्ण है देव, बाकी मेले तो हर दिन देखने को मिलते हैं हिन्दुस्तान में... :)



    ...

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  25. अद्भुत जानकारी है.मन होता है कि ये दृश्य साक्षात् देखें जाएँ.फिलहाल आपकी पोस्ट और तस्वीरें ही निहार लेते हैं.

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  26. बहुत अच्छी प्रस्तुति व जानकारी !

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  27. बड़ी ही सुन्दर स्वर्ण पट्टी है..अच्छी जानकारी.

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  28. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद घाट..... एक जगह तो उस परिवार से छुटकारा मिला जिसका नाम सुनते सुनते जनता के कान पक गए और प्रधानमंत्री को यह आदेश देना पडा कि उस नाम का सरकारी संस्थाओं के नामकरण में कम से कम उपयोग में लाएं:)

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  29. यहाँ भी वही कहूँगा जो पांडे जी के वहाँ कहा है कि लोगों के लिए यह दृश्य मनमोहक होगा, मेरे लिए गंगा मैया के समक्ष शीश नवाने सा है.. पंडित जी!देव दीपावली का यह पुण्य प्रदान करने के लिए आभारी हूँ!!

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  30. प्रचलित कथा रोचक व प्रेरक है।
    ..कल जितना मौज लिया आज उतना ही मन न लगने वाले काम में व्यस्त रहना पड़ा।

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  31. मैंने भी इसबार आँखों देखा हाल सुना अपने करीबी से और सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रोग्राम देने वाले कलाकार से भी अनुभव सुना जो बिहार से वहाँ गए थे.फिर देवेन्द्र जी का पोस्ट भी देखा अब आपका देख रही हूँ- देव दीपावली.राजमाता देवी के विषय में भी जानकारी मिली. सुन्दर पोस्ट.

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  32. अरविन्द मिश्र जी
    मैं दुविधा में हूँ कि आपकी तारीफ करूँ या आदरणीय देवेन्द्र पाण्डे जी की ।
    आपके सौजन्य से बनारस की देव दीपावली का जीवंत दृष्यावलोकन जो कर सका हूँ।
    धन्यवाद आपको कि आपने श्री देवेन्द्र पाण्डे जी का लिंक दिया।

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  33. अहिल्या बाई शूद्र थीं ये जानकारी तो आप से ही मिली । देवेन्द्र जी की देव दीपावली के नयन मनोरम दृष्य देख कर आये हैं । उन्होने ही कितने मंदिरों का जीर्णोध्दार कराय पंडे तो धन पर नाग की तरह कुंडली मारे बैठे रहते हैं यह नही होता कि भाविकों के लिये कुछ सुविधाएं ही उपलब्ध करा दें ।
    आप की उदास शाम कितनी सुंदर पोस्ट दे गई ।

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  34. आपने और देवेन्द्र जी ने तो गृहनगर का टटका दृश्य दिखा के सम्मोहित कर लिया.
    सुन्दर और जानकारी भरी पोस्ट

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