बृहस्पतिवार, 14 अप्रैल 2011

आईये शनि दर्शन का लाभ उठाईये!

इस माह में धरती से शनि करीब होंगे और नंगी आँखों से दिखेगें यह समाचार आते ही मन इस खगोलीय घटना को देखने को ललक  उठा था ....बताया गया था कि ६ अप्रैल को ही शनि का सुन्दर नजारा दिखेगा ..मैं तभी से इस अवसर का लाभ उठाने को व्यग्र था ..मेरी  बात दर्शन बवेजा जी से भी हुयी जिन्हें विज्ञान में काफी रूचि है ....उनका दावा था कि उन्होंने शनि को ६ अप्रैल को ही देख लिया था -मगर मैं उतना भाग्यशाली नहीं था और यहाँ बनारस का आसमान भी कई दिनों से साफ नहीं था -बादल और धुंध से भरा था ...लिहाजा मैं मन मसोस करके रह गया मगर मेरा शनि अन्वेषण जारी रहा और आज तो खूब आह्लादित हूँ -आज यहाँ रात्रि -आसमान बिलकुल साफ़ है और शनि अपने पूरे सौष्ठव के साथ पूर्व दिशा को आलोकित कर रहे हैं!और अंधे को भी दिख जाएँ इतना साफ़ दिख रहे हैं!

 इस चित्र के सहारे आसानी से पहले स्वाति तारे(Arcturus )  तक पहुंचे फिर आगे चित्रा(Spica )  तक ..बस चित्रा के ऊपर ही शनि महराज हैं!

 भारतीय फलित ज्योतिष और आख्यानों में शनि सूर्य के पुत्र हैं ..मगर पिता पुत्र में बड़ी अनबन है ..पटती नहीं ,इसलिए वे सूरज के अंगने के आख़िरी छोर पर जा पहुंचे हैं ...वे सूर्य - छाया संसर्ग से उत्पन्न हैं इसलिए काले कलूटे हैं ..मेरे बनारसी ज्योतिषी मित्र ने आगाह किया कि मैं शनि को न देखूं क्योकि वे इस समय मेरी ही -कन्या(virgo )  राशि में हैं और चूंकि उनके सूर्य परिक्रमा की गति बहुत धीमी है ,शनैःशनैः वे अपने पथ पर अग्रसर रहते हैं (इसलिए शनिश्चर ) और   एक ही राशि में  ढाई साल तक बने रहते हैं ...अपने पिताश्री सूर्य की परिक्रमा में ये साढ़े उनत्तीस वर्ष का लंबा समय लगाते हैं ...लेकिन ज्योतिषी यह भी मानते हैं कि शनि केवल  बुरे ग्रह ही नहीं हैं ..वे कभी कभी खूब  फायदा भी पहुंचाते हैं-यह कई 'खगोलीय'  बातों पर निर्भर है ....मगर कन्या राशि के होने  के बावजूद  मना करने पर मैं भला अपने उत्साह को कहाँ रोक पाया  ..लिहाजा आज शनि देव का भरपूर दर्शन आनंद सपत्नीक उठाया है और आपसे भी आह्वान है कि इस मौके का आप भी फायदा उठायें और शनि दर्शन कर ही लें -यह एक सामान्य सी मगर खूबसूरत खगोलीय घटना है और इसका  मुफ्त में ही आनंद  उठाने में क्या हर्ज है?फलित ज्योतिषियों को कहने दीजिये वे जो कहते हैं!अधिकांश को  पत्रा के अलावा शनि आसमान में थोड़े ही दिखते हैं !
चाँद की यह स्थति १६ अप्रैल को होगी- तब आसानी से शनि को देखा जा सकेगा
क्या कहा आपको आकाश दर्शन का क ख ग भी नहीं मालूम? हम हैं न, आईये बताते  हैं आपको ... इस समय  सायंकाल के बाद से ही बहुत स्पष्ट है उत्तर दिशा में सात तारों का समूह -सप्तर्षि मंडल (Ursa Major )  ..यहाँ दिए चित्र के सहारे (ऊपर का पहला )  उसे आप आसानी से पहचान जायेगें ...उसके नीचे के तीन तारों से एक रेखा आगे यानी पूर्व की और खीचते हुए बढाते जाईये ..एक खूब चमकता तारा आपको दिखेगा जो स्वाति(Arcturus ) है ..इससे भी आगे लकीर खीचते जाईये ..एक मद्धिम सा तारा मिलेगा यह चित्रा है ....बस ठीक चित्रा(Spica )  के ऊपर शनि पूरे शान के साथ विद्यमान हैं ...और अगले कुछ दिनों में ही  तो चित्रा के समीप ही चन्द्र -पूर्णिमा होगी ....और तब शनि और चित्रा के बीच में पूर्ण चन्द्र का नयनाभिराम दृश्य होगा ....तब  आप और भी आसानी से शनि को देख ही लेगें !वैसे आज की ही रात से देखने का सिलसिला शुरू कर दीजिये ...१६ अप्रैल को सूर्यास्त के  बाद चंद्रमा के उदय पर आप उन्हें शनि और चित्रा के बीच पायेगें और दोनों ही प्रमुखता से दिखेगें -यह हिन्दी का चैत मास है -चूंकि पूर्णिमा का चंद्रोदय चित्रा नक्षत्र में हो रहा है जो कन्या राशि का एक तारा (चित्रा ) है इसलिए ही यह मास चित्रा -यानि चैत है ..हमारे पुरनियों ने  महीनों का निर्धारण प्रति माह चंद्रमा की पूर्णिमा की स्थति से कितने तर्कपूर्ण तरीके से किया है! ..कहते है पाणिनी ने हिन्दी  महीनों के निर्धारण की पद्धति आरम्भ की जैसे चित्रायुक्त पूर्णमासी से चैत,और आगे वैशाख आदि क्योकि इनमें पूर्णमासी का चाँद उदित हुआ!बहरहाल हम बात शनि की कर रहे थे जो इस समय कन्या राशि में हैं ...
 इस समय दिख रही है  चित्रा और शनि की  यही युति

यदि आपकी कन्या राशि है तब तो मेरी तरह से जरुर ही इस नायाब  नज़ारे का लुत्फ़ उठाईये ..और दूसरी राशि वालों को भी अपनी छत पर आमंत्रित कर उन्हें भी यह नजारा दिखाईये ..खासतौर पर  जब पूर्णिमा का चाँद आसमान में सायंकाल के बाद शनि के बिलकुल पास होगा और इससे आपको शनि महराज को ढूँढने में काफी आसानी भी रहेगी!हाँ आकाश दर्शन के लिए शहर के चकाचौंध से दूर गाँव का परिवेश बहुत अच्छा रहता है मगर आसमान साफ़ रहने पर यह नजारा शहर से ही दिख रहा है ...
आपके लिए शनि दर्शन मंगलमय हो!
चित्र सौजन्य:  
Earthsky

39 टिप्पणियाँ:

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

पंडित जी! अवश्य देखेंगे यह अद्भुत दृश्य!!

दर्शन लाल बवेजा ने कहा…

बधाई हो ...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

ज़रूर देखेंगें.... धन्यवाद अच्छी जानकरी दी....

Abhishek Ojha ने कहा…

शनिदेव का प्रकोप तो नहीं होगा न. आप तो देख लिए हमें तो डर लग रहा है :)

सतीश सक्सेना ने कहा…

हमारे लिए यह खगोल और ज्योतिष विषय दुष्कर और अबूझे से ही रहे ! हाँ, दिए चित्र के अनुसार, १६ अप्रैल को शनि दर्शन का प्रयत्न करते हैं ! आभार !

Udan Tashtari ने कहा…

अच्छी जानकारी...

Ashish Shrivastava ने कहा…

शनि महाराज को बायनाकुलर से देखीये! उसके चमकदार वलय भी दीख जायेंगे ! अभी उसके वलयो का कोण पृथ्वी के प्रतल से झुका हुआ है !
किस्मत अच्छी रही तो टाइटन भी दिख जायेगा!

Rahul Singh ने कहा…

'चित्रायुक्त पूर्णमासी से चैत', जी हां, हिंदी महीनों के नाम इसी तरह आगे बढ़ते हुए नक्षत्रों के नाम पर- विशाखा से बैसाख, ज्‍येष्‍ठा से जेठ, आषाढ़ा(पूर्वा और उत्‍तरा) से आषाढ़ आदि है. आम शहरी जिन्‍हें अक्‍सर हिंदी महीनों का ध्‍यान नहीं होता, यह जान कर चौंक सकते हैं कि ठेठ देहाती, अनपढ़ कहे जाने वाले भी बातचीत में बताते हैं कि कब कौन सा नक्षत्र है और खेतिहर के लिए मघा, हथिया की तो कोई बात ही नहीं.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मकर राशि के बारे में ज्योतिषीजी की क्या राय है?

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

आज तो दर्शन करके रहेंगे।..धन्यवाद।

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

प्रवीण जी,
....मकर राशि वालों के बारे में हमारी यह राय बन रही है कि ये छोटे-छोटे वाक्यों में अपनी बात पूर्ण रूप से रखने में समर्थ होते हैं। हंसमुख स्वभाव व मृदुभाषी होते हैं। दर्शन व आध्यात्म के प्रति इनकी रूची इन्हें हमेशा खुश रखती है। शनी देव इनसे हमेशा प्रसन्न रहते हैं।... और भी बतायेंगे पहले इतना बाताइये की ठीक है ?

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

कल आपके निर्देश के अनुक्रम में मैंने इस अद्भुत दृश्य का आनंद लिया,वाकई यह आनंद दायक था.

Arvind Mishra ने कहा…

प्रवीण जी ,
देवेन्द्र जी से सहमत किन्तु निम्न से असहमत -अगर आप भी आज दर्शन कर लें तो सभी निम्न व्याधि से मुक्ति होने की गारंटी :)
मकर राशि- में शनि नवमस्थ होने से भाग्योन्नति व धन लाभ में अड़चनें पैदा होंगी। शनि का पाया लोहा होने से आय कम परंतु खर्चों में अत्याधिक वृद्धि होगी। गुप्त चिंताएँ भी रहेंगी। शनि स्तोत्र का पाठ करना शुभ होगा।

Arvind Mishra ने कहा…

आशीष श्रीवास्तव जी ,
कल ही तो दिखे हैं महराज ,आज दूरबीन से भी देखता हूँ -देख तो कल ही दूरबीन से लेता मगर आलस्य भी कोई चीज है :)

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

क्या शनि महाराज साफ़-साफ़ दर्शन केवल शनिवार को ही देते हैं या यह संयोग मात्र है?
आपने उत्सुकता बढ़ा दी है. इस आकाशीय नज़ारे को देखने के लिये आज़ से ही झुकी नज़रें उठ खड़ी होंगी.
आभार जानकारी के लिये.

Arvind Mishra ने कहा…

@प्रतुल जी
शनि को ही शनि दर्शन -वाह क्या बात है -सोने में सुहागा ....
आज जरुर देखिये ७.३० पूर्व दिशा में चाँद से थोडा पास ही
अवश्य देखिये देखन जोगू !

सञ्जय झा ने कहा…

leo bhijee....hum bhi dekhenge....

pranam

डॉ टी एस दराल ने कहा…

अरविन्द जी , चढ़ा दिया सबको छत पर ।
अब कुछ हुआ तो जिम्मेदारी आपकी ।
खैर कल हम भी चढ़ते हैं छत पर , आपका बनाया नक्षा हाथ में लेकर ।

Arvind Mishra ने कहा…

डॉ .दराल साहब ,
बस साथ में मिसेज डॉ दराल को साथ रखियेगा फिर कौनो प्रेत बाधा नहीं आयेगी ..
मैं तो जब भी बायिनोक्यूलर उठा कर छत की राह पकड़ता हूँ श्रीमती जी अपने आप पिछिया लेती हैं :)
लाख मनाओ मगर मानती ही नहीं !

वाणी गीत ने कहा…

@पति अगर बायिनोक्यूलर लेकर छत की राह पकडे तो पत्नियों का सजग रहना स्वाभाविक है ...

रोज छत पर टहलते सप्तर्षि मंडल को तलाशना और अदृश्य रेखाओं द्वारा तारों से बनने वाली आकृतियाँ निहारने जैसा पागलपन का शौक (बिना बायिनोक्यूलर ) अपना भी है ...

स्वाति , चित्रा की रोचक जानकारी के लिए आभार ...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

@ लाख मनाओ मगर मानती ही नहीं !
अरविन्द जी , यही तो गलती करते हैं । एक दिन छत पर साथ चलने के लिए कह कर देखिये । :)

Arvind Mishra ने कहा…

@वाणी जी ,
फिर तो आप आसानी से शनि महराज को देख सकती हैं -आज की रात देखिये और कोई दिक्कत हो तो मुझसे फोन पर पूछ सकती हैं!

shikha varshney ने कहा…

जानकारी तो अच्छी है ..कोशिश रहेगी देखने की.

cmpershad ने कहा…

बडी सूक्षमता से समझाने के लिए आभार... पर हाय रि किस्मत, अभी तो बादल छाए हुए है और कुछ बौछारें भी पडी। देखते है, एक दो दिन में बादल साफ हो तो... :)

BrijmohanShrivastava ने कहा…

अच्छी जानकारी के लिए धन्यबाद

ashish ने कहा…

छत पर हम भी जायेंगे . देखने शनि और शनिचर को छत पर चढ़े हुए लोग .

अभिषेक मिश्र ने कहा…

दिल्ली / एन सी आर के आसमान में भी तारों को ढूँढना आसान नहीं. पिछले दिनों शनि को मैं भी तलाश रहा था, अब पुनः कोशिश करता हूँ.

rashmi ravija ने कहा…

अच्छी जानकारी है...

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

अच्छा याद दिलाया आपने. वैसे टिप्पणियाँ पढकर तो एक पुराना गीत बदल ही गया:
तुझे शनि के बहाने देखूँ कि छत पर आजा गोरिये ...

ali ने कहा…

आपकी ही कन्या राशि में ?

कृपया आशय स्पष्ट करें !

उन्मुक्त ने कहा…

क्या शनि के वलय भी बिना दूरबीन के दिखायी पड़ रहे हैं।

Arvind Mishra ने कहा…

उन्मुक्त जी ,बिना दूरबीन के वलय नहीं दिख रहे हैं !

ज्योति सिंह ने कहा…

chitro ke madhyam se aapne jo hame samjhaya badhiya laga .sach hai shani ki mahima bhi kam nahi ,uttam jaankaari .aap likhte bahut sundar hai saath hi tippani bhi aapki behad prabhavshali hoti hai ,main har post par jahan aapki aur pravin ji ki tippani hoti hai ek nazar jaroor dal leti hoon .

ज्योति सिंह ने कहा…

main thodi late ho gayi nahi to shayad dekh paati kyonki hamaare ghar ki chhat bhi tisre maale par hai aur baaynakoolar bhi .ab padhkar hi stithi ka anumaan liya jaayega .

संगीता पुरी ने कहा…

meri kami aapne puri kar di .. dhanyawaad.

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

सर बहुत ज्ञानवर्धक जानकारी आपकी पोस्ट से मिलती है |यह पोस्ट भी अच्छी है |

mahendra srivastava ने कहा…

adbhut jankari..

Amrita Tanmay ने कहा…

शहरों में बिजली की रोशनी में तारे भी नजर नहीं आते हैं.कितना कुछ जानते हैं आप?

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