मंगलवार, 28 दिसम्बर 2010

बोर और बोगस है तीसमारखां!

संशय तो पहले से ही था,मगर फिल्म ने सारे संशयों को मिटा कर साबित कर दिया कि वर्ष २०१० के सबसे बोर फिल्मों में तीसमारखां  ने भी अपना नाम दर्ज कर लिया.पैसे और वक्त दोनों की बर्बादी है तीसमारखां . रही बात शीला की जवानी का आईटम डांस तो वह  पहले से ही तमाम चैनलों पर कोहराम मचाये हुए है .इसके बारे में भी यही समझ लीजिये कि दबंग के मुन्नी  बदनाम के आगे   यह मसाला आईटम  भी पनाह और पानी मांगता नजर आता है और गीत के अश्लील बोल की बात तो अलग है ही .

न जाने शुरू से ही क्यों फिल्म झोल खाती नजर आती है ,निर्देशन का कसाव तो फ़िल्म में कहीं है ही नहीं और शायद इसका अहसास निर्देशक फरहा खान को हुआ और इंटरवल के बाद उन्होंने मेहनत दिखाई मगर मामला हाथ से फिसल चुका था .हाँ एक गीत वल्लाह रे वल्लाह कर्णप्रिय जरुर है और मुस्लिम रहन सहन/परिवेश के अनुकूल है .मगर  इतना तड़क भड़क और रंगों साज इस्लाम के अनुकूल तो नहीं -इस विरोधाभास पर दिमाग चलता रहा और फिल्म की रील आगे खिसकती रही .

शीला की जवानी वाला आईटम  भी फिल्म के शुरू होते ही डाल दिया गया और उसके ख़त्म होते ही लग जाता है कि अगर इस बहु प्रचारित दृश्य का यह हाल है तो फिर पूरी फिल्म का क्या होगा -और आशा के अनुरूप ही फिल्म  बाँध  नहीं पाई -हाँ आठ दस वर्ष के बच्चे जरुर नायक की उल जलूल हरकतों पर किलकारियां मार रहे थे-मगर मुझे तो अक्षय कुमार की कलाबाजियां और बेहूदी संवाद अदायगी पर कुढ़न हो रही थी .

फिल्म की कहानी एक चोरों के सरताज की है जो एक पूरी ट्रेन को लूटने का तामझाम अंजाम देता है जिसमें सरकार के अन्टीक -पुरातात्विक महत्त्व के दुर्लभ खजाने भरे हैं .कहानी की मूल सोच दुरुस्त है मगर उसे ठीक से फिल्माया नहीं जा सका है ..छोटे मोटे दृश्य बच्चों के मनोरंजन के लिए बढियां बन पड़े हैं -जैसे अद्भुत ब्रेसलेट के जरिये  चोर का गायब होना और बिना सर वाले घुड़सवार भूत का आतंक .

मेरी ओर से एक स्टार ...बच्चों को भेज सकते हैं मगर वहां भी शीला की जवानी रोड़े अटकाए हुए हैं ...निर्णय आपका! 

41 टिप्पणियाँ:

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

चलिए नहीं जाते। हम तो वैसे भी तभी जाते हैं जब कई लोगों से बार-बार तारीफ सुन लेते हैं।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

arey arvind babu..
farah khan ne kabhi dhang ki movie banaayi hai jo ye banayegi...
wahiyaat movie hai...
main hoon na
om shanti om
aur ab ye TMK.....
sab ki sab bakwaas....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चलिये, आपकी सलाह से पैसे बच गये।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बिलकुल नहीं देखेंगे यह फिल्म ....अच्छा हुआ जो पहले ही बता दिया ...

shekhar suman ने कहा…

अरविन्द जी पिछले ३ सालों से अक्षय कुमार ऐसे उल्लू हो गए हैं कि जिस फिल्म में बैठे वो तो बकवास होनी ही है....
मैं तो अक्षय का नाम सुन के ही फिल्म से तौबा कर लेता हूँ....
आपने आगाह कर दिया कि अभी ये तौबा जारी रखनी है...

सतीश सक्सेना ने कहा…

मैं तो इसीलिए मूवी नहीं जाता, हर नए प्रयत्न पर लगता है यह समय कही और सदुपयोग करता तो अच्छा था !

रचना ने कहा…

1966 mae bani ek film ki indian copy"

Meenu Khare ने कहा…

अच्छा किया बता दिया.हम देखने जानेवाले थे,वों भी न्यू इयर में.

Satish Chandra Satyarthi ने कहा…

दबंग 'मुन्नी' के सम्मोहन में देख ली थी.. बड़ा पछताया बाद में.. 'शीला' को झेलने की हिम्मत नहीं है... तीन घंटा सो लें वो ज्यादा अच्छा रहेगा...

Arvind Mishra ने कहा…

@रचना ,
यह भी बताएं की किस फिल्म की कापी है यह ,मूल फिल्म निश्चय ही बहुत अच्छी रही होगी -यह तो एक भोंडी नक़ल भर है बस !

एस.एम.मासूम ने कहा…

अच्छा विश्लेषण ..धन्यवाद्

mukti ने कहा…

हे भगवान ! किसने कहा था आपको कि जाकर ये फिल्म देख आइये. अक्षय कुमार और कटरीना की सारी फ़िल्में तो एक जैसी होती हैं. एक देख ली तो समझो सब वैसी ही हैं चाहे उसे फराह खान जैसी मसाला फिल्मों की सरताज ने बनाया हो.

रचना ने कहा…

http://www.hindustantimes.com/mayank-shekhar-s-review-tees-maar-khan/Article1-642451.aspx

Arvind Mishra ने कहा…

@शुक्रिया रचना
@मुक्ति,अब तो यह तो नहीं ही कहूँगा कि शीला की जवानी ने कदम भटका दिए थे :)

कविता रावत ने कहा…

चलो आपकी पोस्ट पढ़कर जानकारी मिली... वैसे समय कहाँ मिलता है अब फिल्म देखने का ... ब्लॉग पर या न्यूज़पेपर में स्टोरी पढ़कर संतुष्ट हो जाते है ... वैसे भी आज की फिल्म की पटकथा पढ़ ली तो समझ आ ही जाता है फिल्म कैसी होगी..

प्रस्‍तुति के लिए आभार


आपको नव वर्ष की बहुत बहुत हार्दिक शुभ-कामनाएं

डॉ टी एस दराल ने कहा…

हमारी जनता कैसी है जो शीला जैसे गाने को हिट बना दिया ।
इससे तो मुन्नी वाला गाना ही अच्छा था ।

shikha varshney ने कहा…

हमारे तो पैसे बच गए वाकई वाहयात फिल्म है अभी डी वी डी पर चल रही है.झेली नहीं जा रही इसलिए हम ब्लोगिंग कर रहे हैं.

VICHAAR SHOONYA ने कहा…

मिश्रा जी अक्षय कुमार मेरी नज़र में एक बकवास हीरो है. पर पता नहीं क्यों वो इतना चल रहा है. राम राम घोर कलजुग है.

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

सौ प्रतिशत सही समीक्षा .

अभिषेक ओझा ने कहा…

हमने तो पहले ही दिन रिव्यू पढ़कर फैसला कर लिया कि फ़ोकट में भी नहीं देखेंगे. पर क्या करें आप देख आये और ऐसे ही कई अन्य भी. तो फरहा की झोली तो भर ही रही है :(

अल्पना वर्मा ने कहा…

वीरवार को देखी थी.
बे सिरपैर की कहानी सिर्फ टाइम पास लगी- हल्का फुल्का मनोरंजन [वो भी अंतराल तक ]उसके बाद सिरदर्द थी.

अभिषेक मिश्र ने कहा…

संजोग से आपके ब्लॉग पर आते हुए सोच भी रहा था कि गुजरते साल के साथ कोई नई फिल्म समीक्षा मिलेगी या नहीं? और उत्तर मिल भी गया. कम शब्द खर्च कर कई ब्लौगर्स के ज्यादा पैसे खर्च होने से बचा लिए आपने. धन्यवाद.

राज भाटिय़ा ने कहा…

चलिये आप ने हमारी बिजली, समय ओर दिमाग बचा दिया, साथ मे दस बीस गालिया भी बचा दी, वर्ना -डाऊन लोड करते, फ़िर देखते फ़िर गालिया देते,अब सिर्फ़ दुशमनी निकालने के लिये दुसरो को यह फ़िल्म देखने की सलाह जरुर देगे:) धन्यवाद जी

वाणी गीत ने कहा…

अक्षय कुमार और ऐसे वाहियात गाने की फिल्म से आप और क्या अपेक्षा कर रहे थे ?

Rahul Singh ने कहा…

फिल्‍में कम देखता हूं, लेकिन कई परिचित और शुभचिंतक हैं, जिन्‍होंने फिल्‍म देख कर निकलते ही इसी से मिलती-जुलती खबर की. कोई तो खास बात है इस फिल्‍म में जो देख लेने वाले को सलाह-उद्यत कर दे रहा है.

sanjay jha ने कहा…

oh...ho...ye philmi-masla hai.....
hum to rangmunch ke kalakar hain ...

pranam.

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

अच्छी सलाह भाई जी........... गाना तो टी वी में देख लिए........... फिल्म आपके ब्लॉग से. बढ़िया है पैसे जो बच गए. आभार .

cmpershad ने कहा…

डॊक्टर सा’ब, आप शायद गलतफहमी में थे... ये तीसमार खां है शेख़चिल्ली नहीं :)

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

पंडित जी, इनके छोटे भाई (साजिद खान) लोगों को महेश भट्ट की फ़िल्म के बारे में बताते थे टीवी पर कि अमुक फ़िल्म उन्होंने कहाँ से चुराई है. अब बड़की दीदी की फ़िल्म के बारे में बताएँगे..
आप ख़ामखाह शीला के चक्कर में आ गए!!
:)

Shiv ने कहा…

सुन्दर समीक्षा.

फिल्म के बारे में बताने के लिए धन्यवाद. काफी पैसे बच गए.

प्रणाम!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

कैसे देख लेते हैं आप इतनी पिक्‍चर, मैं तो सोचता रह जाता हूँ और पिक्‍चर उतर जाती है।

---------
साइंस फिक्‍शन और परीकथा का समुच्‍चय।
क्‍या फलों में भी औषधीय गुण होता है?

smshindi ने कहा…

NAYA SAAL 2011 CARD 4 U
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@(________(@
@(________(@
please open it

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/”**I**”/
/ “MISS” /
/ “*U.*” /
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“LOVE”
“*IS*”
”LIFE”
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/ “LIFE” /
/ “*IS*” /
/ “ROSE” /
@======@
“ROSE”
“**IS**”
“beautifl”
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/”beautifl”/
/ “**IS**”/
/ “*YOU*” /
@======@

Yad Rakhna mai ne sub se Pehle ap ko Naya Saal Card k sath Wish ki ha….
मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है !

mahendra verma ने कहा…

फिल्म की समीक्षा पढ़ ली,
अब देखने की ज़रूरत नहीं है।
धन्यवाद आपको।

prkant ने कहा…

आपने तो हमारे पैसे बचवा दिए. रही पत्नी की नाराज़गी.....तो बैंड-बाजा-बारात दिखाकर दूर कर लेंगे!!

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

पर तीस तो मार दिए होंगे
एक हिन्‍दी ब्‍लॉगर पसंद है

सुज्ञ ने कहा…

आपको तो सदैव ही हमारी शुभकामनाएं रहती है यह पाश्चात्य नव-वर्ष का प्रथम दिन है, अवसरानुकूल है आज शुभेच्छा प्रकट करूँ………

आपके हितवर्धक कार्य और शुभ संकल्प मंगलमय परिपूर्ण हो, शुभाकांक्षा!!

आपका जीवन ध्येय निरंतर वर्द्धमान होकर उत्कर्ष लक्ष्यों को प्राप्त करे।

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

नये वर्ष की अनन्त-असीम शुभकामनाएं.

वीना ने कहा…

ऐसे गाने वाली फिल्म से उम्मीद क्या की जा सकती है....समीक्षा से बहुत लोगों को फायदा हुआ..मिझे भी..नव वर्ष मंगलमय हो...

abhishek1502 ने कहा…

कल इसी फिल्म को देखने का प्रोग्राम था ,
हमारे पैसे बचने के लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

पंडित जी! आपका स्नेह इसी प्रकार बना रहे, हम अपना मौलिक लेखन जारी रखेंगे. आपकी शुभेच्छा की प्रतीक्षा थी.
परिवार भर के लिये हमारी शुभकामनाएँ!!

ali ने कहा…

शीला के चक्कर में काफी लोग बर्बाद हो चुके हैं अब तक :)

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