शनिवार, 28 नवंबर 2009

एक और व्यथित नायिका है -विप्रलब्धा!(नायिका भेद-१०)


अनूढ़ा और परकीया के अधीन ही एक और व्यथित नायिका है -विप्रलब्धा !नायक को पूर्व निश्चित किये गए समय पर संकेत स्थल पर न पाने वाली व्यथित  नायिका ही विप्रलब्धा है .


राकेश गुप्त की यह कविता विप्रलब्धा की व्यथा को चित्रित करती है-


प्रिय से था अनुबंध मिलन का ,
खुशी खुशी थी चली गयी मैं ;
पर अभिथल पर नहीं मिले वे ,
मर्माहत थी ,भली  गयी मैं ;
चार घड़ी की व्यर्थ प्रतीक्षा ,
समय चक्र में दली  गयी मैं ;
वंचक का विश्वास किया था,
इसीलिये तो छ्ली   गयी मैं 






चित्र सौजन्य :स्वप्न मंजूषा शैल

26 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर विश्लेषण! उस समय कितना क्रोध उपजता होगा नायिका में? पर शायद प्रेमवश वह उसे भी सह जाती है।

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  2. इस बार फोटोग्राफ़ और पेंटिंग दोनों सटीक आए। बधाई।

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  3. अरविंद भैया ये तो उल्टा ही हो रहा है, अभी तक हम ही पहुंचते थे पहले वो नही पहुंचती थी-क्योंकि नायिका जो थी, आज नायिका पहले पहुंच गयी और हम रह गये बीवी बच्चों के चक्कर मे। एक बार मुझे मजेदार सपना आया था इसी बात पर कभी उसकी चर्चा करुंगा। आपने नायिका भेद बढिया चला रखा है राकेश जी के कवित्त के साथ-आभार

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  4. वंचक का विश्वास किया इसलिए छली गयी विप्रलब्धा ....!!
    कविता और चित्र विप्रलब्धा की व्यथा को बहुत खूबसूरती से उकेर रहे हैं ....
    आभार ...!!

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  5. भैया !
    आज का समय हो तो मोबाईल पर नायक
    की अच्छी खबर ली जाय ...पर अब तो .........
    ........ '' अब न रहे वे पीने वाले अब न रही वो मधुशाला ''..........
    ( मधुशाला का प्रयोग मैंने व्यंजना में किया है अभिधा
    में नहीं , नहीं तो नारीवादी पिल पड़ें मेरे ही ऊपर ....)
    ...............एक गुत्थी दिमाग में चल रही है कि इस ' विप्रलब्धा ' में
    ' विप्र ' शब्द किस अर्थ में आया है .......

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  6. मुक्ति जी बता पायें शायद !

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  7. हाय!! ये ही क्यूँ सतत होता आया है..

    वंचक का विश्वास किया था,
    इसीलिये तो छ्ली गयी मैं

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  8. बढ़िया है जी !!
    हम सारे भेद समझने की कोशिश कर रहे हैं!!!!!!!!!!

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  9. कविता और चित्र दोनो लाजवाब शुभकामनायें

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  10. विप्रलब्धा! वियोगिनी होगी कोई कवयित्री :)

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  11. ओहो!
    मैं देर करता नहीं देर हो जाती है...।

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  12. आप की कविता ओर यह चित्र दोनो ही बहुत अच्छेलगे.
    धन्यवाद

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  13. अच्छा अच्छा! जो प्रेमी को संकेत अनुसार नहीं पाती उसे विप्र पा लेता (विप्रलब्धा) है! :)

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  14. भैया, ये विप्र लोगों का घोंटा बन्द क्यों नहीं करा देते - रहस्य से पर्दा उठा कर :)
    आप की संस्कृत को क्या हो गया है!
    वि+प्रलब्धा द्वारा अर्थ निकलेगा क्या?

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  15. गोपियां कृष्ण की प्रतीक्षा कर रही हैं आज तक ब्रज में.

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  16. विप्रलब्धा पर सभी का ध्यान फोकस हो गया है ,मुझे इन सोचों पर क्षोभ हो रहा है
    खैर इश्वर सदबुद्धि दें

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  17. वंचक का विश्वास किया था,
    इसीलिये तो छ्ली गयी मैं
    अरविन्द जी,
    अब ये बताइए की same विप्रलब्धा नायिका क्या दोबारा फिर विप्रलब्धा नायिका बनेंगी ????
    ज्ञान की प्राप्ति हो रही है नायिकाओं के बारे में...
    सुन्दर...

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  18. फोटो व पेंटिंग से आलेख की सुंदरता बढ़ गयी है।

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  19. "विप्रलब्धा वंचिता है, प्रिया ने अपमान पाया
    क्योंकि निश्चित समय बीता, किन्तु उसका प्रिय न आया ।"

    विप्रलब्धा नायिका की यह प्रस्तुति भा गयी । चित्र तो सुन्दर हैं ही ।

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  20. विप्रलब्धा के विषय में दशरूपक की कारिका है, "विप्रलब्धोक्तसमयप्राप्तेऽतिविमानिता" अर्थात्‌ प्रिय के दत्तसंकेत समय पर उपस्थित न होने पर जो नायिका अपने आपको अत्यधिक अपमानित समझती है, वह विप्रलब्धा कहलाती है.
    "वंचक का विश्वास किया था,
    इसीलिये तो छ्ली गयी मैं " ...अत्यधिक प्रासंगिक पंक्तियाँ हैं.
    आपके लेख में दिये गये चित्र और कविता बहुत सुन्दरता से इस नायिका के मनोभाव प्रदर्शित कर रहे हैं. भारतीय साहित्य के शास्त्रीय ज्ञान को नये रूप में प्रस्तुत करने के लिये धन्यवाद!

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  21. कुछ लोगों ने "विप्र" का अर्थ पूछा है. यह बिल्कुल सही है कि "विप्रलब्धा" के दो सन्धि-विच्छेद हो सकते हैं १. वि+प्रलब्धा तथा २. विप्र+लब्धा. पर विप्र जन प्रसन्न न हों क्योंकि यहाँ पर पहला अर्थ ही प्रासंगिक है. परन्तु, विप्रजनों का कोई दोष नहीं, दोष उस मानसिकता का है जो युगों से चली आ रही है, कि जो भी वस्तु, व्यक्ति या स्थान हो, उस पर पहला अधिकार विप्रजनों का ही होता है. और विप्रजन इसी प्रकार प्राचीन शास्त्रों की व्याख्या भी अपने लाभ और सुविधा के अनुसार के अनुसार करते रहे हैं.

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  22. विप्रलब्ध की व्युत्पत्ति है = वि+प्र+लभ्‌+क्त. आप्टे के अनुसार इसका अर्थ है="ठगा गया, चोट पहुँचाया गया" वैसे यह नायिका विशेष के लिये ही प्रयुक्त होता है. वस्तुतः संस्कृत में वि और प्र उपसर्ग एक साथ किसी एक वस्तु को दूसरे से अलग करने के प्रसंग में आते हैं.

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  23. @मुक्ति,आभार ,बहुत सुन्दर विवेचन और विप्रलब्धा शब्द के व्युत्पत्ति विश्लेषण के लिए !
    आपकी उपस्थिति इस विषय की प्रस्तुति को समग्रता दे रही है !

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  24. Finally and fortunately i arrived on this post and enjoying the bliss of reading the 'classication of women'.Beautifully described ! But where is Hansini and Gajgamini?

    Anyways i'm looking forward for the classification of macho males.I'm sue that will sound more interesting and beneficial for we women.

    I wonder what category the author falls in .

    Do pardon my ignorance.

    Divya

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