बुधवार, 13 जून 2012

ग़ज़ल के बादशाह को आख़िरी सलाम


मेहदी हसन साहब का इंतकाल हो गया है .और इसी के  साथ ग़ज़ल गायकी के एक युग का अंत भी .यह समाचार मेरे लिए जैसे स्तब्ध  करने वाला रहा . वे मेरे सबसे पसंदीदा ग़ज़ल गायक रहे हैं ...उनको आख़िरी सलाम कहते हुए मन दुखी है .मैं उनके स्वास्थ्य को लेकर पहले से ही चिंतित था . और आज यह दुखभरा समाचार आ गया .
क्वचिदन्यतोपि पर स्मृति -शेष 


 एक श्रद्धांजलि: स्वप्नदर्शी   
संतोष त्रिवेदी की श्रद्धांजलि 
कबाड़ खाना पर शोक -श्रद्धांजलि 
नज़रिया पर शोकांजलि 
रविवार पर पुण्य स्मरण 
अवधी के अरघान पर यह आयोजन 
चाँद  पुखराज का पुण्य स्मरण 
एक ज़िद्दी धुन की शोक श्रद्धांजलि 
उनकी इस ग़ज़ल के साथ ग़ज़ल के इस बादशाह को अंतिम विदाई .....

20 टिप्‍पणियां:

  1. आपके और हमारे चहेते गायक नहीं रहे.दरअसल ऐसी शख्सियत को महज़ गायक कहना भी उचित नहीं है.मेंहदी साहब हमारे जीवन का हिस्सा थे और ऐसे में उनका न रहना हमें हमारी रूह से जुदा करता है :-(

    ...तुम कहीं नहीं गए,शामिल मेरी साँसों में हो,
    रंजिश ही सही पास मेरे,लौट आओ तुम !

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  2. हम भी स्तब्ध हैं ! श्रृद्धांजलि

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  3. खबर पढ़ते ही आपकी पसंद जेहन में आ गयी . .अपूरणीय क्षति तो है ही पर गजलों के साथ वे हमेशा हृदय -साज को झंकृत करते रहेंगे..

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