गुरुवार, 6 अगस्त 2009

एक मुहावरे के त्रासद अनुभव से गुजरते हुए .....

जी हाँ एक मुहावरा आंशिक रूप से ही सही अपने अर्थ को भली भांति समझा गया है -वो कहते हैं न जाके पैर न फटे बेवाई वो क्या जाने पीर पराई? मगर मुहावरा यह नही बल्कि यह है -राड़ साड़ सीढी संन्यासी इनसे बचे तोसेवे काशी ! किस्सा कोताह यह कि परसों एक सुधी स्वजन के आकस्मिक मृत्यु के धक्के से हम उबरने की कोशिश में थे -कल ही अन्तिम संस्कार -दाह कर्म गंगा के प्रसिद्द श्मसान घाट -मणिकर्णिका घाट पर था ! दाह कर्म के बाद गंगा स्नान की परम्परा है ,लिहाजा स्नान की तैयारियों में हम सब लगे थे तभी पैर फिसला ,संभलते संभलते गिर ही गए और दायें पैर में मोच आ गयी -एक दो घंटे तो लगा कि कुछ ख़ास नही है मगर दर्द बढ़ना जो शुरू हुआ तो ब्लागजगत का अवलोकन जो आप जानते ही हैं कि इन दिनों हम लोगों का कितना प्रिय शगल है ,जारी रह पाना सम्भव नही हुआ ! डाक्टर साहब ने चेक कर बताया कि कुछ लिगामेंट स्ट्रेच हो गए हैं -दर्द निवारक गोलियाँ और क्रीम दी और पैर में एक ख़ास तरह का मोजा पहना दिया -कल रात तो दर्द ने काफी परेशान किया -जब राहत मिली तो लगा कि दुनिया में दर्द के होने से बढियां कुछ भी नही है

आज छुट्टी ले रखी है -सुबह ही समीर जी का बीमार लोगों का ब्लॉगर क्लब ज्वाईन कर लिया है -बैठे ठाले इस दुर्घटना पर जब पुनार्चितन शुरू हुआ तो याद आ गयी इस मुहावरे की -राड़ साड़ सीढी संन्यासी इनसे बचे तो सेवे काशी! अब प्रबुद्ध लोगों का इसका अर्थ क्या बताना ! फिर भी बताता चलूँ कि काशी की सेवा तभी हो सकती जब आपकी जान इनसे बख्श दी जाय -राड़ सांड सीढी संन्यासी ! अब वैधव्य बोझ उठा रही अबला से भला किसीको क्या हानि हो सकती है मगर यहाँ कालसम घूमते बलिष्ठ साड़ों और आपको लूट लेने वालों संयासी कहर बरपाते ही रहते हैं ! मगर मुझे तो सिंधिया घाट की खडी सीढियों ने जो सबक सिखा दिया है की मैं अनुभव जन्य मुहावरों की महिमा से बखूबी परिचित हो गया -साहित्य में भी भोगे हुए यथार्थ की चर्चा गाहे बगाहे होती ही रहती है ! आप भी ध्यान रखें बनारस में जब दाखिल हों इस मुहावरे को याद रखें -राड़ साड़ सीढी संन्यासी इनसे बचे तो सेवे काशी!

24 टिप्‍पणियां:

  1. अब क्या कहें, सब आपने कह दिया
    -------
    'विज्ञान' पर पढ़िए: शैवाल ही भविष्य का ईंधन है!

    उत्तर देंहटाएं
  2. गंगा मैया का शुकर है कि फ़्रेक्चर नही हुआ,वर्ना मुहावरो के साथ-साथ पूरे व्याकरण की बखिया उधेडनी पडती।अपना ख्याल रखे और इस मामले मे लापरवाही ना बरतें,

    उत्तर देंहटाएं
  3. अरे गुरूजी, सांड तो बनारस की शान होते हैं । बगल से चले जाओ, कुछ नहीं कहेंगे लेकिन थोडा दूर जाकर चटक मटक करने लगो तो रपट लेंगे :)

    खैर, जिन सीढियों का आपने जिक्र किया है ये वही सीढियां हैं जहां बैठकर बिसमिल्ला खां, छन्नूलाल मिश्र जैसी हस्तियों ने रियाज किया है।

    आप तो भाग्यशाली हैं कि उन सीढियों को याद रखने लायक अनुभव बटोर लाये :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. आखिर बृहस्‍पति ग्रह का बुरा प्रभाव आपपर पड ही गया न .. अब 15 अगस्‍त के बाद ही राहत मिलेगी !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाकई अनुभवजनित ज्ञान का कोई विकल्प नहीं. आपके इस दर्द से जल्द निजात पाने की कामना करता हूँ.

    उत्तर देंहटाएं
  6. अरे भाई, अभी से काशी! बस शुकर मनाएं कि थोडे़ में बला कटी। शीघ्र स्वास्थलाभ की कामना:)

    उत्तर देंहटाएं
  7. कल रात तो दर्द ने काफी परेशान किया -जब राहत मिली तो लगा कि दुनिया में दर्द के न होने से बढियां कुछ भी नही है।

    बहुत बढ़िया।
    अच्छी पोस्ट लगाई है।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  8. नोट करके रख लिया...काशी आयेंगे तो याद रहेगा.

    तबीयत जल्दी ठीक कर क्लब से निकलिये.

    उत्तर देंहटाएं
  9. पैर जल्दी ठीक हो और आप वापस काम के आदमी हो जाएँ यही कामना है। पैर वाला हादसा इतनी बार हो चुका है कि पैर को आदत पड़ गई है अपना बचाव खुद कर लेता है।
    कहावत याद है पहले से यह काशी में ही नहीं सब स्थानों पर बचने की बात है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. हमारा कमेन्ट हेरा गया क्या?

    उत्तर देंहटाएं
  11. यह मुहावरा सूना खूब था मगर सही अर्थ आज ही जाना. ध्यान रखिये और जल्दी स्वस्त्थ होइए!

    उत्तर देंहटाएं
  12. बनारस की यह लोकोक्ति पुराने शहर में प्रवेश करते ही चरितार्थ होने लगती है। नये शहर, रेलवे स्टेशन और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जेबकतरों और उचक्कों से भी सावधान रहना पड़ता है।

    मोच के बहाने से घर रहकर ब्लॉगरी को परवान चढ़ाइए। अपना फायदा तो इसी में है। हाँ, दर्द निवारक लेते रहिए। हम भी दस दिन से आराम ही कर रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बचपन से ये मुहावरा सुनते आरहे थे. आज हकीकत सुनी. अब आशा है सब ठीक होजायेगा जल्दी.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  14. @शुभकामनाओं के लिए आभार मित्रों -बिना बीमार हुए इनसे वंचित रहना पड़ता है !
    @वाह संगीता जी वाह ,शुभकामना नहीं तो कम से कम शापित तो मत ही कीजिये !
    @सिद्धार्थ भाई , यह तो खूब सुझाई आपने -इसे ही कहते हैं ब्लेसिंग इन डिसगायिज !

    उत्तर देंहटाएं

  15. गोड़ तोड़े बईठ हो.. अउर हम टिप्पणी भी न दें ? ज़रूर देंगे.. ..
    मगर आपको टूटे गोड़ के साथ एक फ़ुलसाइज़ फोटू सटाना होगा.. कैमरा तो हईये है, जो वहि दिन बेटवा के साथ नलकी से पीते समय खिंचाये रहे !

    उत्तर देंहटाएं
  16. Chaliye isee bahane ek post taiyaar ho gayee.
    ha ha haa
    @Sangeeta jee, kal mere dost ko 500 Rs. raste men pade huye mile, kya ye bhi brahaspati ka bura prabhaav hai?

    उत्तर देंहटाएं
  17. वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने! इस बेहतरीन पोस्ट के लिए बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  18. sir ji , jaldi se aaraam kar ke apni tabiyat ko theek karke blog jagat me aa jaayiye . hum sabko aapki bahut jarurat hai ji ...
    please take care....


    regards

    vijay
    please read my new poem " झील" on www.poemsofvijay.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  19. @डाग्डर साहिब फोटुयिया इहीं बदे नई लगाए की समीर भयिअऊ एक ठू चेपे रहे लोग ओंकार माने से इनकार कई देहेन !

    उत्तर देंहटाएं
  20. मणिकर्णिका घाट पर चोट लगने से ही छुटकारा मिला।
    निश्चय ही लम्बी उम्र होगी आपकी। यह पॉजिटिव पक्ष ले कर चलें, दर्द कम महसूस होगा!
    टेक केयर।

    उत्तर देंहटाएं
  21. अच्छा किया बता दिया गुरूवर...अभी हाल-फिलहाल में माताश्री को लेकर जाने का प्रोग्राम भी है...

    आप अपना ख्याल रखें !

    उत्तर देंहटाएं
  22. हम्म... याद रखेंगे. फिलहाल आप अपना खयाल रखिये.

    उत्तर देंहटाएं
  23. काहे कहावत को कोस रहे हो
    मेरे भाई पैर कहाँ फिसला होगा हम जानत है पैर व पीठ का इलाज भी तो आपके पास रेडिमेड रहता ही है तो आजमा लो न डाक्टर साहिब इतनी मुफीद घरेलु इलाज जानने के बाद भी इस तरह रिरिया रहे हो अच्छा नहीं लगता
    आप जल्द स्वस्थ हों आपके टांगो से अभी बहुत कुछ कर गुजरने की आशा है

    उत्तर देंहटाएं

यदि आपको लगता है कि आपको इस पोस्ट पर कुछ कहना है तो बहुमूल्य विचारों से अवश्य अवगत कराएं-आपकी प्रतिक्रिया का सदैव स्वागत है !

मेरी ब्लॉग सूची

ब्लॉग आर्काइव