शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

जो यहाँ दिख नहीं रहे उन्हें फेसबुक और ट्विटर पर खोजिये

अगर आप को किसी  की पोस्ट का या खुद उसका ही  बेकरारी से इंतज़ार है और वह अरसे से हिन्दी ब्लागजगत में दिख नहीं रहा तो उसे एक बार तनिक फेसबुक या ट्विटर पर खोज लीजिये न .. बहुत संभावना है वह वहां गुलछर्रे उड़ाता मिल जाएगा ...कुछ समय पहले मैंने इस बात की आशंका जतायी थी कि ब्लागजगत की पब्लिक तेजी से फेसबुक की ओर  न रुख कर जाए ...और मैंने देखा अब   कुछ कुछ ऐसा ही हो रहा है ..


कुछ लोगों   ने   तब   यह विचार  व्यक्त  किये  थे कि फेसबुक सरीखी  सोशल  नेटवर्क  की साईट  ब्लॉग  जैसे विचार  विमर्श  वाले स्थान की जगह नहीं ले सकती .. यह बात मार्क जुकरबर्ग ने शायद सुन ली हो  और फेसबुक में "नोट्स" की एक अलग सुविधा जोड़ दी जहाँ आप ब्लॉग की ही तरह व्यक्त हो सकते हैं ..लोगों ने इस सुविधा को हाथों हाथ लिया और वहां भी पिल पड़े ....हिन्दी के एक बड़े प्रोफ़ेसर तो वहां   आदतन नोट्स में ही लिखते हैं और  यहाँ ब्लॉगजगत में उनकी पोस्टों पर कोई टिपियाने वाला नहीं रहता .  फेसबुक पर बहार ही बहार है ..ब्लॉग पर लाले और फेसबुक पर मतवालों की कमी नहीं ..यहाँ बिचारे प्रोफ़ेसर साहब को ढूंढें भी पब्लिक नहीं मिल रही वहां बिन ढूंढें हजार मिल रहे हैं ...


ब्लागजगत से लोग मायूस से हो रहे हैं ..लोग टंकी पर चढ़ उतर रहे हैं ..कुछ लोग चढने को तो चढ़ गए मगर उतर नहीं पा रहे -नीचे उतारने वाली पब्लिक भी नहीं रही ..कारण  नीचे शोर करने वाली पब्लिक में से भी कुछ टंकी पर जा चढ़े और अब दिख भी नहीं रहे ....मगर आप फेसबुक पर जरा देखिये पूरी संभावना है वहां ये गुले गुलजार करते मिल जायेगें ..कुछ समदर्शी ब्लॉगर ब्लॉग पर, वहां फेसबुक पर भी समान रूप से काबिज हैं और अपनी समदर्शिता के गुण गाये जा रहे हैं ...


कहीं ऐसा तो नहीं कि अन्यान्य कारणों से  हिन्दी ब्लागिंग से ब्लागरों का पलायन तेजी से शुरू हो गया हो और उन्हें फेसबुक का चेहरा ज्यादा भाने लगा है और ट्वीट करने और चोंच से चोंच मिलाने या चंचु प्रहार में ज्यादा आनंद मिल रहा हो ...अब तो कई मेरे 'बूजम' मित्र ही हैं जो यहाँ तो अब नहीं पधारते मुला फेसबुक पर जो बतियाना शुरू करते हैं तो न सांस लेते हैं न लेने देते हैं ....कविता में मेरा हाथ शुरू से तनिक तंग रहा है -एक दिन फेसबुक पर कुछ लिखना चाहा मगर बस चंद लाईनें ही लिखीं कि फेसबुकिये मित्रों ने  शुरू कर दी चीड फाड़ और कविता सृजन का उत्साह जाता रहा ...कविता अधूरी ही रह गयी ...



फेसबुक ब्लॉग जगत से ज्यादा त्वरित है ...दुतरफा संवाद भी वहां  ज्यादा तत्परता से है और मित्रों की संख्या 
हजारों में है जबकि यहाँ तो फालोवर जैसे फूंक फूंक कर फालो करते हैं ...फेसबुक जहाँ आपको सही मायनों में वैश्विक बिरादरी से जोड़ता है वहीं हिन्दी ब्लागिंग अब  क्षेत्रवाद और भौगोलिक दायरों  में ही घुटती  /सीमित   हो चली   है .....लगता  है जैसे हिन्दी ब्लागजगत के लिए फेसबुक /ट्विटर ने विदाई की घंटी बजा दी हो ....और अब तो यह भी लगने लगा है कि फेसबुक या ट्विटर पर आपको ज्यादा सृजनशीलता ,गुणग्राहकता और परिपक्वता का अहसास हो सकता है और हिन्दी ब्लागिंग में अधकचरेपन ,टिप्पणी मोह और कूढ़ मगजता का ही फैलाव ज्यादा हो रहा है ....वहां आप शब्दों की सीमा में रह भाषायी और अभिव्यक्ति की शक्ति को भी महसूस कर /करा सकते हैं तो आवश्यकतानुसार विचारों को विस्तार भी दे सकते हैं .....यहाँ तो अब अभिव्यक्ति के नाम पर छोटा बड़ा सब धान बाईस रूपये पसेरी होकर रह गया है ...



तो क्या हम समझें कि हिन्दी ब्लागिंग का दुर्दिन आ गया है ...यह नैया अब डूबने वाली है और इधर उधर भागने की उछल  कूद शुरू हो गयी है? ब्लॉग लेखन के बक्से से हिन्दी आप्शन भी गायब हो चला है ....कम से कम गूगल क्रोम  तो यही दर्शा रहा है.अपने वीरुभाई जो धुरंधर  ब्लॉग लेखन में लगे रहे हैं , सीधे हिन्दी में नहीं लिख पाने से खासे  मायूस हो चले   हैं ....

..तो क्या चल खुसरो घर आपनो सांझ भई इस देश की बेला आ पहुँची है ? 








41 टिप्‍पणियां:

  1. Apka avlokan bilkul sahi hai... kafi log in Social sites ka rukh kar rahe hain.... Baki sari baaten bhi vicharniy hain... ( mafi chahati hun... Hindi nahin likha pa rahi hun)

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  2. आज के रिमझिम और खुशनुमा माहौल में बड़ी रंगदार पोस्ट लिखी है आपने !
    मगर ऐसी भी क्या मासूमी ...उम्मीद न छोड़ें
    बहारें फिर भी आयेंगी ...
    शुभकामनायें !

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  3. मुझे लगता है कि, फ़ेसबुक और ट्विटर पर समय अधिक बरबाद होता है,
    और व्यैक्तिकता नहीं रहती... जो आता है कुछ पोंक कर चला जाता है,
    मैं तो भाई ब्लॉगर पर खुश हूँ... अलबत्ता यह है कि गूगल अब मुफ़्त की सेवायें समेटता जायेगा !

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  4. जो भी हो हमें तो हिंदी ब्लोग्स ही भाते हैं.

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  5. chaliye yahan ke trafik jaam se rahat milegi aur pahchaan facebook se.bahiya post

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  6. chaliye yahan ke trafik jaam se rahat milegi aur pahchaan facebook se.bahiya post

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  7. आपकी बात में दम है. इन बागों में अब बहार कम है.

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  8. अभिव्यक्ती का एक अहम् माध्यम पहले ब्लोग बना, अब शायद इससे अगले पड़ाव का वक्त आ चला हो.

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  9. औरों का मालूम नहीं लेकिन मेरा फेसबुक तो कई दिनों से deactivated है.मुझे तो दोनों अलग ही नज़र आते हैं ..ब्लॉग्गिंग का अपना चार्म है ..फेसबुक की अलग दुनिया है ..मुझे नहीं लगता कि फेसबुक से ब्लॉग्गिंग को नुक्सान हो रहा होगा.
    पहले भी इसी विषय पर एक ऐसी ही पोस्ट लिखी थी आप ने.

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  10. हाँ..फेसबुक को आने वाले गूगल प्लस से ज़रूर नुकसान होने वाला है ...उसके फीचर बहुत अच्छे हैं.

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  11. कहां-कहां दौड़े आदमी! एक पकड़ो तो दूजा छूट जाता है।

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  12. मिस्र जी , हमने तो फेसबुक जैसी वाहियात साईट को बंद कर दिया था लेकिन फिर कुछ दोस्तों के कहने पर चालू कर दिया . लेकिन यह सच है फेसबुक और ट्विटर जैसी साइट्स पर मुख्यतया युवा पीढ़ी ही सक्रिय है . और वे बेकार की बकवास में लगे रहते हैं .
    हम और आप जैसे लोगों के लिए तो ब्लोगिंग ही ठीक है जहाँ कम से कम आधे लोग तो सार्थक बात करते हैं .

    ब्लोगिंग में दिलचस्पी कम तो हुई है लेकिन यह भी समय अनुसार ही है . कोई भी अधिक समय तक अपना समय व्यर्थ नहीं कर सकता यदि वह १०-१५ घंटे रोज ब्लोग्स पर लगाता है . एक न एक दिन समझ आ ही जाता है --और भी काम हैं दुनिया में . ब्लोगिंग जिंदगी का एक हिस्सा हो सकती है , लेकिन जिंदगी नहीं .
    जब तक टिप्पणियां मिल रही हैं , तब तक समझो आपकी डिमांड है . जिस दिन मिलनी बंद हो जाएँ समझो अब कुछ और करने का समय आ गया है .

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  13. दोनों अपनी अपनी जगह सही हैं...जो चीजें वहां हैं वो यहाँ नहीं और जो यहाँ हैं वो वहाँ नहीं...

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  14. मुद्दा तो विचारणीय है ,कालांतर में सत्य भी हो ऐसा आभास तो हो ही रहा है पर ब्लॉग-परिवार ही प्यारा लगने लगा है. कही और जाने की जरुरत ही नहीं है.

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  15. गुलछर्रे उड़ाता :)
    हा हा.
    वैसे अपनी मर्जी है. जिसको जहाँ मन उडाये. पर मुझे नहीं लगता ब्लॉग को कुछ फर्क पड़ने वाला है.

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  16. अपने ब्लॉग का बगइचा छोड़ के कौन जाय ट्वीटर- फेसबुक जैसी गलियों में .....हम तो ब्लॉगर पर ही रमें रहना ठीक समझते हैं।

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  17. फेसबुक अकाउंट बंद किये हुए एक साल से ऊपर हो गया तब लगा कि अपने पास समय कम है सो आज भी :)

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  18. ब्लोगिंग एक टेस्ट मैच सरीखा है जिसमें कलात्मकता और गुण के बाद रन(कमेन्ट) मिलते हैं..
    मगर फेसबुक ट्वेंटी ट्वेंटी है बकवास खिलाडी के हिस्से में भी रन चले जाते हैं..कलात्मकता की गुनजाइस ही नहीं ..
    अभी तो फ़िलहाल मेरा इरादा ब्लॉग का ही है..आगे इश्वर की मर्जी

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  19. काश कोई साहित्य के क्षेत्र में इन्हें जोड़ने का काम भी कर दे।

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  20. सही कह रहे हैं,आज-कल गर्माहट उधर ही है.

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  21. देखि हम आ गए यहाँ...अरे भाई, किताब की बिक्री जो बढानी है ..हा हा. और अपने ही किताब का फार्मूला लम्मर १४४ इस्तेमाल करके हमने एक "आईडिया" लगा लिया है की ये पोस्ट किस बारे में है और उसके हिसाब से मेरी टिप्पणी ये है की इन दोनों में वही अंतर है जो घर के खाने और जंक फ़ूड में.

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  22. हुज़ूर हम तो वहां ट्रेलर ही दिखाने जातें हैं.फिल्म देखने तो लोग यहीं (ब्लॉग जगत ) आतें हैंफिर चाहे वह डेली देहली हो या थ्री इडियट .ट्विटर और फेसबुक यदि ब्लॉग का प्रवेश द्वार हैशीर्षक तो ब्लॉग पूरी कहानी है , जो ब्लॉग पर आने को निमंत्रित करता है .
    ब्लोगियों का विज्ञापन विभाग है ट्विटर . अच्छा विषय उठाया है .मीडिया के सारे पाए और किरदार यकसां नहीं होते .

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  23. वहाँ भी इन दिनों सन्नाटा छाया हुआ है!! अपुन वहाँ टिपियाते हैं और यहाँ छपास मिटाते हैं.. वैसे भी वहाँ से यहाँ बड़ी शान्ति है..

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  24. .
    .
    .
    चाहे सारी दुनिया चले जाये वहाँ... अपन तो उधरीच झाँकते तक नहीं... ब्लॉगर हैं और 'ब्लॉगर' पर ही बने रहेंगे... :)



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    चाहे सारी दुनिया चले जाये वहाँ... अपन तो उधरीच झाँकते तक नहीं... ब्लॉगर हैं और 'ब्लॉगर' पर ही बने रहेंगे... :)



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  26. Koee kuch bhee kare muze to blog aur blogging yaheen achchi lagati hai face book to chauraha hai jahan har tarah kee janta aati jati hai.

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  27. पहली बात तो गूगल प्लस के नाम से नयी सेवा शुरू कर रहा है , इसलिए ब्लॉग पर रोक की सम्भावना नगण्य है ...रूप और नाम में परिवर्तन जरुर हो सकता है ...
    फेसबुक ब्लॉग का मुकबला नहीं कर सकती , टू मिनिट नूडल्स पूरे भोजन का लुत्फ़ ज्यादा दिन नहीं दे सकते !

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  28. फ़ेसबुक का अपना अलग ही आनंद है, ब्लॉग एक डायरी या किताब की तरह है जिसे वही पढ़ेगा जिसे शौक या जरूरत हो । गपशप फ़ेसबुक में ही संभव है और चौराहे पर जो भी पहुंचते हैं सब दिखते हैं तो दुआ सलाम वगैरह होती रहती है चाहे उन्हें किसी विशिष्ट लेखन या विधा से कोई लेना देना हो या न हो । पर फेसबुक से ब्लॉग ख़त्म नहीं होंगे मै ऐसा मानता हूँ । शुभकामनाएँ

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  29. अरविन्द जी अच्छी बहस चल रही है .फेसबुक भारतीय राष्ट्रीय कोंग्रेस की तरह है एक प्लेटफोर्म है जिसके यात्री पल प्रति पल बदलते रहतें हैं .अलबत्ता फ़िल्मी पोस्टर्स सा आकर्षक है जहां भूले बिसरे आ मिलतें हैं बचपन के मीत से .

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  30. सुमंत मिश्र9 जुलाई 2011 को 9:04 am

    डा० मिश्र, आपकी बात ठीक है। फेसबुक अगर भटके नहीं तो ब्लाग से ज्यादा उन्नत, सरल और बहुउपयोगी माध्यम है। मित्र बनानें में यदि आप गंभीर है और अपनीं रुचि के अनुकूल ही मित्र बनाते हैं तो मुझे नहीं लगता की कोई समस्या है। ब्लागवाणी के बंद होंने के बाद, ब्लागर्स का आपसी सम्बंध बहुत सीमित रह गया है और नये ब्लागर कौन आरहे हैं यह भी ज्ञात नहीं हो पाता। मुझे लगता है कि ब्लाग की तुलना में फेसबुक ज्यादा बड़ा और सुविधाजनक मंच है।

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  31. @आशुतोष
    ब्लोगिंग एक टेस्ट मैच सरीखा है जिसमें कलात्मकता और गुण के बाद रन(कमेन्ट) मिलते हैं...

    और आपको फिक्सिंग की कला आती है तो सोने पे सुहागा...

    न जाने क्यों लगने लगा है ब्लॉगिंग का शोक-गीत लिखने का वक्त नज़दीक आता जा रहा है...

    जय हिंद...

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  32. फेस बुक और ट्विटर पर ज्यादा समय बर्बाद होता है , और जब तक ब्लोगर पर आप , मित्र प्रवीण, आदरणीय अमर कुमार जी, आदरणीय सतीश जी, आदरणीय सुज्ञ जी , आदरणीय दराल साहब जैसे ब्लोगर हों अपने जैसों को तो परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है , पढने को जो भी (क्वालिटी वाला) चाहिए मिल रहा है ..

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  33. फ़ेसबुक में समय की बरबादी है,
    कुछ भी हो ब्लॉग जिंदाबाद है।

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  34. हिन्दी में लिखने में मुश्किल जरूर आ रही है गूगल अंकल के सौजन्य से :) पर ब्लागर्स इसका भी समाधान निकाल ही ले रहे हैं ..... पढ़ने का असली आनन्द तो यहाँ पर ही आता है ,फ़ेसबुक तो समय बिताने का साधन मात्र है ....आभार !

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  35. जैसे उडी जहाज को पंछी उडी जहाज पे आवे ,ब्लोगिया कहाँ ठौर पावे ,न फेस बुक न ट्विटर भावे .अपनों में आवे ,अपनों में गावे ,ललनाओं को धावे .

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  36. मुझे लगता है कि फेसबुक और ब्लॉग की तुलना करना ही सही नहीं है. दोनों का अपना अलग स्थान है.
    मैं जब भी अंतरजाल पर सक्रिय होती हूँ तो हर जगह होती हूँ और नहीं होती तो कहीं नहीं होती. मुझे लगता है की हमारे देश की अधिकाँश जनता अभी नेट तक नहीं पहुँची है, इसलिए कुछ समय यहाँ से निकलकर आस-पड़ोस में भी नज़र डालनी चाहिए.
    मेरे ख्याल से फेसबुक और ब्लॉग में से किसे अपनाना चाहिए, ये सोचने से अधिक इस बात पर विचार करना चाहिए की अंतर्जाल की पहुँच हमारे जीवन में कितने प्रतिशत होनी चाहिए?

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  37. I think projection of thoughts from any kind of platform should be welcomed be it fb, google+ or blogger.

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