मेरे भोपाल जाने के कई युक्तियुक्त कारण रहते हैं मगर जाने की बारम्बारता फिर भी कम रहती है -मगर मैं मौके की प्रतीक्षा करता रहता हूँ-इस बार की यात्रा सुखद और दुखद कारणों के मेल से हो रही है.सुखद कारण यह कि विज्ञान संचारकों /लेखकों की बैठक में शिरकत करनी है और ठीक वैलेंटाईन के दिन ही अपनी एक चिर परिचिता मित्र के साथ सानिध्य के कुछ पल गुजारने को मिल जायेगें और एक वैलेंटाईन डिनर पार्टी की सौगात भी. दुखद कारण यह कि सुब्रमणियम साहब को धर्म पत्नी का शोक,हाँ उनसे मिलकर शोक संवेदना भी प्रगट कर सकूंगा .
लिहाजा यह कार्यक्रम बन गया है -
प्रस्थान: ३ बजे अपराह्न बनारस से कामायनी एक्सप्रेस द्वारा १३.२.११
आगमन : ७ बजे प्रातः हबीबगंज रेलवे स्टेशन,भोपाल १४.२.११
ब्रेकफास्ट एवं अवस्थान :अपनी मित्र सुश्री कंचन जैन के साथ १० बजे तक
प्रस्थान: भविष्य की दुनिया सेमिनार स्थल स्कोप कैम्पस ,आईसेक्ट ,मिसरोद
सेमिनार में सहभागिता :५ बजे सायंकाल तक ...
चिट्ठाकार पी एन सुब्रमणियन जी से मिलकर धर्मपत्नी के निधन पर शोक संवेदना :६-7 बजे
रिजर्व टाईम एवं वैलेंटाईन पार्टी : मित्र के साथ :७ से ११ बजे, तदन्तर
शयन होटल आमेर ग्रीन
१५.२. ११.
प्रस्थान इटारसी के लिए :९ बजे
इटारसी से बनारस : १२ बजे महानगरी एक्सप्रेस
कोई भूले भटके ब्लॉगर बन्धु भी इस दौरान मिल जायं तो फिर सोने में सुहागा!

भोपाल यात्रा मंगलमय हो !
प्रत्युत्तर देंहटाएंये अच्छी खबर है। मुझे भी आपसे मिलने का अवसर मिल जाएगा। :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंशुभ यात्रा
प्रत्युत्तर देंहटाएंयात्रा सुखमय हो !
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप की यात्रा मंगलमय हो।
प्रत्युत्तर देंहटाएंहम 16 को भोपाल छू रहे हैं, कोई सम्भावना?
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुखद यात्रा की शुभकामनायें ....
प्रत्युत्तर देंहटाएंबढ़िया उद्देश्य,शुभकामनायें.
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपने तो पूरा टाइम टेबल ही प्रस्तुत कर दिया. चलिए, यात्रा मंगलमय हो. सुब्रमणियम साहब की पत्नी के निधन का दुखद समाचार आपसे ही मिला. हमारी संवेदना उनके साथ है. उम्र ले इस मोड़ पर जीवनसाथी की आवश्यकता सबसे अधिक होती है और इसीलिये उसकी कमी सबसे ज्यादा खलती है.उनसे कहियेगा कि दूर सही हम उनके साथ हैं.
प्रत्युत्तर देंहटाएंश्री सुब्रमनियन से मेरी और से भी संवेदना प्रेषित करने की कृपा करें !
प्रत्युत्तर देंहटाएंसादर
.
प्रत्युत्तर देंहटाएंडॉ. अरविन्द जी, मैंने आपके कार्यक्रम पढ़, एक जगह उसमें ['भविष्य की दुनिया' में] आपकी चर्चा छात्रों के बीच होगी.
क्या आप अपने प्रश्नों में एक बात शामिल कर पूछ सकते हैं कि
"क्या अब तक हो चुकी वैज्ञानिक [इलेक्ट्रोनिक] उन्नति सार्कालिक है? चिर स्थायी है?
क्या इतनी उन्नति हमारे पिछले समय नहीं देखी होगी? क्या इस संभावना का अंदेशा भी नहीं है?"
.
भूत में सोचा भविष्य
है बना हुआ नवीन
आज़, कल नवीनता से
वह भी होगा विहीन.
.
यात्रा मंगलमय हो. सार्थक हो.
आपके दूसरे उद्देश्य में हमारी भी पूरी संवेदना आपके साथ रहेगी.
.
.
प्रत्युत्तर देंहटाएं* पढ़े
**सार्वकालिक
.
सुब्रह्मनियन जी के साथ काफी समय बीता है, ज्यादातर अच्छा, एकाध दुखद प्रसंग में भी साथ रहे. इस बीच प्रबल इच्छा के बाद भी उन तक खुद न पहुंच पाने का अफसोस है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंयात्रा मंगलमय हो !
प्रत्युत्तर देंहटाएंहमारी शुभकामनाऎं आप के लिये.
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुब्रमनियन जी को हमारी तरफ़ से भी ढाढास दे
सुब्रमनियन जी को हमारी ओर से ढाढ़स दीजियेगा !
प्रत्युत्तर देंहटाएंयात्रा की मंगलकामना..
प्रत्युत्तर देंहटाएंवैलेंटाइन दिवस के लिये प्रणय कामना...
और सब्रमनियन साहब के लिये हमारी भी सम्वेदना पहुँचाएँगे!
सेंमीनार और आपकी यात्रा सफल रहे।
प्रत्युत्तर देंहटाएंशुभकामनायें.
प्रत्युत्तर देंहटाएंकार्यक्रम का शेड्यूल बहुत अच्छा है। पहले पढ़ाई फिर शोक अंत में वैलेंटाईन पार्टी...सारी थकान दूर। निश्चय ही यात्रा सफल साबित होगी।
प्रत्युत्तर देंहटाएं...मंगल शुभकामनायें।
इस सुखद यात्रा के लिए हार्दिक शुभकामनाये
प्रत्युत्तर देंहटाएंregards
`इस बार की यात्रा सुखद और दुखद कारणों के मेल से हो रही है'
प्रत्युत्तर देंहटाएं>
>
जीवन इक नदिया है
सुख दुख दो किनारे हैं....:( :)
घर वापिसी के लिये अग्रिम बधाई। यात्रा मंगलमय हो। शुभकामनायें।
प्रत्युत्तर देंहटाएंलौटिए, फिर हाल जानेंगे भोपाल का.
प्रत्युत्तर देंहटाएंभोपाल से नागपुर ज्यादा दूर नहीं है। नागपुर से वर्धा बहुत नजदीक है। लेकिन कुछ गुंजाइश नहीं दिख रही है। खैर हमारी भी शुभकामनाएँ लीजिए। भोपाल की रिपोर्ट की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रत्युत्तर देंहटाएंमैं २१ फरवरी को दिन में तीन-चार घंटे बनारस में रहूँगा।
आपकी यात्रा सुखद एवं सफल हो.शुभकामनाये.
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपने पहले नहीं बताया, वर्ना मैं भी सुब्रमण्यम जी से मिलने चलता।
प्रत्युत्तर देंहटाएं---------
अंतरिक्ष में वैलेंटाइन डे।
अंधविश्वास:महिलाएं बदनाम क्यों हैं?
भोपाल से आकर एक अच्छी पोस्ट,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,संस्मरणात्मक
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रतीक्षा है।
"मौन मुखर है यहाँ" लेख मौन के महत्त्व पर सम्यक् प्रकाश डालता है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंमौन चिन्तन का प्रथम सोपान है।
हमें ऐसे ही विद्वत्तापूर्ण लेख की प्रतीक्षा है।
अग्रिम शुभकामनाएं....हमसे भी लेते जाएँ....
प्रत्युत्तर देंहटाएं