गुरुवार, 16 सितंबर 2010

बदनाम नहीं ,झंडू बाम लगी मुन्नी -पैसे वसूल !

अभी अभी लौटा हूँ मुन्नी बदनाम अर्रर दबंग को देखकर -धर्मपत्नी की जिद पर और कुछ अपनी क्यूरियासिटी के चलते ..मुझे आज तक नहीं पता कि पत्नी जी ने कभी भी किसी फिल्म को देखने की इतनी इच्छा दिखायी हो -मुझे भी यह लक्ष्मी --इच्छा  देखकर पता नहीं कुछ कुछ स्ट्रेंज सा लग रहा था तो आज टिकिट मंगा ही लिए मुन्नी बदनाम के दीदार के लिए ...आखिर गृह मंत्रालय की उपेक्षा की भी तो नहीं जा सकती ...मैंने जब यह खबर उन्हें सुनायी तो दोपहर के खाने की चिंता छोड़ तुरंत तैयार हो गयीं सिनेमा गृह आने के लिए ...मैंने भी आज अपना लंच मुन्नी पर कुर्बान  कर दिया -दोपहर का शो था और लंच करने का मतलब फिल्म छूटती - मुन्नी की बदनामी का चश्मदीद  बनने की ललक ने लंच छुडवा ही दिया ....वह तो हम रोज ही करते हैं ..मुन्नी बार बार कहाँ बदनाम होते दिखती है -कुछ मत पूछिए बस इसी एक गाने से फिल्मबाजों की बोलचाल में कहें तो पैसा वसूल हो गया ...मैंने शायद   पहली बार शिद्दत से महसूस किया कि आखिर पैसा वसूल होना किसे कहते हैं -पहले ऐसी शब्दावली बोलने वालों को मैं हेय  नजर से देखता था ...अनकल्चर्ड भदेस लोग - -जो ऐसा बोलते हैं- -लेकिन आज सचमुच लगा कि पैसा वसूल होने का अर्थ क्या  है -अब मुझसे भाष्य मत कराईये खुद देख आईये न ! 

 मुन्नी बदनाम ....
मुन्नी ने आते आते देर तो बहुत की मगर इंटरवल के बाद आते ही छा ही गयी - सारा हाल जो पहले से ही 'हाउस फुल' था लगा कि एक हुजूम का हिस्सा हो गया है ...फिराक ने अपनी माशूका को कहा था -वो जुलूसे जिन्दगी होके निकलती है ..सच मानिए परदे पर अचानक  ही अवतरित हुई मलाईका जूलूसे जिन्दगी ही बनकर ही जलवा फरोस हुईं -और अपने टैलेंट और मेहनत का लोहा मनवा दिया ...आम पब्लिक अपने जीवन के बिम्बों ,रोजमर्रा के लटको झटकों में ही मनोरंजन को ढूंढती है ....और इस आईटम डांस में इन सभी पहलुओं का समुच्चय  कर  निर्देशक /कोरियोग्राफर ने समाँ  बाँध दिया ...कनखियों से देखा श्रीमती जी अनिर्वचनीय आनंद  में किलक रही थीं -बरबस ही होठों पर मुस्कराहट तिर आई -पैसा सामने वसूल होता दिख रहा था .....और हाय रे तभी दबंग -सलमान खान ने मुन्नी को परे ढकेल कर कमान फिर अपने हाथों में ले लिया -जो शुरू से उन्ही की हाथ में थी -बस मुन्नी ने थोड़ी देर के लिए मानो  उनसे झपट लिया था ...अमिया से आम हुई सुनते ही मुझे सतीश भाई और किसी और की भी याद भी हो आई -क्यों ? यह जानने के लिए सतीश भाई का प्रोफाईल फुरसत में पढ़ लीजियेगा .

.... और दो दबंग 
अब देखिये हम कौनो पेड़ या पेशेवर फिल्म समीक्षक नहीं हैं बस इतना बता देते हैं  कि थोड़ी देर लाईट मूड में होने और केवल मनोरंजन के लिहाज से दबंग देख आईयेगा तो पैसे वसूल हो जायेगें ....यह पूरी फिल्म ही सलमान खान एंड फैमिली के टैलेंट प्रदर्शन का एक शो था और इसमें वे सफल हुए हैं -बाकी के कलाकार भी अच्छे हैं -हिरोईन प्रधान फिल्म न होने के कारण इसमें उसका कोई ख़ास रोल न होने के बावजूद वह सुन्दर लगती है ...अब उसका नाम क्या है मैंने ध्यान नहीं दिया -किसी ने कहा कि शत्रुघ्न सिन्हा की पुत्री है ...अरे हाँ, सोनाक्षी सिन्हा , उसमें टैलेंट तो लगा लेकिन सलमान खान को ही फिल्म फोकस करती रही .बाकी  अपने जमाने के एक से एक बड़े कलाकार इसमें दिखते हैं -अनुपम खेर ,ओमपुरी ,विनोद खन्ना,डिम्पल कपाडिया  आदि मगर लगता है जैसे उनसे हाथ जोड जोड कर  पहले ही विनती कर ली गयी हो कि भैया यह सल्लू मियाँ की फिलम है तनिक  अपना टैलेंटवा दबाकर रखियेगा ...बस विलेन की छोड़ दी जाय तो किसी भी दूसरे अभिनता को फिल्म में उभरने नहीं दिया गया है -क्योंकि शायद  यह पक्का विश्वास था कि सल्लू अकेले इसकी नैया पार लगा देगें और उन्होंने खूब जम के नाव खेई भी है -बोरियत तो फटकी ही नहीं भले ही सल्लू मियाँ की देह यष्टि और उनकी अजीब गरीब हरकतें बकवास सी (केवल मुझे ) लगती रही हों !

तो मन मसोस कर बैठे न रहिये ,जाईये दबंग और मुन्नी का बदनाम हुलिया देख आईये ...झंडू बाम की सी राहत  देती हैं मलाईका ! गाने भी अच्छे है -जुबान पर सहज ही चढ़ जाते हैं ....तेरे मस्त मस्त दो नैंन ....और एक तो बच्चों से ठिठोली करने के लिए हुड हुड  दबंग जैसा कुछ है ...पूरा एन्टरमेंट का इंतजाम है ...हाँ बौद्धिक बन के मत जाईयेगा देखने इसे -उसे हाल के बाहर ही छोड़ दीजियेगा तभी असली आनंद उठा पाईयेगा  पब्लिक के साथ ....

दबंग -
मुख्य कलाकार : सलमान खान, सोनाक्षी सिन्हा, सोनू सूद, अरबाज खान, माही गिल, विनोद खन्ना, डिंपल कपाडि़या, महेश मांजरेकर आदि।
निर्देशक : अभिनव सिंह कश्यप
तकनीकी टीम : निर्माता-अरबाज खान, मलाइका अरोरा खान, ढिल्लन मेहता, कथा-पटकथा-अभिनव सिंह कश्यप, दिलीप शुक्ला, गीत-फैज अनवर, जलीस शरवानी, ललित पंडित, संगीत-साजिद-वाजिद



39 टिप्‍पणियां:

  1. शुक्रिया मिश्र साहब इस जानकारी के लिए और मुन्नी(दबंग ) को देखने के प्रति हमारे दिलों में उत्साह जगाने का !

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  2. बस आपके देखकर आने का इंतजार था।

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  3. अच्छा तब तो मुन्नी की तो बल्ले बल्ले

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  4. आपकी बतायी पीप्ली लाइव देख कर द्रवित पोस्ट लिख गया। इसको देख क्या असर होगा।

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  5. हम तो बिलकुल नही देखेगे, चाहे मुन्नी का इस की मां भी बदनाम हो जाये हमे क्या?

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  6. ये भगवान ये आपको क्या होगया? मुन्नी शरीफ़ को मिल आते तो कोई हर्ज नाही था, अब बदनाम मुन्नी से खुद मिल आये और हम लोगन को भिजवा रहे हैं? कोनू पिटवाने विटवाने का इरादा है क्या? नही जी हम नही जायेंगे ई मुन्नी से मिलने. हम तो बिना मिले ही अच्छे.

    रामराम.

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  7. @ राज भाटिया जी,

    आप भी कैसी बाते करते हैं? पहले मुन्नी की माई बदनाम हुई होगी तब ना मुन्नी बदनाम हुई होगी?:)
    चिंता ना किजिये.

    रामराम.

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  8. मुझे तो वर्धा से नागपुर जाना पड़ेगा। इसके योग कम ही दिखते हैं। मुन्नी बदनाम के लटके-झटके तो टीवी पर ही देखने को मिल रहे हैं। पूरी फ़िल्म देखना जरूरी है क्या?

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  9. humne to bahut aze liye is film ke..aur apne UP style mein siti bhi maari..pure desi film

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  10. Arre sahi ab aapane munni ko paas kar diya hai to ham bhi dekh aaenge weekend man :)

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  11. अब आपकी इतनी दबंग रिकमेंडेशन पर मन तो करता है कि देख आएँ... दिलीप शुक्ला जी का डायलॉग सुने हुए भी बहुत दिन हो गए हैं... सुना है वो भी जबर्दस्त है!! कम्बख्त सुलेमान कि फिल्म ही अपुन को नहीं पचती!!

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  12. आपनें इतनी तारीफ़ की है तो फिर ...वैसे इसका ओरिजनल गान सह नृत्य कानपुर वाली नौटंकी में हमने भी देखा था :)

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  13. आपकी की गयी समीक्षा पढ़ कर तो लग रहा है देख ही लेना चाहिए

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  14. heheheh...sahi hai ..ajay bramhatmaj ji ki pratkriya padhi thi ki ...

    " dabang ko dekhne ka annad.....daad ko khujane par milne wale vikrit anand kee tarah hai "

    to mood thoda hata tha...:D

    ab fir man kar raha hai dekhne ka...

    kai din ho gaye sochte sohcte dekhen ki nahi dekhen...hehehe

    ab nipta hi dete hain

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  15. हम ऐसी फिल्मों पर पैसा बर्बाद नहीं करते...हाँ एक बच्चे की जिद पर पायरेटेड डी.वी.डी. लाकर कल हमने भी देखी... पैसा वसूल तो है ही फिल्म...पर, दिमाग को सोने भेजकर ही देखी जा सकती है.

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  16. अब चुलबुल पाण्डेय हैं, मुन्नी है.. तो मूवी देखनी तो पड़ेगी ...

    @ 95 प्रतिशत हिंदी फिल्मे या टीवी धारावाहिक दिमाग को एक ओर रखकर ही देखने लायक होते हैं

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  17. लगता है अब तो देखनी ही पड़ेगी.....

    regards

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  18. pahle undar kisi ko badnam hote dekhte hain.............aur phir
    .....bahar aakar sareaam public
    ko bolte hain ... ye aachi baat
    nahi bhaijee.....kam se kam bachhe
    ka to socho...

    jai ho.
    pranam.

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  19. :) आपको समीक्षा फिल्म से अधिक बेहतर लगी ...फिल्म नहीं देखनी

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  20. अच्छी तरह समझ नहीं आया यह लेख ..सर पर हाथ फिरा कर भी पढ़ा... शायद पिक्चर देखने के बाद समझ पाऊं ......
    बढ़िया है ..
    :-)

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  21. .
    .
    .
    आम पब्लिक अपने जीवन के बिम्बों ,रोजमर्रा के लटको झटकों में ही मनोरंजन को ढूंढती है ....और इस आईटम डांस में इन सभी पहलुओं का समुच्चय कर निर्देशक /कोरियोग्राफर ने समाँ बाँध दिया ...कनखियों से देखा श्रीमती जी अनिर्वचनीय आनंद में किलक रही थीं -बरबस ही होठों पर मुस्कराहट तिर आई -पैसा सामने वसूल होता दिख रहा था .....

    यकीन जानिये हम भी मुस्कुराते हुऐ ही टिपिया रहे हैं...सन्डे को जाता हूँ देखने, श्रीमती के साथ...पैसा वसूल जो करना है! ... :))

    आभार!


    ...

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  22. ाभी अपनी किस्मत मे कहांम शहर का एक मात्र सिनेमा थियेटर कई माह से तोड दिया गया है।जमीन को लेकर झगडे मे अब कोई दबंग आये तो उसे फिर से बनाये। आभार।

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  23. ` ऐसी शब्दावली बोलने वालों को मैं हेय नजर से देखता था ...अनकल्चर्ड भदेस लोग '

    भदेस होने पर बधाई :)

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  25. मैं तो पहले दिन ही देख आया था. मुन्नी पर कितने पैसे लुटाये अपने... सुना है थियेटर में बहुत सौ सौ के नोट मिले आपके आने के बाद ;)

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  26. @ हाँ बौद्धिक बन के मत जाईयेगा देखने इसे -उसे हाल के बाहर ही छोड़ दीजियेगा तभी असली आनंद उठा पाईयेगा पब्लिक के साथ .
    @मिश्र जी,
    पूरी समीक्षा सही लगी, ये लाइने बेहतरीन ढंग से पूरा हाल बयान कर रही हैं

    फाइटिंग के द्रश्य देख कर बेहद गुस्सा आया , हाँ हाँ जोश नहीं गुस्सा आया , ऐसा लगा जैसे काट काट कर चिपकाएँ हों , कैमरे की इतनी सफाई तो साउथ की फिल्मों में भी नहीं होती :))
    अद्भुद[?] दृश्य थे......... हमारे यहाँ आज भी नायक को भगवान् की तरह ट्रीट किया जाता है, उफ्फ लगता है मैं दिमाग साथ लेकर गया था ऐसी गलती बाकी लोग ना करें :) बोलो सलमान भगवान् की जय [श्रद्धा की बात है भक्तजनों :)) ]

    गाने सचमुच अच्छे हैं , फिल्माए भी अच्छे है

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  27. हमने तो एक भी नही देखी दोनो मे से पर देखें कब देखते हैं ।

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  28. दबंग देखना तो है लेकिन संजोग नहीं बन पा रहा।

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  29. मैं ज़्यादा फिल्में नहीं देखती इसलिए मुझे बिल्कुल पता नहीं इस नए फिल्म के बारे में! आपने बड़े ही सुन्दरता से प्रस्तुत किया है !

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  30. बिल्कुल सही...

    खालिस देसी बॉलीवुड फ़िलिम...

    बहुत दिनों बाद कोई ऐसी फ़िलिम देखी, गोविंदा श्टाईल की, बस यह सल्लू श्टाईल थी..

    इसके डॉयलाग भी बहुत ही दबंग हैं..

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  31. सब तो आपने दिखा दिया, अब क्या देखने जायें.

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  32. ठीक ठाक मूवी है. अच्छा मनोरजंन करती है. वैसे आप गये कहां थे -IP , JHV ya PDR ?
    IP का सब सिस्टम अब पुराना हो गया है . हम लोगो का फेवरेट तो JHV है. :) :)

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  33. '...झंडू बाम की सी राहत देती हैं मलाईका'

    जब इतना जबरदस्त अनुमोदन है, तो कोई कैसे बिना देखे रह पाएगा।

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  34. आदरणीय अरविंद जी,आपका कहना अक्षरस्यः सत्य है। किन्तु बस एक बात बताईये क्या मेरी पहचान मेरे माता-पिता से अलग है। आपने मेरे प्रश्नो का उत्तर न देकर मुझ पर दोषारोपण किया है। मेरे मित्र यकीनन मेरे माता-पिता की तस्वीर देख कर और मेरी लेखन शैली देख कर मुझे पहचान जायेंगे। जग प्रख्यात बनने का मुझे लोभ नही है। पिछले ४-५ सालों से ब्लॉगिंग की दुनियाँ में हूँ बस फ़र्क इतना सा है कि यह ब्लॉग बनाया है वह सब लिखने के लिये जो अब तक नही लिख पा रही थी। आप आये आपका धन्यवाद।

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  35. आपकी उत्कृष्ट रचनाओं की मै हमेशा प्रशंसक रही हूँ। आपने भी मेरे लेख बहुत बार पढ़े होंगे। बस इतना ही परिचय है कि एक श्रेष्ठ रचनाकार कलम की बंदिशे समझता है। आशा करती हूँ आगे भी आपका स्नेह मिलता रहेगा।

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  36. जितनी समीक्षा सुन रहे हैं,उतने ही डेराये जा रहे हैं...
    बहरहाल...धन्यवाद !!!

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