गुरुवार, 10 जून 2010

...समीरलाल जी ने किया नेहरू जी के फार्मूले में संशोधन .....!

आज कुछ भी तो ऐसा नहीं था कि यहाँ लिखा जाय .मगर तभी निगाहें पडी पर शब्द शिखर के इस ब्लॉग पोस्ट पर  जिसमें  सत्तर वर्ष में भी युवा बने रहने का नुस्खा दिया गया है .आप उस पोस्ट को पहले पढ़ लें ..फिर यहाँ आगे पढ़ें -बात नेहरू जी की है जिनसे किसी सज्जन ने पूछा कि उनके चिरयौवन का राज क्या है -नेहरू जी ने त्रिसूत्री फार्मूला गिना दिया -
१-पहला बच्चों से प्रेम करो -उनके बीच बच्चे बन जाओ !
२-प्रकृति में मन रमा लो -पेड़ -रूख  ,पशु पक्षी को निरखो परखो 
३-छोटी मोटी दुनियादारी की बातों से दूर रहो ..
 इस जीवंत तस्वीर को कुछ देर निहारिये ....
नेहरू जी से कुछ अनजान भूले जरूर हुईं मगर थे बड़े सहज सरल व्यक्ति ,उन्हें गुस्सा   तेजी से आता और उतनी  तेजी से उतर भी जाता ...हाँ अभिजात संस्कार थे उनके ..मगर अभिजात्यता कोई बुरी बात तो नहीं .....मैंने उस ब्लॉग पोस्ट पर ये टिप्पणी की -
छोटे मुंह बड़ी बात मगर सच मानिये ये तीनो बातें मुझमें हैं -अब मैं अपने लम्बे यौवंनपूर्ण जीवन के प्रति आश्वस्त हो सकता हूँ -बहुत आभार ! 
तभी मेरी निगाह ब्लॉग  युवा ह्रदय सम्राट  समीरलाल जी के कमेन्ट पर सहसा पड़ गयी -
मैं तो हमेशा से इन तीनों बातों से प्रेरित हूँ बल्कि नेहरु जी की चौथी बात से भी... :) लेडी माउन्टबेटन वाली...मजाक कर रहा हूँ.. उससे नहीं. :) बस तीन बातें. :) 

और मैंने फिर टिपियाया  ...


..और हाँ वो लेडी माउन्टबेटन वाली बात भी सही है -समीर लाल जी तनिक सकुचा गए हैं ! 

मेरा निजी  मत है कि चिर यौवन में इस चौथे नुस्खे की  भूमिका अवश्य है ..और इसके जैवरासायनिक पहलू भी हो सकते हैं ... समीर जी के अनुभव ऐसे  ही हंसी मजाक में उड़ाने लायक नहीं हैं उन्होंने बात को हल्का और सार्वजानिक शिष्टाचार का मान  रखने के लिए हंसी में  ले लिया  है मगर   नेहरू जी के चौथे फार्मूले की ओर शरारती इशारा ही नहीं किया   कुछ अपने अनिश्चय को भी इस महापंचायत के बीच जाहिर कर दिया ( :) )  ! और हाँ यहाँ लेडी माउंटबेटन से किसी  अकेली संज्ञां का अभिप्राय नहीं है वे  सर्वनाम को संबोधित कर रही हैं ..

तो मैं इसी निष्कर्ष पर पहुँचता हूँ कि चिर यौवन के लिए तीन नहीं नेहरु जी का चतुर्सूत्री  फार्मूला निश्चित ही कारगर है!   
शुक्रिया समीर जी ,इस बड़े योगदान के लिए .....ब्लॉग इतिहास आपको भी  नेहरू फार्मूले में संशोधन के लिए याद रखेगा ! मैं व्यक्तिगत रूप से .....अब इसमें कोई शक नहीं रहा  ! 

40 टिप्‍पणियां:

  1. ये नैहरू जी की ही कड़ी मेहनत का परिणाम है कि आज हर बयक्ति बयाभिचारी व नसैड़ी होने की मानसिकता का मालिक है जो थोड़े बहुत समस्याें हैं उन्हें मुंमबई में बैठे बयाभिचारी निशब्द जैसी फिल्में बनकार दूर कर रहे हैं । लगे रहिए। हम भी लगे हैं।

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  2. मुझे यही फ़ोटो एक बार इमेल में मिला था. शीर्षक था - "इसलिए अंग्रेज भारत छोड़ गए"

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  3. समीर लाल जी तो बस समीर लाल जी हैं...वैसे कम तो आप भी नहीं. बस यही कोई उन्नीस-बीस का ही फर्क होगा :)

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  4. चित्र देख कर नही लगता की एक चम्च्चे की तरह से ही ही कर रहा है यह चाचा???.....जितनी खुबिया आप ने नेहरु मै गिनवाई है यह सब मै हो सकती है बेशर्ते उन्हे भी इस की तरह से खुला पेसा मिले.... खद्दर पहनने से कोई महान नही बनता, जिन अग्रेजॊ को हमारे बुजुर्ग लाट मारते थे, उन के पीछे रह कर खुद देखे केसे ही ही .....

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  5. ज्ञानी लोगों कि बातों पर ध्यान देना चाहिए, चाहे वे मजाक में ही बोले, चौथा सूत्र ही तो मुख्य है!

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  6. न जाने क्यों , इस चित्र को देखकर मुझे कभी अच्छा नहीं लगा ।
    इसको देखकर नेहरु जी के छोटा होने का अहसास होता है , सिर्फ कद में ही नहीं , व्यवहार में भी ।
    ऐसा क्या जोक हो सकता है कि लेडी माउंटबेटन तो हंस रही हैं , लेकिन लॉर्ड नहीं ।
    इसे देखकर फिल्म सिलसिला का वो गाना याद आता है --रंग बरसे ---।

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  7. आज आप बहुत दूर की कौड़ी ले आये हैं....गड़े मुर्दे क्यों उखाडने ?

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  8. मैं आपसे सहमत हूँ मुझे लगता ही इस लेख का राजनीति अथवा किसी व्यक्तित्व से कुछ लेना देना नहीं है बल्कि एक तथ्य उजागर करना है ! चौथे नुस्खे की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है !

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  9. समीर लाल जी के आने के पहले अंग्रेज भारत छोड़ कर भाग गए थे.....आभार

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  10. संशोधित सुझावों में कुछ तो विशेषता होगी...

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  11. 'शब्द-शिखर' के बहाने ही सही, पर रोचक चर्चा..आभार !!

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  12. डॉ. दराल! मुझे चित्र में नेहरू जी की बच्चों सी निश्छलता झलकती है !

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  13. लोग बात को कहाँ से कहाँ ले जाते हैं. नेहरु जी इतने बड़े आदमी थे तो क्या उनको सहज हंसी-मजाक करने का अधिकार नहीं था...? मैं मानती हूँ कि इतनी ऊंचाई पर पहुँचकर जो सहज हास्य का साथ नहीं छोड़ता वह अत्यधिक सरल ह्रदय है, महान है...
    ये फार्मूले अच्छे हैं, बस ये सबके लिए सामान होने चाहिए... जो लोग चौथे फार्मूले को अपनाते हैं, उन्हें इतना उदार होना चाहिए कि वे अपनी सहचरी को भी इस फार्मूले को अपनाने से ना रोकें... देखती हूँ कितने पुरुष इसका समर्थन करते हैं?

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  14. मुक्ति ,मुझे कोई उज्र नहीं !
    ऐसे रूहानी रूमानी सम्बन्ध नसीब वालों के लिए ही हैं !

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  15. मेरे एक मित्र ने इस चित्र पर ये अनुमान लगाए हैं:
    (1) गान्धी जी आने वाले हैं और उनके स्वागत में प्रतीक्षा करते नेहरू और लेडी माउंटबेटेन जोक शेयर कर टाइमपास कर रहे हैं। आगे और पीछे खड़े दोनो बैंडबाजे वाले स्वागत बैंड के वाद्य यंत्रों को अगोर रहे हैं। सोच रहे हैं अब और किसकी और कैसे बजाई जाय?

    (2) नेहरू और लेडी उर्दू जोक का आनन्द ले रहे हैं । बाकी दोनों गार्डों को उर्दू नहीं आती, स्पष्ट है।

    ...वह कुछ और भी अनुमान लगाता, अगर मैंने उसे आप का नाम बताते हुए रोका नहीं होता। वह आप का फैन है :)

    कल बाउ आ रहे हैं अपने एक और कारनामे के साथ :)

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  16. Aapki bat sahee hai ;charon cheejen mahatw poorna hain. Kamalaji to rahi nahin ...............to.
    pyar to insan ki jaroorat hai hee.
    Waise chitr ko dekh kar jaise Raj Bhatiya ji kehate hain kuch waise hee lag raha hai.

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  17. बढ़िया आलेख ...................समीर भाई और आपका चौथा सूत्र ................क्या कहने !!

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  18. इस पोस्ट के लिेए साधुवाद

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  19. बहुत ही सुन्दर और शानदार आलेख! उम्दा प्रस्तुती!

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  20. रोचक वार्तालाप ...विशेषकर मुक्ति और अरविन्दजी के मध्य ...

    @ सोच रहे हैं अब और किसकी और कैसे बजाई जाय?
    और
    कल बाउ आ रहे हैं अपने एक और कारनामे के साथ :)
    दोनों वक्तव्य आपस में जुड़े हुए लग रहे हैं ...बाऊ की प्रतीक्षा रहेगी ...

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  21. चित्र देखकर लगता है कि एडविना जी ने माउन्टबेटन पर कोई कटाक्ष किया है । जब दो इतना ठहाकापूर्वक हँस रहे हों और तीसरा चुपचाप खड़ा हो तो निष्कर्ष तो यही निकलता है ।
    मजाक करते रहना चाहिये । दण्ड तो उस फोटोग्राफर को मिलना चाहिये जिसने बिना चीज़ बोले क्लिक कर दिया ।
    और ध्यान से चित्र को देखा जाये ।

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  22. @ अरविन्द जी ,
    शायद , नेहरु जी ने अत्यधिक शालीनता के साथ यह बात , प्रतीक के रूप में बच्चों को आगे रख कर कह दी है पर ...आप और समीर लाल जी जबरिया चीरहरण पर तुले हुए हैं :)

    (: हमारी टिप्पणी आपकी पोस्ट और समीर लाल जी की टीप के चीरहरण के प्रयास बतौर देखी जाये...ज्यादातर मित्र यही कर रहे हैं ...वैसे चीरहरण पर भी एक पोस्ट बनती है :)

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  23. @मैं फिर कहता हूँ जिन्हें बच्चों के बीच खिलखिलाने ,मौज मस्ती करने ,कुदरत की तमीम रंगीनियों को अपलक निहारने और सहज प्रेम -अनुराग लगाव की अनुभूति नहीं है वे नेहरू जी से बहुत दूर हैं और इस नाचीज के भी बहुत पास नहीं ....
    इस पोस्ट के भाव को उसी सब्लायिम भाव से लेने की गुजारिश है!
    अली सा यह किसी के चीरहरण का कतई प्रयास नहीं है ! और समीरलाल जी तो किसके आराध्य नहीं ?
    हाँ अब तक यहाँ उनकी चुप्पी मुझे जरूर अखर रही है !

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  24. @-वैसे चीरहरण पर भी एक पोस्ट बनती है..

    Ali ji,

    Ironically India is prospering in one sphere only and that is- "Cheer-Haran".

    Every second person is involved in some kind of 'cheer haran ', in the name of cast, religion, language, gender and so on..

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  25. @ जील
    "Every second person is involved in some kind of 'cheer haran ', in the name of cast, religion, language, gender and so on.."


    मेरा भी आशय यही है दूसरा कुछ भी नहीं !

    उत्तर देंहटाएं
  26. @-मेरा भी आशय यही है दूसरा कुछ भी नहीं !

    Ali ji,

    I understood your notion. I was impressed by your comment so couldn't resist extending it.

    I appreciate your insight.

    उत्तर देंहटाएं
  27. @ जील
    'चीरहरण' गरिमा के उल्लंघन का प्रतीक है , एक मुहावरा है जो अनर्थ के संकेत देता है ! मेरे लिए 'शब्दों की गरिमा' 'मनुष्यों की गरिमा' से एक पैसा भी कम नहीं है ! इसलिये मैं / आप / नेहरु या अरविन्द मिश्र कोई भी 'वक्तव्य' दें , उसका चीरहरण हो सकता है !

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  28. ना नौ मन तेल होगा ना राधा नाचेगी मुक्ति । कहां नेहरु जी कि शक्सियत और कहां .......... !!


    हां ग़ालिब दिल बहलाने के लिये ख्याल सभी अच्छे हैं

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  29. अपने ही उपन्यास की एक पंक्ति उद्धृत करना चाहूंगी..."इस तरह (flirting) का चरित्र हर पुरुष में विद्यमान रहता है,और मौका पाते ही अपनी झलक दिखा जाता है."...कुछ लोग extrovert होते हैं,और सबके सामने बोल जाते हैं...कुछ लोग अंतर्मुखी...पर सारे ही पुरुषों में यह गुण पाए जाते हैं. पर कोई भी पुरुष, अपनी पत्नी में यह गुण शायद ही देखना चाहे.
    वैसे इस चित्र से मुझे इतना ही आभास हुआ कि लेडी माउन्टबेटन की किसी बात पर उनके दोस्त (नेहरु) खिलखिला कर हंस रहें हैं और उनके पति माउन्टबेटन का मेल इगो पत्नी की बात नज़रंदाज़ कर रहा है.

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  30. नेहरु जी के पास बच्चों सी निश्छल हंसी थी..इसीलिए वे चचा कहलाये. इस हँसी का कोई दूसरा अर्थ हो ही नहीं सकता. काश यह हंसी सभी को नसीब हो.

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  32. इसे इतिहास में दर्ज किया जाये ।

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  33. तस्वीर में हँसते चेहरे देख कर एक शायर का शेर याद आ गया.....

    या तो दिवाना हँसे या अल्लाह जिसे तौफ़ीक़ दे
    वरना इस दुनिया में आकर मुस्कुराता कौन है...

    टिप्पणियों के कारण लेख की रोचकता और प्रभाव और बढ जाता है...

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  34. एक समय में अक्सर कई लोग एक सी बात सोचते हैं, कुछ अभिव्यक्त कर जाते हैं - कुछ संकोच।
    बात भले ही सार्वजनिक मञ्च पर हो, मगर महत्व की है इसलिए गंभीर रायशुमारी भी ज़रूरी है। इस चौथी बात की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है चिरयौवन में - मगर इसे संकुचित दायरे में न लें। कुछ ऐसी ही बात का प्रश्न रखा कुछ दिन पहले 'अदा' जी ने भी। मुझे लगता है कि अपनी बात शायद टिप्पणी में कहना ज़्यादा हो जाए, सो एक आलेख प्रस्तुत करूँगा इस पर, मगर संक्षेप में - हाँ! यह सही है।

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  35. Arvind ji,

    Many thanks for visiting my blog and for encouraging an aspiring writer.

    zeal

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