मंगलवार, 15 दिसम्बर 2009

ऐसी की तैसी उन सबकी ....ये नया नया जोश है अभी!

कभी आपने " गेट क्रैश" किया है? मतलब बिन बुलाये मेहमान बनकर शादी व्याह के मंडपों या दूसरे उत्सवों की दावतों के  तर माल पर हाथ साफ किया है? संकोच न कीजिये सच सच बता दीजिये! अब इसमें हिचक काहे की ..अपने प्रधानमंत्री की शान में  ओबामा साहब द्वारा दी गयी  पार्टी में तो  बिन बुलाये पूरे एक दम्पति ही नमूदार हो गए ! अभेद्य सुरक्षा को भी तार तार करते जा पहुंचे ओबामा साहब तक और बाकायादा हाथ वाथ मिलाया -भोज पर हाथ साफ़ किया और चलते बने! अब इतने ठाठ बाठ से और वह भी सपत्नीक जाने वाले को रोकने की हिम्मत भी कौन करे ...ये मामला तो आप पढ़ ही चुके हैं! इन दिनों शादी व्याह के मौके पर आये दिन चल रहे दावतों के दौर ने ऐसी कई यादें कुरेद डाली!

हम तो शुरू से ही एक "बे" फालतू के से आत्म गौरव के शिकार रहे और ऐसे क्षणों के लुत्फ़ और रोमांच से इसलिए  वंचित भी ! साथी संगाती ऐसे अवसरों का खूब लाभ उठाते थे और लौट कर अपने शौर्य /चौर्य और उडाये गए दावत के मीनू की चर्चा जब करते थे तो  उनके मौज मस्ती और अपने आहत स्वाभिमान से मेरी हालत पतली हो जाती थी! ऐसे शौर्य गान को सुन सुन कर  कई बार आहत आत्मसमान कृत संकल्प भी हुआ कि हम अगली ही किसी पार्टी में खुद ही जा पहुंचेगें और अपने शौर्य की परीक्षा ले ही  लेगें मगर ऐसा न हुआ और उम्र की देहारियाँ पार होती गयीं -कहते हैं न जो शौक बचपन और जवानी में पूरे न हो पाए उन्हें बुढापे में पूरा करने को कितनो का मन हुलसता रहता है! तो हम भी इक्का दुक्का ऐसे सुअवसरों का लाभ अभी अभी  बीते शादी विवाह के मौसम में उठा ही लिए और आत्म समान तेल बेचने चल पडा .... जहाँ उसे बहुत पहले ही  चला जाना चाहिए था ! मगर रुकिए अभी जरा एकाध दूसरे गेट क्रेशरों  के कुछ रोचक संस्मरण /आप बीतिओ से आपके ज्ञान कोशों को समृद्ध तो करता चलूँ!



मेरे होस्टल  साथियों में दो जन (अब नाम नहीं दे रहा ....) हैबिचुअल गेट क्रेशर हुआ करते थे! मेरे एक मित्र जो इन दिनों बड़े भारी पद पर  तैनात हैं उन दिनों एक गरीब बैकग्राउंड से होते थे और अपनी  कई दमित इच्छाओं का आउटलेट ढूँढा करते थे और बड़े बड़े जलसे उत्सवों में जाकर अपने इन्फीरियारटी काम्प्लेक्स को दुरुस्त करते थे .इसके लिए उनके रूम पार्टनर जो एक बड़े घराने से थे ने दयार्द्र होकर उनके लिए एक सूट और उस समय के एक प्रचलित टाई ब्रांड जोडियक की टाई का भी इंतजाम कर दिया था और साहबजादे अपने उस सुदामा मित्र को साथ लेकर सूटेड बूटेड होकर गेट क्रैश कर जाने में माहिर हो गए थे! एक बार एक हाई प्रोफाईल विवाहोत्सव में धर ही तो लिए गए! किस्सा   कोताह यह कि सुदामा मित्र को डांस करते बारातियों को देखकर नाचने का जज्बा हो आया -अभिजात मित्र ने बार बार रोका मगर वे तो आपे से बाहर हो उठे थे और उनके आदिम नृत्य ने कुछ ऐसा समा  बाँधा कि इम्प्रेस हुए लोग उनसे उनका नाम धाम जाति बिरादरी और गोत्र तक भी पूंछने लगे! भरी मुसीबत -आपद धर्म का मारा बिचारा दोस्त भी अब क्या करे! स्थिति संभालनी चाही! दूसरे बाराती तो आगे के अजेंडे में लग गए मगर एक मानुष अड़ गया कि आप लोग आखिर हो कौन साफ़ साफ़ बता ही दीजिये!जी मजबूत कर  एक अंतिम कोशिश की मित्र ने! "जी हम दूल्हे के खास मित्र हैं और उसी ने आग्रह से हमें बुलाया है "...फिर प्रतिप्रश्न " मगर उसके तो हर दोस्त को हम जानते हैं ,आप अपना पूरा परिचय दीजिये " ..पहली बार मित्र द्वय के पैरो तले जमीन और हाथों से दावत के पकवानों की थालियाँ फिसलती नजर आयीं ..मगर मरता क्या न करता ...एक बार और हिम्मत दिखाई और इस  बार पूरे आवेश में ,"मगर आप कौन है जो इतना पूंछ पछोर कर रहे हैं" ..."जी मैं दूल्हे का बाप हूँ "उत्तर था! अब  काटो तो खून नहीं ..माफी वाफी पर उतर आये करकट दमनक मित्र! मगर एक अप्रत्याशित बात हो गयी  -दूल्हे के बाप ने कहा ,"नहीं नहीं अब आयें हैं तो शादी निपटा के जाएँ इतने वेल मैनर्ड ,ड्रेस्ड होकर आप दोनों ने तो बारात की रौनक बढा दी है -आभारी तो हम हैं आपके ,आईये आईये खाना  वाना खा के ही जाईये! " अब अँधा क्या चाहे दो आँखे ! मित्र द्वय उस पार्टी में भी खूब जीमे!

मगर एक गेट क्रेशर का अनुभव  खुशहाल नहीं रहा! अब दिखावे का ट्रेंड कुछ ऐसा चल पड़ा है कि गमी और खुशी के अवसरों पर दिए जाने वाले भोज का अंतर भी मिटता जा रहा है! ऐसे ही मेरे नायक गेट क्रेशर थोडा जल्दी ही एक दावत में जलवा फरोश हो गए! पूरा  सज धज के! काफी देर हुई खाना सर्व होने में तो उकता के किसी से पूंछ ही बैठे कि भाई  साहब बारात में इतनी देर क्यों हो रही है! उत्तर हतप्रभ करने वाला था -कैसी बारात ..यह तो फलाने की तेरहीहै ! त्रयोदश भोज है आज ! उलटे पाँव हमारा नायक भाग निकला वहां से!

अभी  उस दिन जब मेरे लंगोटिया यार और के जी एम सी लखनऊ से एम डी डॉ राम आशीष वर्मा ने रात  नौ बजे फोन  किया कि बनारस पहुँच रहा हूँ अमुक जगह पर... शादी में फौरन पहुँचिये तो अब मैं करता ही क्या ? ड्राइवर जा चुका था, उसे बुलाना ठीक नहीं था ,इतनी रात तो  बेटे से ही गुजारिश किया कि चलो छोड़ दो भाई उत्सव स्थल तक ! वह तैयार तो हुआ मगर इस शर्त पर कि वहां खाना नहीं खायेगा -क्योंकि निमंत्रित नहीं है ! बेचारा ! मेरे बीते दिनों की याद दिला कर मुझे भी कुछ क्षण के लिए बिचारा बना गया ! हमने तो बाकायदा गेट क्रैश किया ! मगर उसने लाख मनुहार के बाद भी खाना नहीं खाया ! ये आज के लड़कों को हो क्या रहा है ? या हो सकता है कि कहने से धोबी गधे पर जो नहीं चढ़ते ! मगर मेरी तो जैसे धड़क खुल सी गयी हो -कल ही रात एक हाई प्रोफाईल दावत में जीम कर लौटा हूँ ! अन इन्वायिटेड ! अब एक मित्र ने फिर फोन किया कि वे मेरे घर के ही समीप के पांच सितारा होटल के बहू भोज में पधार रहे हैं और मुझे साथ चलना होगा ! इन दिनों अकेले ही हूँ परिवार सामाजिक  कार्यों से बाहर है -खाना तो खाना ही  था  कहीं  और इतना सुन्दर अवसर ? और गेट क्रैशिंग का नया नया रोमांच और रूमान तो जीम ही आये वहां से -हाँ, कई आखें जरूर पूंछती लगीं कि "भाई साहब आप कौन हैं ?"  मगर ऐसी की तैसी उन सबकी ....ये नया नया शौके जोश है अभी!

36 टिप्पणियाँ:

मनोज कुमार ने कहा…

रचना अच्छी लगी ।

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI ने कहा…

अरे डा. साहब ! आप तो सीधे सीधे यह बताइए कि कब आ रहे हैं किसी भोज में फतेहपुर !! चिंता नाट ...हम बिल्कुले तैयार बैठे हैं !!

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI ने कहा…

अरे डा. साहब ! आप तो सीधे सीधे यह बताइए कि कब आ रहे हैं किसी भोज में फतेहपुर !! चिंता नाट ...हम बिल्कुले तैयार बैठे हैं !!

Arvind Mishra ने कहा…

मास्साब यी धमका रहे हैं यां आमंत्रित कर रहे हैं -हम भेष बदल के आयेगें ! अब रिस्क लेने की उम्र नहीं रही!

seema gupta ने कहा…

हा हा हा हा हा हा गेट क्रैशिंग के किस्से रोचक लगे......

regards

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI ने कहा…

अरे नहीं डा. साहब !
हम तो आपके सहारे अपना भी जुगाड़ भोज का इन्तेजाम करने की सोच रहे थे !!!

Arvind Mishra ने कहा…

@हा हां तब तो चलेगा -एक से भले दो -डन डाना डन ..पक्का !

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बेहद रोचक संस्मरण है. और दो से भले तीन भी हो सकते हैं. हमारा भी नाम लिख लिजिये.:)

रामराम.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

ये आज के लड़कों को हो क्या रहा है?
जहां तक मैं समझता हूँ, गेट क्रैशेर्स पहले के लड़कों में भी अपवाद ही हुआ करते थे.

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

अदभुत ! मैं तो आपके इन किस्सों में आनन्द इसलिये पाता हूँ कि इनको प्रस्तुत करने का अंदाज विलक्षण है । बहुत कुछ सीखा जा सकता है इस प्रस्तुति के अंदाज से । हास्य-बोध का तो कहना ही क्या !

हाँ, इस तरह अ-निमंत्रित भोजनादि के कार्यक्रमों में हिस्सा लेना गेट-क्रैश कहलाता है, यह भी नहीं जानता था । कभी किया नहीं न ! -शायद इसीलिये ।

ललित शर्मा ने कहा…

बहुत बढिया। ऐसा भी होता है। सुंदर रचना-आभार

खुशदीप सहगल ने कहा…

डॉक्टर साहब,

उन घूरती आंखों को बस इस गाने से जवाब दे देते...अरे दीवानों, मुझे पहचानो, मैं हूं कौन, मैं हूं कौन, मैं हूं मैं हूं कौन...डॉन, डॉन, डॉन...

जय हिंद...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

आपने बीते दिनों की याद दिला दी, गर्लफ्रैंड के चक्कर में एक बार हम भी बिन बुलाए दावज उड़ा चुके हैं। शुक्रिया ये है कि पकड़े नहीं गये थे, वर्ना आपको बताने की हिम्मत न जुटा पाते।
------------------
छोटी सी गल्ती, जो बड़े-बड़े ब्लॉगर करते हैं।
धरती का हर बाशिंदा महफ़ूज़ रहे, खुशहाल रहे।

Ghost Buster ने कहा…

ये अनुभव ले चुके हैं एक बार, कॉलेज के अंतिम वर्ष में. बड़ा रोमांचक रहा था. न बरातियों ने समझा, न घ्ररातियों ने जाना पर कुछ अन्य आमंत्रित मेहमान जान-पहचान वाले निकल आये. उनसे कतराते रहे कि कहीं पूछ न बैठें आपका क्या परिचय है इन लोगों से?

याद दिला दिया आपने. बहुत मस्त लिखा है.

अजय कुमार झा ने कहा…

अरे बाह ...जे बात . बचपन में एक बार एक ठो हिम्मतिया कराया था हमको भी ...उसके बाद अपने दम पर तो कभियो नहीं किये ..अब जब सबका पिरोगराम बनिए रहा है तो चले चलेंगे कि कम से कम पकडाने पर लगे तो सही कि ...आदमी इकल्ला नहीं पूरी गैंग के साथ है ...चले चलिए ..गेट क्रैशिंग के लिए ..

अभिषेक ओझा ने कहा…

शादी के सीजन में ही आता हूँ आपके यहाँ :)

ज्ञानदत्त G.D. Pandey ने कहा…

वाह!
बाकी हम क्या कहें, हम तो अपनी शादी में इस लिये गये थे कि उसके बिना हो न पाती! :)

उन्मुक्त ने कहा…

मेरे विचार से आपके मित्र को आपके लिये भी एक निमत्रण भिजवा देना चाहिये।

shikha varshney ने कहा…

हा हा हा मजेदार संस्मरण

डॉ टी एस दराल ने कहा…

मजेदार किस्से।
ऐसा भी होता है।

बी एस पाबला ने कहा…

रोचक किस्से

बी एस पाबला

arun prakash ने कहा…

बडे मासुमियत से बचपन न ना जवानी मे किये भूल को याद कर कन्फ़ेशन कर रहे है अच्छ है याद कर गुनाहो से तौबा कर ली है तथा उम्र मे रिस्क का खतरा ना उठाने की बात कह कर शरीफ़ भी बने रहने की उम्मीद बनाये रखी लेकिन भला है पुत्र का जो पिता के बताये व दिखाये रास्ते पर नही चलता बेटे को साधुवाद कि वह आप के बहकावे मे नही आया
आशा है कुछ और अनुभव भी साझा करेगे

cmpershad ने कहा…

हम तो बेफ़ालतू भये... अरे जहां इंवाइटेड हैं, वहीं नहीं जा पा रहे हैं तो........:)

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

घर से दूर होस्टल में रहने वाले हम जैसे लोगों के पास भी ऐसे किस्से
कई है परन्तु '' तेरही'' के चक्कर में फंसने वाला वाकया नहीं घटित हुआ
था | ...... बहुत कुछ याद आ रहा है ..
बच्चा अभी नकार रहा है लेंकिल आप जैसी प्रौढ़ता आने पर '' स्वीकार का
साहस '' भी बढ़ता जायेगा :) :):)

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

ऐसी चर्चाएं तो मैने भी सुन रखी थी लेकिन कभी ऐसा अवसर नहीं मिला कि खुद भी आजमा सकूँ।

आपका आँखों देखा हाल पढ़कर अब यकीन हो गया कि हॉस्टेल में लड़के जो कहानियाँ अगले दिन सुबह चटकारें लेकर सुनाते थे वे सच्ची ही होती थीं।

Udan Tashtari ने कहा…

हा हा!! रोचक किस्सा.. :)

mukti ने कहा…

ऐसे किस्से तो हमने फ़िल्मों में देखे थे. इसे गेट क्रैशिंग कहते हैं ये आज पता चला. आपका यह संस्मरण बहुत अच्छा लगा. एकदम हल्का-फुल्का. जी प्रसन्न हो गया इसे पढ़कर.

गिरिजेश राव ने कहा…

........घर से बहुत दूर है ढाबा
चलो कोई शामियाना आजमाया जाय।

भैया, ये हिम्मत हम आज तक नहीं कर पाए। आगे भी नहीं कर पाएँगे। बड़े प्लेन कायर से आदमी हैं हम!

आप की हिम्मत को प्रणाम। कुछ ऊँच नीच हो गई तो उसकी भी कहानी बताइएगा।

Arvind Mishra ने कहा…

@उंच नीच की कहानियाँ कहाँ लिखी जाती हैं गिरिजेश जी कहानियां तो केवल ऊँट की होती हैं!चीटियों को तो कोई सुमित्रानंदन पन्त या तुलसी ही देखता है -

Zeashan Zaidi ने कहा…

बचपन में तो हम भी कई प्लेटें पार कर के लाये हैं ज़र्दे की.

Vidhu ने कहा…

आपने एक रोचक किस्सा लिखा है कुछ नई जानकारियों के साथ ...में तो डॉ सुषमा नेथानी की कविता पर आपकी एक टिप्पणी पढ़कर आगई ...आपने वहां जो लिखा में उससे सहमत हूँ

'अदा' ने कहा…

हा हा हा हा ....
मुझे याद है मेरे छोटे चाचा और उसके दोस्त किया करते थे....
आप भी न डाक्टर साहब इस उम्र में ज़रा बच के रहिगा ...इतना रिस्क लेना ठीक नहीं है....
रोचक संस्मरण ....

गौतम राजरिशी ने कहा…

ह!हा!!
जितनी रोचक घटनायें उतना ही दिलचसो वर्णन भी...

Arvind K.Pandey ने कहा…

@Dearest Mishraji

You have referred to the gatecrashing episodes.Like to inform you that White House social secretary Desiree Rogers has paid a heavy price for this episode.Have a look at the news item :

http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2010/02/26/AR2010022603734.html?hpid=topnews


I am wondering what would have happened had this episode taken place in India ? Nothing other than allegations and counter- allegations !!

Anyway,I hope you will think twice before using this episode to sharpen your newfound gatecrashing tendencies :-))

http://indowaves.instablogs.com/


Yours sincerely,
Arvind K.Pandey

Arvind Mishra ने कहा…

Thanks for the alert Arvind!

M VERMA ने कहा…

....ये नया नया शौके जोश है अभी!
नया शौके जोश कायम रहे. कभी अवसर मिलेगा तो हम भी यह शौक आजमायेंगे. और अगर उल्टा पड़ा तो आपका नाम ले लेंगे ---

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