शनिवार, 29 सितंबर 2012

अथातो लंगोट जिज्ञासा!


पहली बार इस  लंगोट पोस्ट को फीड ने लिया ही नहीं -पडी रही है, फिर ट्राई करके देखता हूँ! 

नैतिक चेतावनी:यह एक निहायत फालतू और दिमागी फितूर की पोस्ट है, समय जाया करना हो तभी पढ़ें!
दीवानों मस्तानों की फरमाईश कि चड्ढी चर्चा पार्ट टू भी लिखी जाय.मैंने भी हंसी हंसी में हामी भर दी थी ..सोचा कभी लिख भी दी जायेगी .जब इतना प्रेम मनुहार से कहा जा रहा है तो ..फिर सोचा कि इन दिनों चूंकि तामस भाव का प्राबल्य है तो यह चर्चा भी निपटा ही ला जाय ..क्या पता कब मन सात्विक राजस हो उठे और यह चर्चा धरी की धरी रह जाय ..अब मूड का भी क्या भरोसा.पचपन में बचपन की अठखेलियाँ खेलने लगता है नालायक. अपने संतोष त्रिवेदी जी हैं न लंगोट के पड़े पक्के हैं.उन्होंने पिछली पोस्ट पर इस दिव्य परिधान का महात्म्य छेड़ ही तो दिया-अब यह उनका प्रधान वस्त्र रहा है तो जाहिर है  जिसका जो भी प्रधान होता है वह उसी को बार बार दिखाता फिरता है.जबकि मैंने कई ज्ञात और ओबियस कारणों से पिछली पोस्ट में लंगोट की चर्चा मुल्तवी कर दी थी.मगर संतोष जी की लंगोट निष्ठा से प्रभावित हुए बिना न रह पाए थे .

उपर्युक्त लिंकित पोस्ट पर आप लंगोट के साक्षात दर्शन भी कर सकते हैं!बचपन से ही मैंने लंगोट को चड्ढी का जोडीदार देखा समझा मगर पहना नहीं.चड्ढी जहाँ कम उम्र तक ही अनुमन्य थी लंगोट बड़े बच्चों - किशोरों का स्वीकृत परिधान था.अन्तःवस्त्र की श्रेणी में होने के बाद भी इनका खुला प्रदर्शन एक शगल था मानों यह वह तत्कालीन टैग लाईन थी जो लोगों को प्रगटतः खुद के यानी पहनने वाले के निरापद चरित्र के बारे में आश्वस्त करती थी .. पहलवानों का तो यह एक विशिष्ट अंग वस्त्रं था ही और निश्चित ही नियंत्रित मर्दानगी के प्रदर्शन से जुड़ा था..मगर मुझे लंगोटधारियों का परोक्ष व्यवहार उनके प्रत्यक्ष आचरण से हमेशा चुगली खाते दिखा.लम्बी लंगोट और फिर उसका लाल रंग..मतलब डबल अलंकारिक विज्ञापन..राग दरबारी के कैरेक्टर पहलवान भी लंगोट प्रेमी है जो छत पर लंगोट अभ्यास में पकडे गए थे.मैंने आज तक जो लंगोटें देखीं सभी लाल रंग की ही रही हैं ..

पता नहीं लंगोट का लाल रंग से क्या रिश्ता है? शायद ब्रह्मचर्य का रंग ,निषेध का रंग लाल है इसलिए ही लंगोट भी लाल.लाल रंग से मेरी विरक्ति बचपन से ही इसी लंगोट के चलते शरू हुयी थी.उन्ही दिनों मास्टर साहब कक्षा सात में संस्कृत व्याकरण पढ़ाते हुए लंग लकार पढ़ाते थे और मुझे बरबस लंगोट की याद आ जाती थी ..अजब सा असहजता वाला संयोग आ जुड़ा था यह.पहनी हुयी लंगोट ,शरीर के एक सहज अंग को बुरी तरह कम्प्रेस करती हुयी लंगोट और सूखने के लिए छोडी गयी हवा में लहराती लंगोट..हर ओर बस लंगोट ही लंगोट. और कई लंगोट पहने लोगों की आपसी गहन यारी दोस्ती..गजब का जमाना था वह.मुझे इस परिधान से न जाने क्यों शायद इंस्टीनक्टइव विरक्ति थी इसलिए आह मैं कभी भी किसी का लंगोटिया यार नहीं बन पाया,वैसे कभी कभार कुछ पुराने साथी संगी मिलते ही जब कहते हैं कि यार हम तो कभी लंगोटिया यार हुआ करते थे तो मैं असहज हो उठता हूँ.
कभी लंगोट पहनी ही नहीं तब कैसे हुए लंगोटिया यार?बहरहाल एक बार एक लंगोटिया बाबा का गाँव में आगमन हुआ ..जैसा कि उन दिनों की कस्टमरी थी -बाबा की बड़ी आवाभगत हुयी और वे गाँव में ही ठहर गए ...बचपनकी यादें आश्चर्यजनक रूप से ताजा बनी हुयी हैं -एक दिन बड़ा कोलाहल हुआ.घर के बड़े बुजुर्ग बच्चों को उस कोलाहल से दूर कर रहे थे.किस्सा कोताह यह था कि बाबाकी लंगोट ढीली होने की शिकायत कुछ किशोरवयी लड़कों ने कर दी थी और बाबा फरार थे.उनकी लंगोट नीम की एक निचली टहनी पर लहराती उनकी याद लोगों को अब भी दिला रही थी.एक सज्जन ने इतने बड़े काण्ड के बाद भी उसे बाबा की यादगार मान सरमाथे लगाया.भागते भूत की लंगोट ही सही.
उन्हें पहलवानी का शौक भी था तो अगली बार के पचईयां(स्थानीय त्यौहार) के अखाड़े में वे वही लंगोट पहन के उतरे मगर प्रतिद्वंद्वी पहलवान के पहले दावं में ही चित्त हो गए.मैं भी उस मुठभेड़ का चश्मदीद बना था..कुछ बड़े बूढ़े ज्ञानी लोगों ने उन्हें लाख समझाया कि वह लंगोट उन्हें सही नहीं ( अनुकूल नहीं हुयी ) इसलिए उसका त्याग करना ही श्रेयस्कर होगा..मगर वे माने नहीं और बार बार हारते रहे कुश्तियों में. जीते तभी जब लंगोट बदली ...क्या पता बाबा की लंगोट के ढीली होने का ही असर रहा हो यह :) एक अभिशप्त लंगोट .....
मानव अंग विशेष,लंगोट और सांप इन सभी के आचार व्यवहार में साम्य है-अचानक फैलना सिकुड़ना इन सब में कामन है ..जाहिर है ऐसी गतिविधि भयोत्पादक भी है..यह जरुर कोई आदि (वासी) परिधान रहा होगा जो वस्तुतः एकलिंग -प्रतीक रहा होगा.आदिम अनुष्ठानों में संयोग,जोड़ी चयन की अभिलाषा प्रगट करने की एक प्रतीक पाताका! मगर कालांतर में किन्ही अज्ञात आश्चर्यजनक कारणों से इसे लिंग गतिविधियों का शमनकारी वस्त्र मान लिया गया .. जो भारतीय मनीषा की एक बड़ी चूक लगती है .और यही कारण है कि कई पीढियां लंगोट-ब्रह्मचर्य से जोड़कर किये गए प्रयोग परीक्षणों में बुरी तरह असफल होने के बाद भी संकोचवश असलियत को दीगर मानवता के सामने जाहिर नहीं कर पायीं .गांधी जीने जरुर कुछ साहस दिखाया और अपनी असफलता स्वीकारी -जाहिर है अपने ब्रह्मचर्य के प्रयोगों में उन्होंने भी लंगोट उपकरण का प्रयोग किया ही होगा -मगर अपनी असफलता की ईमानदार स्वीकारोक्ति की .जबकि आपको आज भी कई ऐसे नर पुंगव मिल जायेगें जो लंगोट का महात्म्य बघारते नहीं अघायेगें.इनसे दूर रहिये..हाँ पहलवानों के लिए यह कसा हुआ परिधान उनकी सुविधा के हिसाब से और प्रतिद्वंद्वी की परिधान-पकड़ कमजोर बनने के लिए मुफीद है ..मगर ब्रह्मचर्य के लिए न बाबा न .... 


लगता है इस पोस्ट की भी लंगोट सीमा अब लंघ उठी है इसलिए इस लंगोट महात्म्य पर अभी तो विराम ..फिर कभी कुछ नए लंगोट तथ्य आपसे साझा किये जायेगें! एक लंगोट -यात्रा संस्मरण यहाँ भी

25 टिप्‍पणियां:

  1. भागते भूत की लंगोट वाली कहावत लगता है, ऐसी ही किसी घटना से निकली होगी.

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  2. ....वैसे प्यार का रंग भी लाल होता है,बाकी बाद में तफ़सील से....।

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    1. ...ई लंगोट का काम बड़ा विचित्र है गुरू जी! हम तो बचपन में थोड़े बखत लंगोटधारी रहे,इससे अड़ोस-पड़ोस में धमकी रहती थी और अपना मन भी विचलित नहीं होता था.
      .
      .
      .लंगोट के पक्के बाबा और लंगोटिया यार इस कलिकाल में दुर्लभ हैं !

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  3. हमने भी एक बार लाल लंगोट बांधा था जब स्कूल में कबड्डी की टीम में चुन लिए गए थे .
    लेकिन सच मानिये , कुछ काम न आया . हमारी टीम बुरी तरह हारी . :)

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  4. लंगोट बाँधने से क्या होता है लंगोट का पक्का होना जरूरी है,,,,,

    RECENT POST : गीत,

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  5. ...पहली बार आपकी लंगोट सॉरी फीड गायब हुई थी और साथ ही आपका ब्लॉग भी ! यह विषय इतना संवेदनशील और रहस्यमयी है कि बड़े-बड़े विद्वान इससे दूर भागते हैं.
    लंगोट का पक्का होना सीधे-सीधे ब्रह्मचर्य की निशानी मानी जाती है.हाँ,ये लाल कपड़ा ज़रूर भावों पर कुछ प्रतिरोध करता है,पर आज की पीढ़ी न संबंधों में और न क्रिया-कलाप में कोई अवरोध या प्रतिरोध पसंद करती है.इसलिए अब पुराने पक्के लंगोटीबाज भी अपने को कहाँ तक दबाएंगे?

    ...आज के समय में न लंगोट मिलते हैं और न लंगोटिया यार !

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. लाल लंगोट वाली बात हनुमान जी और ब्रह्मचर्य तक ही सीमित है। पहलवान भी अब लाल लंगोट नहीं पहनते। पहलवानी के लिए, तैराकी के लिए, मलखम्भ के लिए इससे अच्छा परिधान तो कुछ हो ही नहीं सकता। लगता है आप न अखाड़े में उतरे, न तैराकी करी, न मलखम्भ पर हाथ आजमाये। इसीलिए इसके प्रतिद्वंदी बने हुए हैं। चढ्ढी पहनकर कुश्ती लड़ेंगे तो विपक्षी पहलवान नंगा करके भगा देगा। लंगोट तो प्राचीनतम अंग वस्त्र है। साधूओं के लिए भी, ब्राह्मणों के लिए भी और पहलवानो के लिए भी मुफीद।

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  8. हास परिहास के साथ लिखी पोस्ट सुखद अनुभव

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  9. सही शब्द 'लिंग-ओट' अर्थात जिसकी ओट में लिंग रहे |

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  10. ये लंगोट फीड कैसे लेती हैं अगली पोस्ट इस पर लिखे

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  11. :) :)

    काफी विस्तृत विवेचन कर दिया आपने तो :)

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  12. .
    .
    .
    पोस्ट पर बाद में बात करेंगे... अभी तो यह ब्लॉगर टैम्पलेट जो आप लगाये हैं... इसमें ब्लॉग खोलने पर गरारियाँ घूमती रहती हैं, सात अलग अलग तरीकों से ब्लॉग देख सकते हैं... पर सभी में पोस्ट पढ़ना, फिर टीप पढ़ना और टीप करना खासा कष्टदायी है... पहले जैसा ही सादा परंतु सुविधाजनक टैम्पलेट नहीं हो सकता क्या...


    ...

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  13. 'अपने संतोष त्रिवेदी जी हैं न लंगोट के पड़े पक्के हैं'

    'पड़े पक्के' शब्द-संयोजन पहली बार देखा, मस्त लगा|

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  14. @प्रवीण शाह जी,
    फ़रियाद सुन ली गयी माई बाप! अब आपकी बारी है!

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  15. .
    .
    .
    १- सुना है कि कुछ पुराने शब्दकोषों में Neck Tie का अर्थ 'कंठ लंगोट' दिया जाता था।
    २- अपनी अखाड़े की कुश्ती के दौरान आबरू सलामत रखने के लिये मुफीद परिधान है यह।
    ३- वैसे हमारे Testes हमारे Abdomen के बाहर एक खास थैली यानी Scrotum में इसलिये लटकते रहते हैं क्योंकि शरीर का अधिक तापमान होना शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को बाधित करता है... ज्वर आदि की स्थिति में इसीलिये Scrotum लटक सा जाता है... इसलिये स्वास्थ्य की दॄष्टि से लंगोट या कोई अन्य भी कसा हुआ अधोवस्त्र चौबीसों घंटे पहनना सही नहीं...


    ...

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  16. (:(:(:

    apne mat'sahab aur aapke shishyaji ke tip no. 2 bare mufid lage....hamre taraf se bhi man lijiyega.........


    (:(:


    pranam.

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  17. ये Michelle jackson पुरुष नहीं हैं महिला हैं और दिवंगत माइकल जेक्सन साहब तो कुल १०६ पोंड के रहें होंगे छहरहरी काया वाले .

    भाई साहब !स्पैम बोक्स चेक किया कीजिए .ये लंगोट (लिंग की ओट लेके वार हमने दूसरी बार किया है )टिपण्णी स्पैम बोक्स में जा रहीं हैं यह तो गनीमत है ड्राफ्ट बकाया था ,हमने दोबारा पोस्ट कर दी अपनी टिपण्णी वरना गई थी बट्टे खाते में .

    आजकल पूर्ण समर्पण का अर्थ है नत शिश्न होना नत मस्तक होना नहीं हैं .अंडकोष को बाकी शरीर से कम तापमान पर ड्राइवर आदि नहीं रख पातें हैं खासकर लोकोमोटिव इंजीनियर्स .धमन भट्टी के सामने काम करने वाली आदि , ऐसे में स्पर्म काउंट भी कम हो सकता है .वैसे लंगोट ORCHITIS से बचाव का ज़रिया भी है .

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  18. पता नहीं लंगोट का लाल रंग से क्या रिश्ता है

    Red is the color of south or fire and fame .Red turns up the energy level on every thing it touches.and it animates the inanimate

    पहनने दीजिए स्टंट मैन बोले तो अक्षय कुमार को किसी फिल्म में लाल लंगोट फिर देखिए इसका महातम्य .

    इसे पहने पहने ही हनुमान संजीवनी पहाड़ उठा लाये थे .



    राष्ट्रीय झंडों में यह रंग बराबर अपनी दस्तक बनाए हुए है .तमाम ख्यात ईट्रीज़ में भी .पिज़ा हट अमरीका में गहरे लाल से पुती हुईं हैं .

    प्रतीकात्मक रंग है लाल फिर चाहे वह शादी के जोड़े का रंग हो या सिन्दूर का माथे की बिंदिया का हो या चोली का .इसके नीचे हम जा नहीं सकते .यह हमारी भौतिक सीमा है .नैतिक भी .

    किसी चीज़ के महत्व को उजागर करता है लाल रंग चाहे वह फेंग सुई हो या कुछ और .

    हमारी जीवन ऊर्जा खून का रंग भी लाल है .(बा -शर्ते यह पानी न हुआ हो ....)

    भूख बढाता है लाल रंग .

    इसीलिए डाइनिंगरूम्स का रंग लाल रखा जाता है .

    संकेतार्थों में लाल रंग ऊर्जा का ही प्रतीक और द्योतक है भले यह सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही अर्थ छटाएं लिए हुए है .

    जोकी भी भैंसे को लाल झंडी दिखाके ही उत्तेजित करता है .

    और पहले तो भाई साहब यह लाल रंग सुहागरात पे पवित्रता का प्रतीक भी माना जाता था .भले एक दम से अ -वैज्ञानिक बात थी यह क्योंकि हाईमन कितनी ही मर्तबा उछल कूद करते साइकिल चलाते ,तैराकी के दौरान स्वत :ही फट जाती है .

    That is why even in most tranquil rooms a touch of red is all it takes to keep a room from sliding off into a coma.

    वैसे काल शेष नहीं हुआ है लंगोट .तमाम खिलाड़ी आज भी "supporter " पहने रहतें हैं .अंडरवीयर के विज्ञापन में इसके नीचे हीरो यही "सपोर्टर "पहने रहता है .लेकिन लंगोट को पुरुष असेट्स के रूप में मान्यता नहीं मिली है ."bust"की तरह स्त्री -वक्ष स्थल की तरह .

    चुस्त दिखने रहने के लिए "orchitis"अंडकोशों के संक्रमण और सूजन से बचाव के लिए सपोर्टर बोले तो लंगोट पहनिए .लाल रंग का ही पहनिए .

    एक प्रतिक्रया :
    SEP
    29
    अथातो लंगोट जिज्ञासा!

    पहली बार इस लंगोट पोस्ट को फीड ने लिया ही नहीं -पडी रही है, फिर ट्राई करके देखता हूँ!

    http://mishraarvind.blogspot.com/
    यह प्रतिक्रया FB पर भी मौजूद है .उसी तारीख में जिसमें पहली मर्तबा पोस्ट की गई थी .

    हमारी भी जिद है तू डाल डाल मैं पात पात .अपने डॉ .अरविन्द मिश्र जी का स्पैम बोक्स डायनासौर बना हुआ इस टिपण्णी को जब दस बार लील चुका तब हार मानके हमने यह एक्सट्रीम कदम उठाया है .

    सभी ब्लोगर बंधुओं बह्नाओं से अनुरोध है इस्पैम बोक्स को नियमित खाली करें .ये संक्रमण बहुत तेजीसे फ़ैल रहा है .

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  19. आने वाली पीढ़ी ' लंगोट ' को सर्च करेगी तो आपके इस पोस्ट द्वारा उन्हें अच्छी जानकारी मिलेगी. नहीं तो विलुप्त प्रजाति की कतार में इसे खड़ा कर ही दिया गया है.

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यदि आपको लगता है कि आपको इस पोस्ट पर कुछ कहना है तो बहुमूल्य विचारों से अवश्य अवगत कराएं-आपकी प्रतिक्रिया का सदैव स्वागत है !

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