शनिवार, 17 जनवरी 2009

एक सम्मानित और सयंमित चिट्ठाकार रंजना (रंजू ) भाटिया

अभी तक जिन चन्द चिट्ठाकारों के व्यक्ति चित्र मैंने यहाँ उकेरा है उनमे कोई महिला ब्लॉगर नही है -अब कहीं पंच लोग मुझ पर नारी द्वेषी (मीसोजिनिस्ट ) होने की तोहमत न मढ़ने लगें तो यह सर्वथा उचित ही है कि मैं फिलवक्त एक महिला ब्लॉगर को इस पुनीत कर्म के लिए चुन लूँ -पर किसे ? मेरी यह उधेड़बुन कई दिनों से "कस्मै देवाय (बल्कि देवियाय ) हविषा विधेम " की तर्ज पर मुझे सताती रही है पर आज इस ब्रह्म मूहूर्त में फैसला हो ही गया -वे और कोई नही बल्कि रंजना भाटिया उर्फ़ रंजू भाटिया ही हो सकती हैं -वह पहली महिला ब्लॉगर मैं जिनके व्यक्ति चित्र को यहाँ उकेरने का स्वयं प्रदत्त सौभाग्य हासिल कर रहा हूँ .पर पहले रंजना भाटिया ही क्यों ?

जी हाँ ,रंजना भाटिया ही क्यों ? मैं जानता हूँ कि कई नियमित चिट्ठाकार इस प्रश्न पर ही प्रतिप्रश्न कर बैठेंगे कि आख़िर रंजना भाटिया क्यों नहीं ? और उनका प्रतिप्रश्न सचमुच सर्वथा उचित ही होगा ! रंजना भाटिया जो अपने को रंजू के उपनाम से संबोधित होना ज्यादा पसंद करती हैं एक नियमित और सम्मानित ब्लॉगर की हैसियत काफी पहले ही हासिल कर चुकी हैं -उन्होंने कुश के साथ काफी भी पी है और बकलम ख़ुद की भी एक प्रमुख हस्ताक्षर हैं .तो ऐसे किसी नामी गिरामी चिट्ठाकार को चयन करने का कोई खतरा भी नही है और मेरे कई कल्पनाशील ब्लॉगर मित्रों को कोई ऐसा वैसा कयास लगाने का मौका भी नहीं मिलेगा । और आगे दीगर महिला ब्लागरों की चर्चा का मार्ग भी सहज ही प्रशस्त हो जाएगा । कुछ लोगों का जीवन हमेशा दूसरों के लिए ही होता है -परमारथ के कारने साधुन धरा शरीर .....यह कुदरत का पता नही कैसा परिहास है -अब देखिये न रंजू जी मेरी पहली चिट्ठाकार चर्चा महिला ब्लॉगर बन कर मेरे लिए आगे की महिला ब्लॉगर चर्चा की ढालभी बन गयी हैं । सारी रंजू जी !

मैंने लंबे समय से रंजू भाटिया की मर्यादित और सयंमित उपस्थिति ब्लाग जगत में देखी है -शायद वे अकेली महिला ब्लॉगर हैं जिन्होंने बिना किसी प्रायोजित मकसद के अपनी साहित्य साधना को यहाँ आभासी जगत में भी बनाए रखा है -यह उनकी कालजयिता को लेकर आश्वस्त करता है -वे एक अच्छी पाठक भी हैं -अब व्यापक विषय वैविध्य लिए इस चिट्ठाजगत में उनकी टिप्पणी -उपस्थिति यत्र तत्र सर्वत्र दिखती रहती हैं .हालांकि वे जिस विधा की समर्पित सर्जनाकार हैं -प्लूटानिक प्रेम ,वह मेरे भेजे में ज्यादा नही घुसता पर यह कमी मेरी है! अब लंबे समय से विज्ञान की साधना में रत रहे किसी अदने से व्यक्ति को प्रेम की उचाईयों की परख भी कैसे हो सकती है ? वस्तुनिष्ठता के बोझ से सदैव आक्रान्त व्यक्ति विषयनिष्ठता में गहरे डूब भी कैसे सकता है .कहीं डूब गया और ऊपर नहीं आ सका तो ?

रंजू जी अमृता प्रीतम की फैन रही हैं बल्कि मुझे तो कभी कभी लगता है वे अमृता की ही कोई कुम्भ मेले की बिछुड़ी जुड़वा बहन ही है -उनकी साक्षात यशः काया हैं, उनकी साहित्यिक विरासत की ही पुंजीभूत मलिका हैं ! प्रेम की रूहानी ऊँचाईयों तक पहुँच कर क्षण प्रतिक्षण उसी के वशीभूत हो रहना हर किसी अस्थि चर्म मय देह वालों के लिए सम्भव नहीं ! पर रंजू जी का यह सहज जीवन ही है .
वे साहित्य के कई रूपों की प्रतिनिधि ब्लॉग लेखिका है पर मूलतः कवि हैं -कवयित्री हैं ! अभी अभी उनका काव्य संग्रह साया प्रकाशित हुआ है और प्रशंसित हो रहा है .अपने एकमात्र एकल ब्लॉग कुछ मेरी कलम से के साथ ही वे दर्जनों सामूहिक चिट्ठों को अपनी सृजनात्मक प्रतिभा से समृद्ध कर कर रही हैं .और मैं तो उनका सचमुच फैन हो गया हूँ जब से उन्होंने साहित्यिकता को ही एक विस्तृत फलक देकर साईंस ब्लॉगर असोसियेशन आफ इंडिया पर भी डेबू किया और अंटार्कटिका पर यह बेहतरीन दो अंकीय लेख लिखा है -कौन कहता है कि साहित्यकार विज्ञान संचार नहीं कर सकते ? बल्कि वे शायद बेहतर तरीके से कर सकते हैं क्योंकि उन्हें संवाद का सलीका वैज्ञानिकों से बेहतर आता है -वे शब्द कृपण नही शब्द समृद्ध होते हैं ! संचार के गुर और बारीकियों की उन्हें बेहतर समझ रहती है .आप रंजना जी के अन्टार्कटिका लेख को पढ़ ख़ुद फैसला कर लें ।

चिट्ठाजगत को इस सम्मानित ब्लॉगर से बड़ी अपेक्षाएं हैं -मुझे तो कुछ अधिक ही हैं -क्योंकि मैं यह दावा कर सकता हूँ कि मुझे इस बड़ी शख्सियत की अंतर्निहित क्षमता का पूरा भान है । ये अपनी पूरी रचनात्मक ऊर्जा के साथ हिन्दी ब्लॉग जगत को उत्तरोत्तर समृद्ध कर रही हैं निर्विवाद और निर्विकार ! और ऐसे ही प्रयासों को ही लम्बी उत्तरजीविता मिलती है -प्रायोजित प्रयास मिटी के ढूहों और पानी के बुलबुलों के मानिंद क्षणिक जीवी होते हैं -काल के विस्तीर्ण फलक पर उनका नामशेष भी नही रह जाता कोई नामलेवा भी नहीं रहता ।सभी में समभाव , "सकल राममय " की लोकहित कामना और समर्पित सेवाभाव ही यादगार बनता है -नहीं तो "रहा न कुल कोऊ रोवन हारा " की बेकली गले आ पड़ती है .रंजू जी की साहित्यसेवा को मैं " भाषा भनिति भूति भल सोई ,सुरसरि सम सब कर हित होई " के ही निकष पर देखने परखने का आकांक्षी हूँ ! (अब एक साहित्यकार के बारे में जब कुछ लिख रहा हूँ तो ऐसे कुछ उद्धरण देना मजबूरी हो जाती है ना भाई लोगों/लुगाईयों ! फिर रंजना जी को थोड़ा इम्प्रेस भी तो करना है ना ! और कुछ डांट फटकार मिले- क्राईसिस मैनेज भी तो करनी है ! कुछ समझा भी करिए ! )
आईये इस अदम्य ऊर्जा और दृढ़ संकल्पी नियमित और सयंमित ब्लॉगर का अभिनन्दन करें !

47 टिप्‍पणियां:

  1. रंजू जी के बारे में पढकर बहुत अच्छा लगा !

    मुझे उनके ब्लॉग पढना पसंद है .

    पर तोहमत से बचने के लिए महिला ब्लॉगर का चुनाव किया यह कहकर आपने अच्छा नहीं किया !

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  2. रंजू जी की मै हमेशा से प्रसंशक रही हूँ...और उन्हें प्रेरनासोत्र भी मानती हूँ, उनके बारे मे ये सम्मानजनक और प्रसंशनीय आलेख पढ़कर बहुत खुशी हुई .. "

    Regards

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  3. रंजू दीदी से जब पहली बार बात कि मैंने तो यह सोच कर किया था कि जैसा लिखती हैं वैसी ही धीर गंभीर होंगी.. मगर जितनी देर बात होती रही उतनी देर खुद भी हंसती रही और मुझे भी हंसाती रही.. :)

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  4. और हाँ अरविन्द जी, ये मेरे अगले साल के सालाना पोस्ट कि मेहमान हैं.. आपने मुझसे पहले ही इनके बारे में लिख दिया.. :D

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  5. पी. डी. से सहमत हू.. जितनी संजीदगी उनके लेखन में मिलती है. . उनका व्यक्तित्व उतना संजीदा नही है.. संजीदगी के समुचित अनुपात के साथ साथ ज़िंदादिली का अंश भी उनके व्यक्तित्व में शामिल है..

    मुझे आश्चर्य होता है की वे एक ही समय में इतने सारे ब्लॉग्स पर नियमित लेखन कैसे कर लेती है.. उनके साथ पी गयी कॉफी में उन्हे काफ़ी करीब से जानने का मौका मिला.. वे निश्चित ही एक बढ़िया इंसान है..

    अमृता जी के विषय में भी अपने ठीक लिखा.. मैं अक्सर उनसे कहता हू की उन्होने अमृता को जिया है..

    चिट्ठा कार चर्चा के प्रयास के लिए आपका हार्दिक आभार!

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  6. रंजू जी के बारे में पढ कर अत्यंत प्रसन्न्ता हुई मैं यहाँ विवेक जी की टिप्प्णी से सहमत हूँ कि तोहमत से बचने के लिये महिला ब्लागर का चुनाव किया है ये सरासर महिला ब्लागर और रंजूजी के साथ अन्याय है

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  7. रंजू जी के बारे में पढकर बहुत अच्छा लगा !

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  8. रंजू के बारें में जितना कहा जाए उतना कम ही होगा। मैं शुरु में उनसे ब्लोगर के रुप में जानता था। उनके लेखन को पसंद करता हूँ। और जब उनसे मिला तो जैसा सोचा था उससे थोड़ा उल्ट पाया। जैसा कुश जी ने कहा उनका व्यक्तित्व उतना संजीदा नही है.. संजीदगी के समुचित अनुपात के साथ साथ ज़िंदादिली का अंश भी उनके व्यक्तित्व में शामिल है.. और फिर जब उनकी किताब पढी तो सच उनके लेखन का कायल हो गया। और हाँ एक बात जो हम दोनो में कामन है वो कि वो भी अमृता जी के लेखन की कायल है और मैं भी। और इसी पोस्ट में एक जगह कहा गया है। कि "रंजू जी अमृता प्रीतम की फैन रही हैं बल्कि मुझे तो कभी कभी लगता है वे अमृता की ही कोई कुम्भ मेले की बिछुड़ी जुड़वा बहन ही है" सच ...।

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  9. मैं रंजू जी के बारे मे बहुत ज्यादा कुछ नही जानता हू. बस जब से मैने उनका ब्लाग पढना शुरु किया है तब से नियमित रुप से उनको पढना आदत सी हो गई है. अगर मैं कहूं कि अमृता जी को मैने रंजू जी के नजरिये से नये सिरे से देखा है तो कोई अतिशयोक्ति नही होनी चाहिये.

    उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुये उनके उन्नत और स्वर्णिम लेखन भविष्य कि कामना के साथ.

    रामराम.

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  10. रंजू जी का उल्‍लेख आवश्‍यक था....बहुत अच्‍छी ब्‍लागर हैं वो...बधाई एवं शुभकामनाएं।

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  11. Ranjana जी के बारे में kush के ब्लॉग पर पढ़ा था.
    और उन से kafi prabhavit हुई थी.बहुत achchee और karmath रचनाकार हैं.
    amrita pritam जी के lekhan से paarichay कराने का shrey उन्हीं को जाता है.
    आप ने उन के बारे में jaanakari दी और उन को अपनी charcha में prathm sthan दिया
    उस के लिए हम naaari bloggers आप के abhaari हैं.वह इस sthan को पूरी तरह deserve करती हैं.
    उन के बारे में मैं यही kahungi की वह सब को barabar मान देती हैं.chahey वह नया ब्लॉगर हो या purana.. और किसी भी vivad से duur रहती हैं.और sanyamit' रहती हैं.'proud'[ghamand]नाम की cheez उन में नहीं है.जिस से उन का मान हमारी nazaron में और बढ़ जाता है.देखें उन से milna कब होता है.
    Ranjana जी को बहुत ही shubh kamanyen.

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  12. मै तो उन्हें अमृता की दीवानी कहता हूँ....अमृता की एक नज़्म उनके ब्लॉग पे देखकर ही पहली बार उनके ब्लॉग पे गया था ...कभी रूबरू मिलना नही हुआ ....पर संवाद प्रक्रिया जरूर हुई है....निसंदेह वे एक उर्जावान ओर प्र्तिभास्शाली महिला है जो विविध गुणों का सामंजस्य बिठा रही है .....

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  13. Rsnjoo ji kr bare me achchhi jankri....aalekh kaphi achchha laga...

    Regards..

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  14. ’कुछ मेरी कलम से’ की वर्तमान प्रविष्टि भी रंजू जी के कृतित्व को समझने का मौका देती है.

    मीठी ईच्छा जिसे कहती हैं रंजू जी -
    "हवा के पंखो
    पर बने
    एक आशियाना
    सात गगन का
    हो बस एक आसमान..."-
    उसी के वशीभूत तो होकर कविता, निबंध आदि साहित्यिक व आपका उल्लिखित अंटार्कटिका पर बेहतरीन दो अंकीय लेख जैसा वैज्ञानिक संदर्भों का लेख उनकी कलम से लिखा जा सका.

    अपनी एक कविता में रंजू जी ने लिखा है -
    "ज़िंदगी कविता ....
    या
    कविता ज़िंदगी...
    यह सोचते सोचते
    कई पन्ने रंग दिए
    कई लम्हे गुज़ार दिए ..."
    तो कवित्वमय जिन्दगी जीति हुई इस शख्सियत के सम्पर्की होते ही क्यों न बिला जाय आपकी वस्तुनिष्ठता? प्रेम का मतलब तो अपने आप को खो देना ही है!
    रंजना (रंजू) जी पर आपके इस मनोहर व्यक्ति-चित्र के लिये आपको धन्यवाद.

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  15. जैसा की आपने कहा निःसंदेह रंजू जी एक बहुत ही सयंमित ब्लौगर है ।
    अपनी पिछली दिल्ली यात्रा के दौरान उनसे फ़ोन पर बात हुई थी । यकीन जानिए उनसे बात करके ऐसा लगा मानों उन्हें बरसों से जानते हो ।
    शुक्रिया इस लेख के लिए ।

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  16. MAHILA bloggers ka naam aate hi mere jehan mein pahla chera ubharata hai,no doubt…wo ranju hi hain…….
    Ab kyon….arvind ji ki tarah main koi jhutha karan nahin gina paunga……
    Unki kavitaon hamesha se hi tanhaayi ke kuchh behad durlabh kshanon ke sathi rahe hain,isliye bhi mere liye unka mahatw kuchh badh jata hai………
    Achha laga unke bare mein yahan padhana…….
    Dhanywad
    ALOK SINGH “SAHIL”

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  17. रंजू जी के बारे में पढकर अच्छा लगा !

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  18. mujhe to pata hai ki wo achchi hi nahi...bahut achchi lekhika awam insaan bhi hai......unke baare mai likhne ke liye aapko badhaaee.....ranju ko bhi badhaaee

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  19. रंजना जी तो मेरे लिये लकी चार्मिंग है, उनके लिये क्या कहना...she is the best personality for me :)

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  20. रंजू जी के बारे में शब्दों में लिखना वाकई रेत को मुट्ठी में बांधने जैसा है, लेकिन अरविंद मिश्रा जी ने इस चुनौती को बखूबी निभा दिया है। रंजू जी की लेखनी जितनी दमदार है, उनके व्यक्तित्व की चमक भी उतनी ही उज्ज्वल है। ब्लॉग जगत में मेरा प्रथम सम्प्रेषण आदरणीय रंजू जी से ही हुआ था और उनके सुझावों, मार्गदर्शन और शुभकामनाओं की वजह से ही मैं यहां नियमित हो पाया। आपने सम्मानित, संयमित शब्द तो लिखे,, मैं उनके सम्मान में कुछ शब्द और जोड़ना चाहूंगा। हंसमुख, विनम्र, परोपकारी, सादगी पसंद, मार्गदर्शक और शब्दों की शिल्पी ... और नहीं लिखूंगा (पूरे सौ विशेषण बाकी हैं), क्योंकि मुझे पता है कि मुझे डांट पड़ने वाली है...

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  21. भई हम भी नही मिले, लेकिन रोजाना उन्हे पढ लेते है, बहुत सुंदर लगा,
    धन्यवाद

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  22. अरे रंजू जी के तो हम बड़े वाले फैन हैं. आपकी ही तरह ये बात और हैं की कभी-कभी प्लूटानिक प्रेम हमारे ऊपर से निकल जाता है. उनकी किताब पढने के लिए रखी हुई है... हमारी बदकिस्मती है अभी तक नहीं पढ़ पाये !

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  23. हमारी रंजू जी की बात निराली..आपने कवर किया तो और भी अच्छा लगा. वो डिजर्व करती है इसे और उन्होंने यह सम्मान अर्न किया है जी.

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  24. आपने एकदम सही लिखा है। रंजू जी ने साहित्य साधना की है। वे बहुत स्वाध्याय करती हैं और अपना समय एक अच्छे कार्य में लगा रही हैं।

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  25. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  26. अरविन्द जी
    अच्छा लगा रंजू जी की मर्यादित और सयंमित ब्लॉगर है

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  27. . रंजना (रंजू) ... के बारे में संभवतः मुझे दो शब्द लिखने में भी कठिनाई अनुभव होती है .. क्योंकि जब भी उनके बारे में सोचता हूँ तो लगता है कि ब्लागिंग को पूर्ण समर्पित जिस गंभीर और बहुआयामी व्यक्तित्व को मैंने कई बार निकटता से अनुभव किया है उसे प्रकट करने के लिए मैं सर्वथा निःशब्द हो जाता हूँ. महिला ब्लॉगर के रूप में उनकी ख्याति, साहित्य और स्वाध्याय को समर्पित, नारी जीवन के जटिलतम विषयों पर उनकी निरंतर पैनी नजर और उनका बहुआयामी व्यक्तित्व, ब्लागर्स की दुनिया में उन्हें सम्मानीय स्थान प्रदान करता है ...... ईश्वर उनकी कलम को और पैनी धार दे

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  28. संयमित ब्लॉगर?! दो विपरीत ध्रुवों का मेल। रंजू जी निश्चय ही विलक्षण व्यक्तित्व होंगी। अन्यथा लेखन और पब्लिश करना एक व्यक्ति के हाथ में हो तो सबसे पहले केजुअलिटी होती है संयम की!
    आपके लेख के लिये धन्यवाद।

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  29. नित्‍य नई जानकारियां मिल रहीं हैं । आप सभी को आभार।

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  30. आपने सही चुनाव किया। रंजना जी बहुत अच्छा लिखती हैं।
    घुघूती बासूती

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  31. रंजूजी बहुत अच्छी लेखिका है।... उनकी सभी रचनाओं का रसास्वाद मैने लिया है।... आपने उनकी रचनाओं को सराहा है; जो सर्वथा इस योग्य है, धन्यवाद।

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  32. अरविन्दजी पहले तो आपको बधाई इस बात की की आपने महिला ब्लॉगर में जो चयन किया सार्थक हे क्यूंकि रंजू से ज्यादा संयमित सख्सियत इतनी आसानी से नही मिलती ....

    हा सही हे रंजू भाटिया क्यूँ नही ? उनकी सख्सियत के बारे में तो सब जानते हे मगर
    एहम पहलु जो हे उनका वो यही हे की बहोत ही संवेदनशील ह्रदय की मालकिन हे वो ....
    और जो भी लिखती हे संवेदना को महसूस करती हे और फ़िर इसे लफ्जो का स्वरुप देती हे ....
    रंजू का जीवन सही मैंने में परमार्थ स्वरुप हे.....आपने पढ़ा ही हे रंजू की लेखनी को आमजीवन के प्रश्न भी इतने चुभते हे इसके ह्रदय को की वो अपना आक्रोश अपनी लेखनी के जरिये बहाए बिना नही रह सकती ...
    कौनसा ऐसा संवेदन से भरा कौन हे जहा उसकी कलम नही पहुँची,?..अरविन्द जी
    अमृता जी के जीवन सो इस लिए प्रभावित हे की वो ख़ुद प्लेटोनिक प्रेम ने believe
    करती हे ....कृष्णा जी की बहोत बड़ी भक्त हे वो और जैसा की हम सब जानते हे कृष्णा का स्वरुप ही प्यार से भरा हे...जितना अमृताजी ने प्लेटोनिक प्रेम को जिया इतना या उस से ज्यादा रंजू उस प्यार को जी
    रही हे...जो इंसान दुसरो के दुःख दर्द से परेशां हो उठे वो भला कैसे प्यार से जीने का तरीका बदल दे?
    "रंजू जी अमृता प्रीतम की फैन रही हैं बल्कि मुझे तो कभी कभी लगता है वे अमृता
    की ही कोई कुम्भ मेले की बिछुड़ी जुड़वा बहन ही है" नही जी वो उनकी बिछडी हुई बहिन नही हे मगर जहा अमृता जी ने उस ऊंचाई को छोड़ा उसी ऊंचाई से रंजू का प्लेटोनिक प्रेम का सफर सुरु होता हे...
    हा ये सही हे की रंजू की सवेदना को देख के अमृता जी की याद आती हे मगर जहा तक मेरा सवाल हे मुझे वाही स्वरुप रंजू में दिखाई देता हे साक्षात् प्रेम की मूरत....साहित्य की सेवा जो रंजू कर रही हे बिना किसी मकसद को सिर्फ़ यही सोच से की इस कृष्णाजी की पवन भूमि में उसका भी कोई कर्तव्य हे जो उसे निभाना हे और यही उसकी जिंदगी का मकसद रहा हे की इस संसार को जितना अच्छा दे सके दे बिना फल की चिंता किए कर्म करते जाए...
    बखूबी जिंदगी का मकसद समाज लिया हे उसने और वाही करती जा रही हे...
    "प्रेम की रूहानी ऊँचाईयों तक पहुँच कर क्षण प्रतिक्षण उसी के वशीभूत हो रहना हर
    किसी अस्थि चर्म मय देह वालों के लिए सम्भव नहीं ! पर रंजू जी का यह सहज
    जीवन ही है ." बिल्कुल सही लिखा आपने सहज ता से अपन
    मंजील तक पहुँच रही हे वो.....मानव मन की सवेदना ही नही बाल मानस को भी वोबखूबी समजती हे उनके लिए भी अपनी वार्ता ओ से अपना फर्ज निभा रही हे....कहा नही हे वो?योग साधना भी वो करती हे
    और दुसरो को उस साधना के लिए प्रेरित करती रहती हे....मूल तह रंजू का व्यक्तित्व रंजू का जीवन समाज के प्रति समर्पित हे...और जो लोग दुसरो के लिए जीते हे उनके लिए ज्यादा तो क्या बोल सकते हे
    मगर इतना जरुर बोल सकते हे की साहित्यिक रूप से की जा रही रंजू की इस सेवा को कुदरत बार्कर रखे और जो दुसरो के लिए मांग रही हे ऐसा ही जीवन पाए....
    रंजू का हाल ही में आया काव्य संग्रह साया ....बेहतरीन रचनाओ से भरा.....जीवन
    के हर पहलु को छूता हुआ सम्पूट हे ....इतना प्रशसनीय प्रयाश हे की लफ्जो से कुछ
    कहना उचित नही होगा दिल से छूती हुई हर रचना जीने का ही नही मगर जिंदगी
    को सही मैंने में जीने का तरीका बता रही हे.....साया की एक एक रचना पर रंजू की प्रस्तुति और उसके प्रयाश पर अगर कुछ लिखा जाए तो सायद एक नोवेल बन जाए...इतनी गहराई एक एक रचना में हे....कभी कभी लगता हे की ये भावः का बहाव कहा से आता होगा रंजू के मन में फ़िर ख़ुद ही लगता हे की जिसका उद्भव स्थान
    रंजू का साफ़ निर्मल मन हे वहा से ऐसा प्रवाह अविरत बहना ही लाजमी हे......हमेशा साहित्य की सेवा प्लेटोनिक प्रेम से करती रहे यही किशनजी से प्रार्थना.....

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  33. रंजू जी एकमात्र ऐसी महिला ब्‍लॉगर हैं, जो अच्‍छी पाठिका होने के साथ साथ बच्‍चों, विज्ञान, स्‍वास्‍थ्‍य और साहित्‍य में रूचि रखती हैं। मैं उनकी काबिलियत और आपकी पोस्‍ट दोनों को सलाम करता हूं।

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  34. दुर्भाग्य से में उनको पढ़ नही पाया अब पढ़ना शुरू करूंगा

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  35. I am rather late on this post but its good to read about Ranjana more in depth . Bloging is instrumental in bridging gaps and its good that slowly and steadly woman have started bloging more on varied topics other then romantic , tear shedding peoms .
    Ranjana is a woman of substance i can say because i have known her very personally . She has her own way of taking life and she believes that writing has given her a satisfaction that is her own .
    I hope Mr Arvind with his pen will keep featuring more bloggers and i agree with vivek that mr arvind should write on woman who blog only if he feels that he should write not because of what people will say.
    Buit its good that at least a good series have been started by arvind and he deserves appreciation and praise for the same
    as regds Ranjana , i hope this post gives her the happiness that she truly desrves

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  36. आपने एक शब्द में उनकी रचनाओं को परिभाषित किया जो काबिले तारीफ़ है, जो उनके साया की समीक्षा में मैं ठीक से शब्दांकन नही कर पाया--
    Platonic Love.

    यही वह प्रेम अहि जो राधा नें कृष्ण से किया.

    आपको साधुवाद

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  37. अरविन्द जी तहे दिल से आपका शुक्रिया ..जिस दिन आपने यह पोस्ट किया मेरी आँखे नम हो गई ..बहुत स्नेह मिला हर एक टिप्पणी से .अधिक क्या कहूँ कुछ समझ नही पा रही हूँ ..बस अभिभूत हूँ सबके दिए स्नेह से .यूँ ही होंसला बनाए रखे ..सबका तहे दिल से शुक्रिया ..

    उत्तर देंहटाएं
  38. रंजू दीदी.. मुझे आपकी बहुत फिक्र हो रही है, अगर हमारे बारे में इतना कुछ लिखा गया होता तो हम तो बेहोश ही हो जाते, अरे बेहोश क्या कोमा में ही चले जाते.. :-)

    वैसे रंजू दीदी यहाँ सबने आपकी बहुत प्रसंशा की है, और आप इसकी हक़दार भी है.. आप में सदा अपनी बड़ी दीदी की छवि ही देखी है मैंने.. और मेरी दीदी दुनिया में सबसे अच्छी है.. मैं जानती हूँ...

    हमेशा खुश रहियेगा... :-)

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  39. कुछ दिनो पहले, रंजना जी को, उनके जन्मदिन पर बधाई देने के बाद, उनसे मित्रता हूई तब उनके बारे बहुत कुछ जानने का मौका मिला। आज इस चिट्ठी को पढ़ कर अच्छा लगा।

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  40. अरविन्द जी को बहुत शुभकामनाये और धन्यवाद अपनी बेलाग बात ब्लॉग के माध्यम से कहने के लिए!

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  41. आदरणीय अरविंद सर आपके शब्दों के द्वारा आदरणीया रंजू जी को जानने पहचानने और समझने का मौका मिला, रंजू जी को सादर प्रणाम नमन .

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