मंगलवार, 1 जुलाई 2008

सौदर्य और सौन्दर्यानुभूति -स्फुट विचार !

'ब्यूटी लाईज इन द आईज आफ बेहोल्डर '.....अंगरेजी की यह बहुउध्रित उक्ति तो द्रष्टा में ही सौदर्य और अनुभूति का का आरोपण करती है ।
सौंदर्य और सौन्दर्य बोध का फलसफा बहुत पुराना है -
वाल्मीकि रामायण में 'क्षणे क्षणे यन्न्वतामुपेती तदैव रूपं रमणीयताह'[जो क्षण क्षण में नवीनता ग्रहण कर रहा हो वही रमणीय है ]का उद्घोष है तो मानों उसी तर्ज पर बिहारी नायिका का सौन्दर्य कुछ ऐसा है कि गर्वीला चित्रकार हाथ मलता रह जाता है क्योंकि क्षण क्षण बदलती नायिका की सौन्दर्य भाव भंगिमा को वह उकेर नही पाता ।
यह एक लंबा विषय है, आज प्रतिष्टापना हो गयी है -अभी अनेक बिन्दु उभरेंगे और चर्चा होगी
.आप का चर्चा में भाग लेने का सदैव स्वागत रहेगा .

1 टिप्पणी:

  1. यह रोचक श्रंख्ला निश्चित ही आपके व्यक्तित्व के नए आयाम खोलेगी।
    और हाँ, ब्लॉग की बैक ग्राउंड थोडी तंग कर रही है, पढने पर आंखों में जोर देना पडता है। इसपर भी विचार करिएगा।

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