कडाके की ठण्ड पड़ रही है इधर इस पूर्वांचल में भी .....देवताओं के लिए घर में ही आधुनिक सुरा -ब्रांड, ब्रांडी को कंठस्थ करने के वाजिब बहाने का मौसम है यह ...
सुर असुर की पिछली पोस्ट पर
अनुराग जी ने हड़का लिया कि कुछ पढ़ वढ कर लिखा करिए -बात लग गयी ....घरेलू बजट के लिए 'ईयरमार्क' रूपयों में से घरनी को बिना बताये चुपके से १ हजार निकाल कर (आगे देखा जायेगा... ) कल पहुँच ही तो गया बनारस की चौक स्थित
इंडोलोजी पर मशहूर किताबों की मोतीलाल बनारसीदास की दूकान पर -तीन किताबें खरीद ही तो ली ! आर्थर एंटोनी मैकडोनेल की
'अ वैदिक रीडर फार स्टुडेंट्स '(आक्सफोर्ड प्रकाशन ) ,
डॉ राजबली पाण्डेय की हिन्दू धर्मकोश (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ) और
डॉ उषा पुरी विद्यावाचस्पति की भारतीय मिथक कोश. (नेशनल पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली )
....और इस सप्ताहांत के एकांतवास में जुट गया इन किताबों का अवगाहन करने -खासकर सुर असुर की उत्पत्ति और उनके सुरापान आदि प्रसंगों के प्रामाणिक संदर्भ खोजने ,और जितना पढता गया मामला सुलझने के बजाय उलझता ही गया है. ईरानियों/पारसियों के धर्मग्रन्थ
अवेस्ता और भारतीय
ऋग्वेद में बहुत समानता है जिसके आधार पर मैकडोनेल भारत में आये आर्यों का उदगम इरान को मानते है -अपनी उक्त पुस्तक में उन्होंने बहुत सी रोचक बातों का इशारा किया है -उन्होंने राक्षसों के बारे में लिखा है कि उनकी दो कोटियाँ वर्णित हुई हैं -एक देवलोक (आकाशीय ) देवताओं की दुश्मन है तो दूसरी धरती वासियों मतलब मनुष्य की .देवताओं के दुश्मनों को असुर भी कहा गया है .
अवेस्ता में ये असुर जो
अहुर (स को ह का संबोधन !) कहे गए हैं अलौकिक प्राणी ( डिवायिन बीइंग ) हैं -स्पष्ट है धरती का न होने के कारण ही ये अलौकिक है .जब हम दैव प्रकोप कहते हैं तो शायद इशारा इन असुरों की ओर भी होता हो .अब जो निचली श्रेणी के असुर हैं उनमें राक्षस ,यातुधान (जातुधान ) और सबसे क्रूरकर्मी पिशाच रहे हैं जो नरमांस खाने वाले हैं -रामयुग के राक्षसों में ऋषि मुनियों के मांस भक्षी यही राक्षस थे जिनका समूल नाश श्री राम ने किया ,ज्ञात हो राम आर्य वंश के प्रतिनिधि हैं . एक लम्बे चले युद्ध में कही भारत भूमि के मूल निवासियों जिन्हें अनार्य ,दस्यु ,दास तक कहा गया है और जो काले थे (आश्चर्य है राम भी सावले हैं ) के समूल नाश का उपक्रम तो नहीं किया गया था ? .
ये तथ्य जितना तो समाधान नहीं देते उससे कहीं अधिक प्रश्न उठा देते हैं ..बहरहाल यह चर्चा फिर कभी ....
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बात सुरापान की चल रही थी .इस पर डॉ. राजबली पाण्डेय ने भी रामायण से ही एक श्लोक का उद्धरण दिया है -
सुराप्रति ग्रहाद देवाः सुरा इत्यभि विश्रुताः
अप्रतिग्रहणात्तस्या दैतेयाश्चासुरा स्मृताः
अर्थात सुरा =मादक तत्वों का उपयोग करने के कारण देवता लोग सुर कहलाये ,किन्तु ऐसा न करने से दैतेय लोग असुर कहलाये .
यहाँ भी देखिये -
असुरास्तेन दैतेयाः सुरास्तेनादिते : सुताः
हृष्टाः प्रमुदिताश्चासन वारूणीग्रहणात सुराः
सुरा से रहित होने के कारण ही दैत्य " असुर " कहलाये
और सुरा सेवन के कारण ही अदिति के पुत्रों को सुर संज्ञा मिली
वारूणी (सुरा की देवी ) को ग्रहण करने से देवता हर्ष से उत्फुल्ल एवं आनंदमय हो गए
बालकाण्ड पञ्चचत्वारिन्शः ...सर्गः ,श्लोक ३८ ,
गीता प्रेस
देवों के शत्रु होने के कारण असुरों को दुष्ट दैत्य कहा गया मगर सामान्यतः वे दुष्ट नहीं थे .वे विद्याधरों की कोटि में भी आते थे -परम विद्वान् शुक्राचार्य उनके गुरु थे जो विद्वता में देवताओं के गुरु बृहस्पति से किसी भी तरह कमतर नहीं थे. भगवान् कृष्ण ने गीता में खुद को
कविनाम उसना कविः कहा है -यानि कवियों में मैं शुक्राचार्य हूँ ,बृहस्पति नहीं! हाँ असुर रहस्यमयी पेय
सोम जो केवल धार्मिक अनुष्ठानों में पिया जाता था और
सुरा जो अन्न के किण्वन से बनती थी का सेवन नहीं करते थे.कुछ और भले पीते रहे हों .ये पेय केवल सुर यानि देवताओं के लिए ही संरक्षित था . इंद्र तो सोमपान करके इतने ओजस्वी हो जाते थे कि भयानक दैत्यों का संहार कर डालते थे.सबसे भयंकर वृत्रासुर का संहार उन्होंने सोमपान करके ही किया था .मगर आश्चर्य है कि इंद्र अवेस्ता में देव /दैत्य /दानव (demon) रूप में वर्णित है -हमारे यहाँ देवताओं का राजा होकर भी इंद्र को नीच कर्मों में लिप्त दिखलाया गया है -
रामचरित मानस में राम के मुंह से इंद्र को कुत्ता तक कहा गया है .कृष्ण से तो इनकी तकरार ही हुई है .जाहिर है राम और कृष्ण के धुर विरोधी भी हैं इंद्र . कहीं हमारे ग्रंथों में इंद्र के इस दानवी स्वरुप की प्रच्छाया अवेस्ता से तो नहीं आई है ? अवेस्ता में वर्णित दैत्यतुल्य इंद्र कैसे परवर्ती देश काल ,भारत भूमि में देवताओं के राजा बन बैठे यह एक पहेली से कम नहीं है जिसमें मनुष्य के इतिहास पुराण की कोई लुप्त कड़ी आज भी उत्खनन की बाट जोह रही है .....

कहाँ सोमपान और कहाँ अब की ये सुराएँ? कौन लगाएगा हाथ इन्हें ? ?
पोस्ट लम्बी हो चुकी है ,बाकी चर्चा फिर कभी ........