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मंगलवार, 22 नवंबर 2011

सनी लियोन के बहाने बदलती भारतीय यौनिकता पर एक बहस(A)..

नोटिस:यह पोस्ट शुचितावादी नैतिकता  आग्रही बन्धु बांधवियों को आपत्तिजनक लग सकती है!अतः वे इसे अपनी जोखिम पर पढ़ें!  लिंक भी आपत्तिजनक हो सकते हैं!पारिवारिक परिवेश में कृपया उद्धृत लिंक को न खोलें! 


 बिग बॉस सीजन पांच की गिरती टी आर पी को संभालने के लिए आयोजकों /निर्माताओं को  कैलिफोर्निया की हार्ड कोर पोर्न स्टार  सनी लियोन को आमंत्रित करने का  फैसला करना पडा है जिसके अपने स्पष्ट निहितार्थ हैं. मजे की बात यह है  कि बिग बॉस के घर में बचे सदस्यों को सनी लियोन के बारे में  पता ही  नहीं है कि वे एक पोर्न स्टार हैं और एक तरह से निर्माताओं ने घर के सदस्यों से  छल किया है ....बिग बॉस में पहले पामेला एंडरसन आ चुकी हैं मगर उनका पोर्न स्टार जैसा  कोई खुला स्टेटस नहीं रहा है हालांकि उनके भी कई अश्लील अवैधानिक चित्र/वीडिओ  अंतर्जाल पर मौजूद हैं ...एक आम  संवेदनशील भारतीय दर्शक को पामेला की 'सुन्दरता ' वीभत्स लग सकती है जबकि लियोन  खूबसूरत हैं और सौन्दर्य के भारतीय प्रतिमानों के अनुकूल भी ..आपके दर्शन सुख के लिए उनका एक सात्विक चित्र नीचे लगा रहा हूँ .. उनकी  आफिसियल वेबसाईट पर भी कहीं कोई दुराव छुपाव नहीं है सब बातें पारदर्शी है बिंदास हैं, खुल्लमखुल्ला हैं ....वे दर्शकों को एक पूर्वावलोकन का आमंत्रण देकर कहती हैं कि अगर आपको और ज्यादा देखना हो तो फिर मेरी वेबसाईट पर पंजीकृत होईये मगर वहां प्रतिदिन के हिसाब से डालरों में भुगतान की व्यवस्था है ...जाहिर है यह सब  सौन्दर्य को, यौन क्रीडा प्रदर्शनों  को भी भरपूर भुना लेने की व्यावसायिक मानसिकता लिए है  ....यौनिकता के व्यवसाय का यह खुला खेल /दुष्चक्र /धंधा  पश्चिम के लिए कोई नया नहीं है मगर भारतीय संदर्भ में स्वच्छन्द यौनिकता का यह आह्वान गले नहीं उतरता ....बिग बॉस के निर्माता /निर्माताओं की यह जुगत उन पर भारी पड़ने वाली है ऐसा मुझे लगता है -दोष सनी लियोन का नहीं है क्योकि वहां तो कोई दुराव छुपाव है ही नहीं, सब कुछ शीशे सा साफ़ है ...मगर बिग बॉस के लोगों की नीयत में स्पष्ट खोट है जिनका साध्य और साधन सब कुछ गन्दी मानसिकता लिए लग रहा है ....

बिग बॉस के घर में घुसते ही वहां पहले से ही मौजूद सदस्य पूजा बेदी ने सहज ही लियोन से पूछ लिया कि उनका प्रोफेसन क्या है तो असमंजस से  लियोन  ने कहा माडलिंग /टी वी शोज ... यहाँ घर के सदस्यों को   यह पता नहीं कि उनका साहचर्य अब किसके साथ है ....यह तो सरासर छल है, आपत्तिजनक है ..गैर कानूनी भले न हो मानवीय संचेतना के विरुद्ध है और इसलिए अनैतिक है ....उन्हें कैसा लगेगा जब यह पता लगेगा कि वे अपने सरीखे  कोई   नए मेहमान नहीं बल्कि एक हार्ड कोर पोर्न  स्टार के साथ समय बिताये हैं? तब क्या  वे खुद को छला हुआ महसूस नहीं करेगें? या फिर वे भी कुछ वैसी ही शख्सियतें रखते हैं?

हाँ दर्शकों को अब लियोन के बारे में सब कुछ पता है -थैंक्स टू मीडिया और अंतर्जाल! उनके भारत आगमन पर मीडिया और नेटवर्क साईटों में सुगबुगाहट शुरू हो गयी ...सवालों के बौछारों में लियोन वैश्या  और पोर्न स्टार के फर्क को समझाती रहीं -झल्ला कर कहा मैं वैश्या नहीं हूँ!पैसे लेकर उन्मुक्त कामक्रीड़ा की संलग्नता के बावजूद वे वैश्या नहीं हैं यह बात भारतीय आडियेंस को कैसे गले उतर सकती है ....मैंने इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए विकीपीडिया के इस पृष्ठ का अध्ययन किया जो पोर्न स्टार की परिभाषा और वैधानिक सावालों का पर्याप्त उत्तर देता है ....पश्चिम में भी खुले व्यभिचार /अश्लीलता को रोकने के कड़े कानून हैं ....और पोर्न स्टार और वैश्या के अन्तर्सम्बन्धों  को बखूबी परिभाषित किया गया है! वहां भी व्यावसायिक अश्लीलता को वैश्यावृत्ति के बराबर ही मानने के  वैधानिक दृष्टांत  हैं ...अगर यौन आमंत्रण तथा यौन क्रिया के लिए भुगतान की शर्त है तो यह वैश्यावृत्ति है और अगर यह सृजनात्मक कार्यों -फिल्म आदि में नग्न देह प्रदर्शन या  यौनक्रिया का  अभिनय प्रदर्शन है तो यह वैश्यावृत्ति नहीं है -ऐसा एक  विभेद कैलीफोर्निया  राज्य के विधायी प्रावधानों के अंतर्गत है ...मगर इन बारीक भेदों का फायदा उठा वहां अश्लीलता का व्यवसाय खूब फल फूल रहा है ....स्पष्ट है लियोन कह भले कुछ लें वे देह व्यापार में ही लिप्त हैं ...मगर न जाने क्यों वे इस बात को भारतीय मीडिया के सामने छुपा रही हैं जबकि अंतर्जाल पर सब कुछ साफ़ साफ़ दिख रहा है ...

मुझे भी  ऐसा खुला दैहिक प्रदर्शन ,वासना का खेल पसंद नहीं है ...यह एक व्यसन है एक व्यभिचार है .. ....यह खुलापन  भारतीय मन स्वीकार नहीं कर सकता ...लियोन जहाँ हैं वहीं ठीक हैं -इस तरह उन्हें भारतीय टी वी शो में लाकर दर्शकों में  परोसना एक कुत्सित मानसिकता है ..और निश्चय ही बिग बॉस का यह सीजन बुरी तरह फ्लाप होने वाला है ...क्योकि टी वी एक पारिवारिक परिवेश का अंग है और यहाँ ऐसे शो स्वीकार्य नहीं हो सकते ...जहां उन्मुक्त यौन सबंध की पक्षधर, उसकी एक ब्रैंड अम्बेसडर सामने हो और रियल्टी शो में जम कर भागीदारी कर रही हो ....मगर हाँ भारतीय संदर्भ में लियोन के पदार्पण ने यहाँ की संभ्रमित नारी नारीवादियों का जरुर पुरजोर आह्वान कर दिया है  जिसमें वे नारी उन्मुक्तता आधुनिकता और जीवन जीने, रहन सहन के अधिकार से जुड़े कई प्रश्नों का उत्तर ढूंढ सकती हैं और आश्वस्त हो सकती हैं ....

रविवार, 3 जुलाई 2011

मेरी मानिए तो मत जाईये डेल्ही बेली देखने -बेहद गंदी, गलीज और बकवास फिल्म है!

कल देखी डेल्ही बेली ..बकवास ..पूरा पैसा बर्बाद ..टोटल ट्रैश! आमिर ने कई अच्छी फिल्मे दी हैं बीते दिनों ..पीपली लाईव जैसी धांसूं और धोबी घाट जैसी प्रयोगधर्मी ..मगर यह तो बिलकुल पटरी से उतरी हुयी है ....गंदे अश्लील दृश्य, बात बात पर गंदी गालियाँ ...कला और सृजन के नाम पर भद्दगी ,फूहड़पन और भडन्गई!और इस फिल्म के नकारात्मक पहलुओं को ही प्रचार का मुद्दा बनाकर मीडिया के जरिये अभियान ..और समाज के सबसे स्फूर्त ,कल्पनाशील युवाओं को जाल में फांस कर उनकी जेब खाली करने की कवायद ..यही है डेल्ही बेली बस! यह परम्परा और संस्कृति से कटे लोगों का रुग्ण विलास है ....और एक कुचक्र युवाओं के उर्वर मन को संदूषित करने का ...यह बर्दाश्त के काबिल नहीं है ..

फिल्म में कहने भर को एक स्टोरी है मगर की नयापन नहीं ...हीरे की स्मगलिंग ,पैकेट का गलत हाथों में पहुंचना और फिर मारामारी ....कामुक दृश्य ,भोडे सेक्स का प्रदर्शन जिसके बारे में लिखना ही संभव नहीं -कैसे बेहूदे लोगों ने इसे सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए परदे पर उतारा है ...क्या सेक्स इतना ही गन्दा,  गलीज है?  एक मोटा पात्र तो पूरी फिल्म में केवल अधोवायु निकालता रहता है ...और कामेडी फिल्म के नाम पर प्रचारित हो रही इस फिल्म की पूरी कामेडी बस यहाँ  से शुरू होकर लैट्रिन तक समाप्त होती है ....नारी समलैंगिकता ,कनिलिंगस  ,अधेड़ उम्र की वैश्यावृत्ति आदि दृश्यों के सहारे फूहड़ हास्य कुरेदने की नाकाम कोशिश की गयी है ...इतनी बदतर फिल्म कैसे बनायी गयी मुझे इस पर आश्चर्य है ...एक पात्र (हीरो? )के  पैंट के जिपर वाला हिस्सा   एक  सेक्स सेशन में सहसा उठा तो कैमरे  का फोकस  वहां! मुख मैथुन के दृश्यांकन के दौरान  लडकी (हीरोईन ) की शिकायत कि मूछे सफाचट करो !युवाओं को यह सतही वाहियात  कामुक सनसनी देकर क्या चाहती है  आमिर और उनकी पार्टी ? 

भला हो उस विंडो कन्या का जिसने टिकट लेते ही अप्रत्याशित और अभूतपूर्व रूप से मुझे आगाह किया कि फिल्म बेहद गंदी है और गालियों से भरी है ...उसकी इस चेतावनी को अनसुना कर एक बौद्धिक दंभ के अंदाज में मैंने केवल इतना कहा ,"मुझे पता है " ..उसने हताशा भरे चेहरे से टिकट मुझे सौप दिया ,साथ में पत्नी जी भी थीं जो फिल्म को ज्यादा देर नहीं झेल पायीं और हाल से निकल चलने का आग्रह किया ..और यह प्रस्ताव भी रखा कि टिकट को दूसरी फिल्म के लिए बदल दिया जाय -ऐसे अनुभव मेरे लिए जीवन में पहली बार हो रहे थे...मैं ठगा सा बस केवल फिल्म की बेहूदी टीम को कोसता रहा ..शिव शिव कर फिल्म पूरी हुयी और बेहद बुझे मन से हम हाल के बाहर निकले ...काश उस विंडो कन्या बात मान ली होती मैंने ....

यह फिल्म तो बैन होनी चाहिए ..हम कला और सृजन की अभिव्यक्ति के नाम पर भद्दगी का ऐसा नंगा नाच कैसे कर सकते है ..आखिर कोई तो श्लील अश्लील की सीमा रेखा बचे ..इस फिल्म ने तो धड़ल्ले से सब मिटा डाला ...और वह भी यूथ के नाम पर ..क्या भारत का यूथ इतना अशिष्ट और मार्बिड हो उठा है ? हमारे बच्चे ऐसे माहौल के पात्र  हैं -नहीं नहीं यह  सही नहीं हो सकता ...जरुर फिल्मकारों ने एक अतिरंजित दृश्य सामने रखा है ....इस फिल्म में ट्रेंड के नाम पर एक आईटम डांस खुद आमिर ने किया है जिससे ज्यादा पकाऊ कुछ नहीं हो सकता ..बस फूहड़ उछल  कूद ....हो सकता है इसकी मूल कृति /स्क्रिप्ट कलात्मक रही हो मगर उसके फूहड़ दृश्यांकन ने इसकी हवा निकाल दी है!

मत जाईये देखने ,बात मानिये नहीं तो जाकर पछ्तायेगें! पहली बार हुआ है कि किसी फिल्म को मुझे एक भी स्टार देने का मन नहीं है ...
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सोमवार, 7 मार्च 2011

अथातो न्यूड जिज्ञासा ...(A)

 माओ और लादेन के साथ निर्वसना अरुन्धती -कला या विकृति ?
इन दिनों चर्चित लेखिका अरुंधती राय के एक निर्वसन पेंटिंग को लेकर गर्मागर्म बहस छिड़ी है ...दिल्ली के एक उदीयमान चित्रकार प्रणव प्रकाश ने यह काम अंजाम दिया है ....मगर इस पेंटिंग के पीछे एक नकारात्मक विचार है -चित्रकार अरुंधती राय के कश्मीर मुद्दे  और नक्सली मामलों पर दिए गए वक्तव्यों से खिन्न है -लिहाजा अपनी तूलिका से उसने अपने रोष को व्यक्त किया है . यह एक खतरनाक बात है -असहमतियों का इस तरह प्रस्फुटित होना शायद ही उचित माना जाय ....भले ही न्यूड , पेंटिंग की अन्य विधाओं की भांति एक सृजन कर्म है किन्तु प्रतिशोध की भावना से कला के उदात्त स्वरुप और उद्येश्य को ही बाधित कर देना उचित नहीं कहा जा सकता ....न्यूड या इरोटिका का एक पक्ष सौन्दर्यबोध से जुड़ा है और वह स्वीकार्य हो  सकता  है -मगर अरुंधती राय की यह पेंटिंग किसी भी दृष्टि से सहज कलाकर्म नहीं है ,नारी की निजता और गरिमा पर भी चोट है ....एक बलात्कारी की भी सोच नारी की गरिमा और चरित्र के  हनन की ही होती है ..एक ब्लॉग पर इस मुद्दे को उठाया गया तब मैंने इसके विविध पहलुओं की पड़ताल की और अब जाकर इस  निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ की चित्रकार का यह कृत्य भर्त्सना योग्य है ....किन्तु इस मुद्दे पर प्रायोजित संकीर्ण सोच से ऊपर उठ कर वस्तुनिष्ट तरीके से कोई निर्णय लेना होगा ...
 उत्तमा जी की कामायनी श्रृंखला  की एक चर्चित कलाकृति

अपने ब्लॉग जगत में पेंटिंग -कलाकर्म से जुडी है उत्तमा दीक्षित जी जिनसे मुझे मिलने का सौभाग्य मिला हुआ है और कामायनी थीम पर उनके कुछ न्यूड ब्लागजगत में चर्चा के विषय बन चुके हैं- अब इस नए इस मुद्दे पर मैंने उनकी राय जाननी चाही -मैंने फोन किया तो वे बनारस के व्यस्त सिगरा क्षेत्र में थीं और अगर शापिंग में नहीं तो फिर ट्रैफिक जाम में फंसी हुयी लगीं -अब इन मुद्दों पर सड़क चलते क्या बात करना मगर उनकी सदाशयता कि उन्होंने इतने संवेदनशील मुद्दे को भी सहजता से लिया और अपने विचार व्यक्त किये . उन्होंने कहा -" महज  चर्चा में आने के लिए  किसी भी सेलिब्रिटी को  न्यूड का सब्जेक्ट बनाना अनुचित और आपत्तिजनक है ..और शायद यह आपराधिक दंड के प्रावधानों के अधीन भी आ सकता है -महानगरो के कलाकार कई बार खुद के अच्छे कार्यों के लम्बे समय तक अभिस्वीकृत (रिकगनायिज ) न होते देख भी निराशा में भरकर ऐसे हथकंडो को तात्कालिक नेम और फेम पाने के लिए उठाते हैं जो दरसअल लांग रन में उनके लिए ही प्रतिगामी (काउंटर प्रोडक्टिव )  हो उठते हैं ...ऐसी  तात्कालिक शोहरत पाने की प्रवृत्ति से नए कलाकारों को बचना चाहिए -हुसैन की नक़ल एक नए कलाकार के लिए आत्मघाती हो सकती है अगर उसका काम एक विकृत मानसिकता लिए हुए है ......" 
राजा रवि वर्मा की कालजयी कृति :सद्यस्नाता

जाहिर है मैं उत्तमा जी के विचारों से शब्दशः सहमत हूँ....न्यूड या इरोटिका का उद्येश्य अगर नैसर्गिकता को उभारना हो -शुद्ध सौन्दर्यबोध का उत्प्रेरण  हो तो एक कलाकृति के रूप में उसका स्वागत हो सकता है मगर किसी को नीचा दिखाने ,उसे मात्र दैहिकता तक ला  प्रस्तुत करने और केवल दृश्य रति के लिए ही ऐसे कलाकर्म का प्रोत्साहन निंदनीय है ...नारी पुरुष के  नग्न शरीर की विभिन्न स्थितियां ,कोण  और परिवेश मनुष्य में कई मनोभावों  को उकसा /उपजा सकती है -वह रागात्मक हो सकता  है और बुद्ध का वैराग्य भी -यह दृश्य के साथ ही द्रष्टा की मनःस्थति और अभिरुचि पर निर्भर करता है ...अतिशय देहरति मनोरोग का भी संकेत है -जहाँ कामुकता का व्यामोह/प्राबल्य  कई रोगग्रस्त प्रवृत्तियों के रूप में प्रगट हो सकता है!यह एक व्यसन बन सकता है और मनोचिकत्सा की मांग   भी कर सकता है ..पोर्नोग्राफी साहित्य /चित्र में  अतिशय  रति / बहु स्त्री गमन की प्रवृत्ति ऐसी ही मानसिक व्याधियां हैं .....नारी या पुरुष का शरीर महज वस्तु मात्र नहीं है -बड़े जतन मानुष तन पावा! 

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