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शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

हुई ब्लॉग की वापसी -कृतज्ञता ज्ञापन!

परसों यानि १६ नवम्बर   की बात है जब शाम को नेट पर एक बहुत जरुरी (ब्लागिंग नहीं!) काम कर रहा था और अचानक एक पाप अप खिड़की खुली और सन्देश मिला कि मेरा जी मेल अकाउंट डिसेबल कर दिया गया है ..मैंने इसे एक स्पैम माना और मेसेज डिलीट कर दिया ...काम पूरा करके जो दरअसल यहाँ के लिए एक संक्षिप्ति (सारांश )  थी ...जैसे ही  भेजना चाहा अपने अकाउंट में लागिन नहीं कर पाया और वही सन्देश फिर आया कि आपका जी मेल अकाउंट डिसेबल कर दिया गया है ...एक अनहोनी का अहसास कंपकपी सा दे गया ...तो यह समस्या वास्तविक थी .....जी हाँ सौ फीसदी वास्तविक और मेरे पैरों तले जमीन खिसक चुकी थी ..मैं घबराहट के मोड में आ चुका था ....आनन फानन ब्लॉगों का हालचाल लेने गया और वहां प्रमुखता से जो सन्देश उभरा उसने मेरा रहा सहा धैर्य भी किनारे कर दिया -'आपके ब्लाग को रिमूव कर दिया गया है' सन्देश ने मेरी सिट्टी पिट्टी गुम कर दी...ब्लॉग क्या, पूरा ब्लॉगर  डैश बोर्ड ही गायब था ....मैंने इधर उधर कुछ प्रयास किये मगर मामला गंभीर होने का अहसास मुझे हो गया -कोई बड़ी अनहोनी हो चुकी थी ...

अब हम आपको क्या बताएं क्या क्या न हो गया चंद पलों में ...लगा यह संसार नश्वर है ..लगा कि आभासी दुनियाँ में से मैं चल बसा ...कहीं इस सदमे से वास्तविक दुनियाँ से भी नाता न छूट जाय इसलिए अपनी उन तमाम जीवनीय शक्तियों का आह्वान किया जो अब तक के बहुत बुरे वक्त में मेरे काम आयी हैं और अपने को संभाला ...लेकिन ऐसा जरूर आभास हो गया कि मेरी एक टेम्पररी मौत हो चुकी है और अगर अब और देर पी सी पर रहा तो बड़ी घटना घट सकती है इसलिए उसे तुरंत आफ कर दिया -इस वक्त भी उन क्षणों को याद कर सारे शरीर में एक झुरझुरी सी फ़ैल जा रही है ....मुझे सबसे बड़ी चिंता ईमेल अकाउंट की हो रही थी जिस पर कितने ही लेबल ,डाक्यूमेंट ,बुकमार्क सेव थे और मैं अब पूरी दुनियाँ से कट चुका था -मेरा पूरा प्रोफाईल गायब था ,पिछले तीन -चार सालों की मेहनत मिट्टी में मिल चुकी थी ....सभी ब्लॉग -साईंस फिक्शन इन इंडिया ,साईब्लाग और क्वचिदन्यतोपि  गायब थे....फिर दिल और दिमाग का खुद को तसल्ली देने का सिलसिला शुरू हुआ -"क्या है तुम्हारे लिए लेखन ....यह तो हाथ का मैल रहा है ...लिखा जैसे हथेली को रगड़ा और मैल को फेक दिया ..अपने लिए तो था नहीं लेखन(इदं न मम)  दूसरों के लिए था गया सो गया उसके लिए क्या सोच! आदि आदि " अब केवल समस्या मेल अकाउंट की थी जो भीषण लग रही थी ... घबराहटें गतिविधियों की एक चेन प्रतिक्रिया शुरू करा देती हैं ..मैंने उससे सायास बचने की कोशिश तो की मगर पूरी तरह सफल नहीं हुआ ..

उसी समय उम्मतें वाले  अली भाई का फोन आया तो उन्होंने बी एस पाबला जी से फ़ौरन सलाह लेने की बात की ..मैंने उन्हें फोन मिलाकर समस्या बताई तो उन्होंने पहले तो बड़ी खरी खोटी सुनायी कि उनके बार बार सलाह के बाद मैंने बैक अप क्यों नहीं लिए थे-मगर अब इन बातों का कोई फायदा नहीं था ...यह वे भी समझ गए और बात को आखिरी मुकाम पर लाते हुए मुझसे ई मेल आई डी और पासवर्ड माँगा ...वक्त की नजाकत और  पाबला जी की इंटिग्रिटी को देख मैंने उनके सलाह के  मुताबिक़ उन्हें सौप दी ....अब जो होगा देखा जाएगा की राह पर आ गया था ....एक मजे की बात है कि आकस्मिक अवसाद  के क्षणों में मुझे नींद आने लगती है -यह एक विचित्र व्यवहार है मगर मेरे लिए सदैव जीवनदाई रहा है..शायद  मेरे मस्तिष्क  ने खुद को ऐसा प्रोग्राम्ड  कर रखा है ..मैं सो गया ....पत्नी का कहना था कि उनके वैवाहिक जीवन का वह पहला मौका था जब मैंने रात का खाना नहीं  खाया था -ये मुई ब्लागिंग जो न करा दे ....उन्हें इस मौके की बेसब्री से तलाश थी कि कोई रात तो मैं उन्हें महिला श्रम से मुक्त कर दूं -और यह सुनहरा मौका उनके जीवन में आन पहुंचा था ....सुबह तीन बजे ही नींद खुल गयी ..कम्यूटर की ओर  देखने का भी मन नहीं हो रहा था ..उजड़ी दुनियाँ को भी कोई मुड़ कर देखना चाहता  है भला! बेमन बिस्तर पर पड़े करवटें बदलता रहा -गूगल की गुंडागर्दी पर कुढ़ता रहा ...मन मार कर उठा,कंप्यूटर आन कर सीधे फेसबुक पर गया ..सोचा चलो यहाँ तो अपुन का वजूद है ..अपने हादसे को वहीं लिख मारा ....सुबह मेरी प्यारी रोजाना की सुबह -सुबहे बनारस आ पहुँची थी -तय किया अब वर्डप्रेस में जाकर नया ब्लॉग बनायेगें -सुबहे बनारस .....फिर सोचा नहीं नहीं अब ब्लागिंग से बिना टंकी पर चढ़ने के आरोपण के कुछ राहत तो मिलेगी -यह सब तो छुपा हुआ वरदान -अंगरेजी में बोलें तो 'ब्लेसिंग इन डिज्गायिज ' है -इस मौके का मुझे लाभ उठाना चाहिए ...ऐसे न जाने कितने ही विचारों की रेल पूरी ताकत से दिमाग में दौड़ रही थी ....

इस बीच मित्रों के फोन आने शुरू हो गए थे ..संतोष त्रिवेदी जी इसमें आगे रहे और मास्टर ब्लास्टर ब्लॉगर प्रवीण त्रिवेदी जी ..अनुराग जी का फोन पिट्सबर्ग से आया ...गिरिजेश जी दिल्ली प्रवास  पर होने के बाद भी फोनियाये और हम लोग काफी देर तक आभासी जीवन की निस्सारता पर विचार मग्न रहे ...अनूप शुक्ल जी ने एस एम् एस भेजकर मुझे एक लिंक के सहारे मेरे ब्लागों की हूबहू आर्काईव ही सौंप दी ...कल शाम उनका भी फोन आया ....फेसबुक पर अल्पना वर्मा जी ,आराधना चतुर्वेदी जी ,रैंडम स्क्रिबलिंग वाली ज्योति मिश्र ने, अपने उन्मुक्त जी ने ,राजेन्द्र स्वर्णकार जी ,रायकृष्ण तुषार,पंकज मिश्र,  ..  और भी कई सुहृदों ने ऐसे नाजुक मौके पर मेरा हौसला बनाये रखा और कुछ और भी मित्राणियों ने नामोल्लेख न करने की रिक्वेस्ट के साथ अपने सुझाव और हौसले दिए(वे ऐसी गोपनीयता क्यों बरतती हैं :( )  ....शिव मिश्रा जी ने फेसबुक पर मेसेज भेजकर हालात का जायजा लिया .....अमरेन्द्र जी ने अनुभवों को आपसे बाँटने को प्रेरित किया ...बेटे कौस्तुभ ने अपनी बड़ी व्यस्तता के बावजूद भी बंगलौर से फोन पर जरुरी टिप्स दिए ..बेटी प्रियेषा ने दो टूक कहा कि पापा इस मौके का फायदा उठा आप व्यायाम को प्राथमिकता देकर पहले अपना मोटापा दूर कीजिये ....हाँ उसे भी मेरे ब्लाग्स के गायब होने का बड़ा मलाल था ....पत्नी ने कल शाम को बताया कि मुझे बुखार भी हो आया है ....बहरहाल अब किस्सा  कोताह यह कि मित्रों की मदद और शुभकामनाओं के चलते  २४ घंटों के भीतर मेरा मेल अकाउंट बहाल हो गया है और सुबह सुबह ब्रह्म बेला में जयकृष्ण तुषार जी ने फोन करके अति प्रिय सूचना दी की मेरे ब्लागों की वापसी हो चुकी है ....लगा जैसे जन्नत की वापसी हो गयी हो ...उनकी मिठाई ड्यू हो गयी है ..हाँ अब यह मुद्दा मेरे और सभी के लिए बहुत मौजू बना है कि अंतर्जालीय वजूद में रहने के लिए  हमारी सावधानियां और तरीके बड़े पुख्ता किस्म के होनी चाहिए .....बाकी कुछ और विवेचन टिप्पणियों में होंगे ही ...
मित्रों बहुत आभार आपका 

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