मुझे निकाल के कहीं पछता रहे हों न आप
महफ़िल में इस ख़याल से फिर आ गया हूँ मैं :-)
यह शेर आज तब याद आया जब इस नए स्थान - राबर्ट्सगंज में नेट से कनेक्ट होने पर मुझे सहसा ब्लागिंग की सुधि आयी . इतना लम्बा अंतराल पिछले पांच वर्षों में किन्ही दो पोस्ट के बीच नहीं हुआ था . जब गत 21 नवम्बर को सारे तामझाम, सर सामान और एक अदद धर्मपत्नी तथा एक विदेशी नस्ल की कुतिया -पाम-स्पिट्ज(डेजी) के साथ यहाँ बनारस से सरे शाम पहुंचा तो अंतर्जाल से लगभग कट चुका था ..हाँ मोबाईल से/ का एक गर्भनाल सम्बन्ध अवश्य बना था मगर वह नाकाफी था .....लगा किसी सूनसान जनहीन द्वीप पर आ पहुंचा हूँ . कटे होने और गैर जुड़ाव की यह अनुभूति नयी किस्म की थी ....और यह सिलसिला लम्बा चला .नए स्थान पर अनुकूलन और व्यवस्थित होने की प्राथमिकतायें कुछ ऐसी रहीं कि विलासितापूर्ण ब्लागिंग के लिए कई मौका नहीं मिला . आते ही तेल नून लकड़ी के नवीन संस्करणों -गैस कनेक्शन ,आर ओ ,इनवर्टर ,दूधवाले ,अखबारवाले ,महरी की जुगाड़/व्यवस्था फिर डिश टीवी कनेक्शन , बैंक खाता आदि में ऐसा जी हलकान रहा कि हम अपना ही नहीं कई अन्य पसंदीदा ब्लॉग फिलहाल भूल गए और साथ ही कई ब्लागरों को भी ....मजे की बात वे ब्लॉगर भी मुझे भूल गए -हाँ कुछ फेसबुकिये मित्र जरुर सम्बन्धों के आशा दीप टिमटिमाये रहे ......और मुझे नेट कनेक्ट करने के तरीके बताते रहे .....फिलहाल रिलायंस नेट कनेक्ट डाटाकार्ड एक जगहं से उधारी पर ले यह पोस्ट लिख रहा हूँ . हाँ खुद का अप्लाई कर दिया है ,एक हप्ते का वक्त लगना बताया गया है .
नए स्थान पर जमने में अभी समय लगेगा ,नए लोग नए मिजाज। मगर लग अच्छा रहा है -पिछड़ा इलाका है तो लोगों की सरलता सहजता संदूषित नहीं हुयी है और खाने पीने के सामान भी अपेक्षया बहुत कम संदूषित है ....पत्नी यहाँ के दूध और सब्जियों की मुग्ध भाव से प्रशंसा कर रही हैं .उनके विशेषाग्रह पर बचपन से ही दूध से नाक भौ सिकोड़ने वाला मैं भी यहाँ थोडा दूध पीने लगा हूँ -पियो ग्लास भर दूध की तर्ज पर ......सब्जियों में निश्चय ही ताजगी भरा अलग सा स्वाद है . अब इतना सब इंतजाम होने के बाद बस ब्लागिंग की कमी रह गयी थी सो वह भी आज से राह पर आ गयी -जिन्दगी की गाडी तेजी से पटरी पर लौटने लगी है .
इस बीच केवल संतोष त्रिवेदी जी ने फोनियाया और हाल चाल पूछा .....कमाल के ब्लॉगर हैं वर्ना आज की इस भागमभाग की दुनिया में किसे किसकी फ़िक्र रहती है . गहन रिश्तों के वायदे करने वाले भी न जाने कहाँ मुकर गए ....आप यहाँ तभी तक हैं जब तक हैं और दिख रहे हैं -अन्यथा कोई आपकी सुधि लेने वाला नहीं है .....नए ब्लागरों को यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए ....और अपेक्षाएं नहीं पालनी चाहिए ...अंतर्जाल आंनद के लिए कोई बैकुंठ नहीं है,असली दुनिया से भी इस मामले में गया गुजरा है . कितने मित्रों से इसलिए पहले से भी दुआ सलाम बंद है -और इन पांच साला ब्लागिरी में दुआ सलाम बंद वाली लिस्ट भी बढ़ती गयी है -कभी किसी ने कहा था क़ि आपकी आँखें बहुत गहराई वाली सुन्दरता लिए हैं,किसी ने मेरी एक प्रोफाईल फोटो जो अब लगभग दस वर्ष पुरानी है मगर कहीं कहीं अब भी दिख जाती है -अरे वही सूट टाई वाली को देखकर मर मिटने का अभिनय किया था :-) ....तब से सूट पहनना बंद ही कर दिया :-( ....किसी किसी ने इमरजेंसी का तकाजा देकर कुछ इमदाद भी झटक लिया था ...वे सभी अब तटस्थ हो लिए हैं .....मगर यह सब मैं बनारस की गंगा मैया को समर्पित कर आया हूँ .....
सोनांचल में एक नयी ताजगी के साथ एक नयी ब्लागिंग पारी शुरू करते हुए मुझे एक नौसिखियापन सा लग रहा है :-) मैं वापस लौट आया हूँ ......हो सकता है मेरा यहाँ अनुपस्थित रहना किसी को सचमुच खला ही हो ... :-) यह बात अब तक मुंह से निकल पायी हो तो अब भी कोई देर नहीं हुयी है ...मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा ...सुस्वागतम!










